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UPSC Success Story: बेंगलुरु में ऐसा क्या है जो जबलपुर में नहीं है? पढ़िए UPSC 2020 की टॉपर अंहिसा जैन का जवाब

UPSC की तैयारी करने वालों से कई तरह के सवाल पूछे जाते हैं। ये सवाल चर्चा में भी रहते हैं। मध्यप्रदेश की अहिंसा जैन (Ahinsa Jain) ने प्राइवेट कम्पनी की नौकरी छोड़कर संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की तैयारी शुरू की थी।

UPSC 2020 interview with achiever Ahinsa Jain questions asked to her in civil service exam pwt
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New Delhi, First Published Nov 13, 2021, 12:41 PM IST
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करियर डेस्क. UPSC की तैयारी करने वालों से कई तरह के सवाल पूछे जाते हैं। ये सवाल चर्चा में भी रहते हैं। मध्यप्रदेश की अहिंसा जैन (Ahinsa Jain) ने प्राइवेट कम्पनी की नौकरी छोड़कर संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की तैयारी शुरू की थी। उन्होंने 2015 से लगातार यूपीएससी परीक्षा के छह अटेम्पट दिए। यूपीएससी 2020 परीक्षा में उनकी 53वीं रैंक आई। यह उनका छठा प्रयास था। उन्होंने लगातार इंटरव्यू तक पहुंचकर असफल होने के बाद भी हार नहीं मानी और अंत में अपने लक्ष्य तक पहुंची। अहिंसा से कई तरह के सवाल किए गए थे। अफगानिस्तान संकट के समय भारतीय दूतावास पूरी तरह खाली करा लिया गया था? यह निर्णय सही था या नहीं। इस तरह के सवालों के जवाब देकर उन्होंने जॉब हासिल की। संघ लोक सेवा आयोग (UPSC 2020) के नतीजे 24 सितंबर, 2021 को जारी किए गए। फाइनल रिजल्ट (Final Result) में कुल 761 कैंडिडेट्स को चुना गया। Asianetnews Hindi संघ लोक सेवा आयोग (UPSC 2020) में सिलेक्ट हुए 100 कैंडिडेट्स की सक्सेज जर्नी (Success Journey) पर एक सीरीज चला रहा है। इसी कड़ी में हमने अहिंसा जैन से बातचीत की। आइए जानते हैं अहिंसा जैन से किस तरह के सवाल पूछे गए थे औऱ उनका जवाब क्या है?

सवाल- आप इतने इंटरव्यू दे रही हैं और आपका IAS में नहीं हो रहा है तो इसमें इंटरव्यू लेने वाले की गलती है या देने वाली की गलती है?
जवाब-
जो इंटरव्यू ले रहे हैं वह बहुत ही फेयर प्रोसिजर है। वह सबको समान मानकों पर ही परख रहे हैं तो गलती उनकी नहीं है। कमी कहीं न कहीं मेरी तरफ से ही हो रही है।

सवाल- आपने इस बार अलग क्या किया है?
जवाब-
अभी तक मेरी जो हॉबीज थी उसे मैं बहुत मैकेनिकल लेती थी पर इस बार अपनी हॉबीज को सच में परसू किया है। मैंने इस बार ज्यादा से ज्यादा लोगों से इंटरएक्ट किया और बातें की। उसने ज्यादा हेल्प किया इसके साथ ही मेडिटेशन ने भी हेल्प किया।

सवाल- बेंगलुरू में ऐसा क्या है जो जबलपुर में नहीं है?
जवाब-
बेंगलुरू को गार्डेन सिटी बोलते हैं, वहां बहुत ज्यादा ग्रीनरी है। जबलपुर में भी ग्रीनरी है पर बेगलुरू में ज्यादा ग्रीनरी है। बेंगलुरू में कास्टमोपालिटन कल्चर है। मतलब दूरे देश-दुनिया से लोग वहां काम करने आते हैं। जबलपुर कल्चरल कैपिटल है लेकिन वहां आस पास के लोग ही काम करते हैं। बेंगलुरू का मौसम बहुत अच्छा है जो जबलपुर में उतना नहीं है।

