बेटी के गायब होने के बाद एक मां अपराध की खतरनाक दुनिया में उतर जाती है। नेटफ्लिक्स पर रिलीज हुई तापसी पन्नू की ‘गांधारी’ इमोशन, एक्शन और सस्पेंस को साथ लाती है।
मां और बच्चे का रिश्ता जितना भावुक होता है, संकट के वक्त उतना ही खतरनाक रूप भी ले सकता है। ‘गांधारी’ इसी सोच को एक रॉ एक्शन थ्रिलर में बदलती है, जहां बेटी के अचानक गायब होने के बाद एक मां अपनी पूरी दुनिया दांव पर लगा देती है। देवाशीष मखीजा के निर्देशन में बनी फिल्म में तापसी पन्नू मुख्य भूमिका में हैं और उनके साथ इश्वाक सिंह, जतिन सरना, छाया कदम, स्वस्तिका मुखर्जी, मीता वशिष्ठ और बाल कलाकार मायरा शिवन अहम किरदारों में हैं। फिल्म 3 सितंबर से नेटफ्लिक्स पर स्ट्रीम हो रही है। सवाल यही है कि क्या इसका इमोशनल हुक और सस्पेंस आखिर तक असर बनाए रखता है?
क्या है ‘गांधारी’ की कहानी?
कहानी बानी की है, जो पति गोकुल और छोटी बेटी मिष्टी के साथ ट्रेन में सफर कर रही है। पश्चिम बंगाल के जॉयपुरा स्टेशन पर मिष्टी अचानक गायब हो जाती है। बानी खिड़की से एक महिला को बच्ची को लेकर भागते देखती है और उसके पीछे दौड़ पड़ती है। पीछा करते वक्त हादसे में उसके सिर पर गंभीर चोट लगती है और उसकी आंखों पर पट्टी बांधनी पड़ती है। इसके बावजूद बेटी की तलाश नहीं रुकती। बानी सुरागों के सहारे उस अपराधी दुनिया तक पहुंचने की कोशिश करती है, जहां उसकी बेटी कैद है। कहानी में महाभारत की गांधारी का प्रतीक भी इसी वजह से आता है।
‘गांधारी’ की स्टार कास्ट की परफॉर्मेंस कैसी है?
तापसी पन्नू फिल्म की सबसे बड़ी ताकत हैं। वह बानी की बेचैनी, डर और टूटन को विश्वसनीय तरीके से पेश करती हैं, वहीं कहानी के दूसरे हिस्से में किरदार का आक्रामक रूप भी उतनी ही मजबूती से निभाती हैं। इश्वाक सिंह संयमित अभिनय करते हैं, जबकि जतिन सरना अपनी मौजूदगी दर्ज कराते हैं। छाया कदम, स्वस्तिका मुखर्जी और मीता वशिष्ठ को सीमित स्क्रीन स्पेस के बावजूद मजबूत कलाकारों के तौर पर महसूस किया जाता है। मायरा शिवन भी भावुक दृश्यों में प्रभाव छोड़ती हैं।
देवाशीष मखीजा का डायरेक्शन कैसा है?
देवाशीष मखीजा ने फिल्म को चमकदार एक्शन शो बनाने के बजाय जमीन से जुड़ा रखा है। मारधाड़ में जरूरत से ज्यादा ग्लैमर नहीं है और यही रॉ ट्रीटमेंट कहानी के तनाव को बढ़ाता है। खास बात यह है कि निर्देशन सिर्फ एक्शन पर निर्भर नहीं रहता, बल्कि बानी के मानसिक और भावनात्मक संघर्ष को भी कहानी का अहम हिस्सा बनाता है। मां की निजी लड़ाई और अपराध की दुनिया के बीच बना टकराव फिल्म को सामान्य एक्शन थ्रिलर से अलग पहचान देता है।
कैसा है फिल्म का म्यूजिक?
फिल्म का बैकग्राउंड स्कोर इसका महत्वपूर्ण तकनीकी हथियार है। कई दृश्यों में संगीत के बजाय आवाजों, माहौल और साउंड डिजाइन पर ज्यादा जोर दिया गया है। इससे बानी के डर, बेचैनी और खतरे का एहसास बढ़ता है। खासकर तनावपूर्ण हिस्सों में बैकग्राउंड साउंड कहानी के साथ चलता है और दर्शक को घटनाओं के करीब ले जाता है।
टेक्नीकल फ्रंट पर कैसी है फिल्म?
कनिका ढिल्लों की कहानी और पटकथा फिल्म को महिला-केंद्रित संघर्ष के साथ आगे बढ़ाती है। शुरुआत के बाद कहानी जल्दी गति पकड़ती है और रहस्य बनाए रखती है। हालांकि, इंटरवल के बाद कुछ घटनाओं का अनुमान लगाया जा सकता है। एडिटिंग फिल्म को अनावश्यक रूप से खिंचने नहीं देती और करीब 1 घंटा 55 मिनट की लंबाई इसके पक्ष में जाती है। साउंड डिजाइन और बैकग्राउंड स्कोर खास तौर पर उल्लेखनीय हैं।
क्यों देखें और क्यों ना देखें ‘गांधारी’?
अगर आपको रॉ एक्शन, सामाजिक पृष्ठभूमि, मां-बेटी के भावनात्मक रिश्ते और लगातार तनाव वाली थ्रिलर पसंद हैं, तो ‘गांधारी’ अच्छा ओटीटी विकल्प है। तापसी पन्नू का दमदार अभिनय और मखीजा का यथार्थवादी ट्रीटमेंट फिल्म को पकड़कर रखते हैं। कुल मिलाकर, ‘गांधारी’ भावनात्मक आधार वाली एक असरदार थ्रिलर है, जिसे हमारी ओर से 5 में से 3.5 स्टार।
