बिहार के मुजफ्फरपुर में जन्मे कनिष्क नारायण को ब्रिटेन का नया आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) मंत्री बनाया गया है। यह लेख उनके राजनीतिक सफर, AI पर उनके विचारों और भारत के साथ तकनीकी सहयोग में उनकी भूमिका पर प्रकाश डालता है।
ब्रिटेन की आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI पॉलिसी की कमान अब बिहार में जन्मे कनिष्क नारायण के हाथों में होगी। ब्रिटेन के नए AI मंत्री बने नारायण सिर्फ दो साल पहले ही सांसद चुने गए थे और अब देश के सबसे अहम पदों में से एक पर पहुंच गए हैं। यह नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब AI टेक्नोलॉजी में आगे निकलने के लिए दुनियाभर के देशों में होड़ मची हुई है। पद संभालने के बाद नारायण ने साफ किया कि उनका मुख्य लक्ष्य यह पक्का करना है कि AI का भविष्य तय करने में ब्रिटेन की अहम भूमिका हो। कनिष्क नारायण ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा, "देश AI को आकार देंगे या AI देशों को, यह तय करने के लिए बहुत कम वक्त बचा है। ब्रिटेन अभी उसी नाजुक मोड़ पर है।"
बिहार से ब्रिटिश कैबिनेट तक का सफर
कनिष्क नारायण का जन्म नवंबर 1989 में बिहार के मुजफ्फरपुर में हुआ था। बाद में उनका परिवार दिल्ली आ गया और जब कनिष्क 12 साल के थे, तो वेल्स के कार्डिफ शहर में बस गए। नारायण ने कई बार बताया है कि ब्रिटेन आने के बाद उनके माता-पिता को आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ा। उन्होंने कम सैलरी वाली और नाइट शिफ्ट में नौकरियां कीं। नारायण कहते हैं कि अपने माता-पिता के संघर्षों को देखकर ही उन्हें समाज में मौकों की अहमियत समझ आई।
कार्डिफ के एक सरकारी स्कूल में पढ़ने के बाद, उन्होंने स्कॉलरशिप पर ब्रिटेन के मशहूर ईटन कॉलेज में दाखिला लिया। इसके बाद उन्होंने ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के बैलिओल कॉलेज से फिलॉसफी, पॉलिटिक्स और इकोनॉमिक्स में डिग्री ली। उन्होंने अमेरिका की स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी से MBA भी किया है।
राजनीति में आने से पहले
राजनीति में आने से पहले नारायण ने फाइनेंस, वेंचर कैपिटल और पब्लिक पॉलिसी जैसे सेक्टर में काम किया। उन्होंने एक बड़ी इन्वेस्टमेंट फर्म 'लजार्ड' में काम किया, जहां वे यूरोप और अमेरिका की कंपनियों, सरकारों और टेक उद्यमियों को सलाह देते थे। उनका मुख्य फोकस AI, फिनटेक और क्लाइमेट टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों पर था। बाद में, उन्होंने 'एटोमिको' और 'क्लॉकटावर वेंचर्स' जैसी इन्वेस्टमेंट फर्मों के साथ मिलकर टेक स्टार्टअप्स के साथ भी काम किया। वह ब्रिटिश सरकार में एक आर्थिक विशेषज्ञ और सीनियर एडवाइजर भी रह चुके हैं, जहां उन्होंने मंत्रियों और प्रधानमंत्री कार्यालय के साथ काम किया। ब्रिटेन के 25-वर्षीय पर्यावरण योजना को बनाने में भी उनकी भूमिका थी।
तेजी से बढ़ा राजनीतिक कद
नारायण 2024 के ब्रिटिश आम चुनाव में लेबर पार्टी के टिकट पर वेल्स की 'वेल ऑफ ग्लैमोर्गन' सीट से जीतकर सांसद बने। इसके साथ ही वह वेल्स से चुने गए पहले अल्पसंख्यक सांसद भी बन गए। सितंबर 2025 में उन्हें AI और ऑनलाइन सुरक्षा के लिए पार्लियामेंट्री अंडर-सेक्रेटरी का पद मिला। इस दौरान, उन्होंने AI और सेमीकंडक्टर सेक्टर में करोड़ों पाउंड के निवेश की घोषणा करने में अहम भूमिका निभाई।
इनमें ब्रिटिश कंपनियों से AI चिप्स खरीदने के लिए 40 करोड़ पाउंड की योजना और देश में क्लाउड कंप्यूटिंग क्षमता बढ़ाने के लिए 25 करोड़ पाउंड का निवेश शामिल है। वह ब्रिटेन के 'AI सेफ्टी इंस्टीट्यूट' के कामकाज की भी निगरानी करेंगे। इस इंस्टीट्यूट का मुख्य काम अत्याधुनिक AI मॉडल्स की सुरक्षा और उनसे जुड़े खतरों का आकलन करना है।
AI पर क्या सोचते हैं कनिष्क नारायण?
कनिष्क नारायण AI को मानव इतिहास में सबसे बड़ा बदलाव लाने वाली टेक्नोलॉजी में से एक मानते हैं। उन्होंने कहा है, "AI शायद मानव इतिहास की सबसे निर्णायक तकनीक होगी। इसका असर कई दूसरे तकनीकी बदलावों से कहीं ज्यादा होगा।" हालांकि, वह इस बात को भी मानते हैं कि इससे नौकरियों और समाज पर पड़ने वाले असर को लेकर चिंताएं हैं।
भारत से कनेक्शन
नारायण ने ब्रिटेन और भारत के बीच तकनीकी सहयोग को मजबूत करने के लिए भी काम किया है। भारत में हुए 'इंडिया AI इम्पैक्ट समिट' में उन्होंने ब्रिटिश प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया था। कनिष्क नारायण ने भारत के विज्ञान और प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह से मुलाकात कर AI समेत अन्य उभरती टेक्नोलॉजी में सहयोग पर चर्चा की थी। नारायण ने भारत के टेक सेक्टर की तारीफ करते हुए बेंगलुरु को 'दुनिया के टेक इकोसिस्टम की धड़कन' बताया था।
अब ब्रिटेन के AI मंत्री के तौर पर कनिष्क नारायण AI रेगुलेशन, सेमीकंडक्टर में निवेश, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और सरकार व इंडस्ट्री में AI के इस्तेमाल जैसी अहम नीतियों में बड़ी भूमिका निभाएंगे।