सवाल- अफगानिस्तान संकट के समय भारतीय दूतावास पूरी तरह खाली करा लिया गया था] यह निर्णय सही था या नहीं?
जवाब-
तालिबान कहते कुछ हैं और करते कुछ हैं। तालिबान ने तो ये भी कहा था कि वह औरतों के अधिकारों की रक्षा करेंगे लेकिन उन्होंने औरतों से कहा कि आप स्कूल नहीं जा सकते। आप इस तरह के कपड़े नहीं पहन सकते। अभी इस फेज में तालिबान पर विश्वास करना मुश्किल है। भारत सरकार की प्राथमिकता है कि पहले वह अपने नागरिकों व वहां काम कर रहे अफसरों के जीवन की रक्षा करे। विशेष स्थिति में जब तक वहां हिंसा चल रही है तब तक के लिए यह निर्णय अच्छा है। भविष्य में हमें लगता है कि अफगानिस्तान में शांति बहाल हो सकती है। तालिबान भी टाकिंग टर्म में आ जाए तो हम अपनी एबेंसी पुनः अफगानिस्तान में बहाल कर सकते हैं।   

सवाल- साइक्लिंग करना क्यों अच्छा लगता है] कैसे करते हो?
जवाब-
बचपन में मेरे भाई ओर पापा ने साइक्लिंग सिखायी। स्कूल नजदीक था। तीसरी और चौथी कक्षा में अपने भाई के साथ साइकिल से स्कूल जाती थी। जबलपुर सुरक्षित शहर है। ट्रैफिक कम था। तभी पैरेंटस ने अनुमति दी थी। एकेडमी में कैम्पस बहुत बड़ा है। ट्रेनिंग चल रही है तो वहां पर भी साइक्लिंग करते हैं। साइक्लिंग करना अच्छा लगता है क्योंकि मैं खुद से बात कर सकती हूं। मैं उस समय नेचर से कनेक्ट कर पाती हूं। अल्बर्ट आइंस्टीन बोलते हैं कि अपना बैलेंस बनाए रखने के लिए आपको चलते रहना होता है।

यूपीएससी परीक्षा की तैयारी के लिए मां की प्रेरणा
अहिंसा जैन कहती हैं कि शुरूआती दिनों में यूपीएससी परीक्षा की तैयारी को लेकर वह तैयार नहीं थी। उन्होंने लोगों से इस बारे में बात की तो फीडबैक यही मिला कि यह परीक्षा कठिन है। नींद कम करनी पड़ती है। बहुत पढ़ना पड़ता है। बहुत चीजें कम्प्रोमाइज करनी पड़ती हैं। उनकी तैयारी के पीछे उनकी मां का मोटिवेशन था। वह बार बार अहिंसा को यूपीएससी परीक्षा की तैयारी के लिए प्रेरित करती थीं। स्प्रिचुअल बुक पढ़ना, वीडियो देखती थीं। मेडिटेशन करती थी, इन चीजों ने अहिंसा को मोटिवेटेड रखा। उनका सबसे बड़ा मोटिवेशन यही था कि वह इंटरव्यू तक पहुंच रही हैं तो वह अपने लक्ष्य के नजदीक हैं। यह भी उन्हें मोटिवेट रखता था कि थोड़ा सा प्रयास और चयन हो जाएगा।

इंजीनियरिंग करने के बाद शुरू की नौकरी
उनकी प्रारंभिक शिक्षा मध्यप्रदेश बोर्ड से हुई। एक दिन प्रिंसिपल ने उनके पैरेंटस से कहा कि आपका बच्चा बेहतर स्कूल डिजर्व करता है। इसके बाद वह आईसीएसई बोर्ड के स्कूल में शिफ्ट हो गईं। जबलपुर इंजीनियरिंग कॉलेज से उन्होंने इलेक्ट्रानिक्स एंड टेलीकम्युनिकेशन इंजीनियरिंग में ग्रेजुएशन किया और फिर उन्होंने यूके बेस्ड एमएनसी में नौकरी शुरू कर दी।

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