Building Collapse India: दिल्ली के सत्य निकेतन हादसे ने एक बार फिर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। यह घटना पहली बार नहीं हुई है, जानिए देश में इससे पहले कब-कब इमारतें ढहीं और कितनों की जान गई? जानिए 10 बड़े बिल्डिंग हादसों के बारे में।

Delhi Satya Niketan Building Collapse: दिल्ली के सत्य निकेतन में 6 सितंबर 2026 को 5 मंजिला इमारत गिरने की घटना ने एक बार फिर देश के शहरों में कमजोर इमारतों, अवैध निर्माण और सुरक्षा नियमों के पालन पर सवाल खड़े कर दिए हैं। हादसे वाली इमारत छात्रों के रहने के लिए PG के तौर पर इस्तेमाल की जा रही थी। अब तक 6 लोगों की मौत की खबर सामने आई है। रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद आसपास की इमारतों की सुरक्षा को लेकर भी प्रशासन ने कदम उठाए हैं। यह पहली घटना नहीं है। पिछले कई दशकों में देश के अलग-अलग शहरों में इमारतें गिरने से बड़ी संख्या में लोगों की जान जा चुकी है। इनमें कई हादसों के पीछे पुरानी और जर्जर इमारतें, अवैध मंजिलें, कमजोर निर्माण, जबरदस्ती का बदलाव और रखरखाव की कमी जैसे कारण सामने आए। आइए जानते हैं देशभर के ऐसे ही 10 बड़े बिल्डिंग हादसों के बारे में...

1. मुंबई के पास मुंब्रा हादसा, 74 मौतें

4 अप्रैल 2013 को महाराष्ट्र के ठाणे जिले के मुंब्रा के शिलफाटा इलाके में एक निर्माणाधीन इमारत ढह गई। यह हादसा देश के सबसे घातक बिल्डिंग हादसों में गिना जाता है। इसमें 74 लोगों की मौत और करीब 60 से ज्यादा लोग घायल हुए थे। मरने वालों में 18 बच्चे भी शामिल थे। जांच में इमारत के निर्माण की वैधता और सुरक्षा नियमों को लेकर गंभीर सवाल उठे। इमारत का निर्माण नियमों को दरकिनार करके किया गया था। इस मामले में बिल्डर के साथ कई स्थानीय अधिकारियों और अन्य लोगों पर भी कार्रवाई हुई।

2. दिल्ली का ललिता पार्क हादसा, 67 से ज्यादा मौतें

15 नवंबर 2010 को पूर्वी दिल्ली के ललिता पार्क, लक्ष्मी नगर में एक बहुमंजिला इमारत अचानक ढह गई। हादसे में 67 से ज्यादा लोगों की मौत हुई। इमारत में नियमों के खिलाफ एक्स्ट्रा फ्लोर बनाई गई थीं और बारिश व पानी के कारण नींव पर भी असर पड़ा था। इमारत में बड़ी संख्या में लोग रह रहे थे, जिससे हादसा बेहद भयावह बन गया।

ये भी पढ़ें- दिल्ली के इस PG में रहते थे DU के छात्र, कुछ सेकंड में मलबा बना 5 मंजिल

3. मुंबई का बाबू गेनू मार्केट हादसा, 60 से ज्यादा मौतें

27 सितंबर 2013 को मुंबई के मझगांव इलाके में बाबू गेनू मार्केट की इमारत ढह गई। हादसे में 60 से ज्यादा लोगों की मौत हुई और 30 से ज्यादा लोग घायल हुए। यह इमारत काफी पुरानी थी और इसे जर्जर घोषित किए जाने की बात सामने आई थी।

4. भिवंडी बिल्डिंग हादसा, 39 मौतें

सितंबर 2020 में महाराष्ट्र के भिवंडी में 3 मंजिला इमारत ढह गई। इस हादसे में 39 लोगों की मौत हुई। यह घटना भी मानसून के दौरान हुई थी और इमारत की हालत को लेकर सवाल उठे थे। .इस हादसे ने मुंबई महानगर क्षेत्र में पुराने और कमजोर मकानों की समस्या को फिर सामने ला दिया। खासकर घनी आबादी वाले इलाकों में जर्जर इमारतों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा एक बड़ा मुद्दा बनकर सामने आई।

5. मुंबई के भेंडी बाजार में 34 मौतें

31 अगस्त 2017 को दक्षिण मुंबई के भेंडी बाजार में करीब 117 साल पुरानी हुसैनी बिल्डिंग ढह गई। इस हादसे में 34 लोगों की मौत हुई। इमारत में कई परिवार रहते थे और इसमें एक प्ले स्कूल भी चलता था। खास बात यह थी कि इमारत को पहले ही असुरक्षित घोषित किया जा चुका था। इसके बावजूद लोग वहां रह रहे थे।

6. मुंबई का साई सिद्धि अपार्टमेंट, 17 मौतें

25 जुलाई 2017 को मुंबई के घाटकोपर में 4 मंजिला साई सिद्धि अपार्टमेंट ढह गया। इसमें 17 लोगों की मौत और 20 से ज्यादा लोग घायल हुए थे। जांच में इमारत के ग्राउंड फ्लोर पर किए गए स्ट्रक्चरल बदलावों को लेकर सवाल उठे।

7. मुंबई का कुर्ला हादसा-19 मौतें

27 जून 2022 को मुंबई के कुर्ला इलाके में 4 मंजिला, करीब 50 साल पुरानी इमारत का एक हिस्सा ढह गया। हादसे में 19 लोगों की मौत हुई। इमारत लंबे समय से खराब कंडीशन में थी।

ये भी पढ़ें- Delhi Building Collapse: सत्य निकेतन की बिल्डिंग का मालिक कौन?

8. मुंबई के डोंगरी में 2019 का हादसा

16 जुलाई 2019 को मुंबई के डोंगरी इलाके में 4 मंजिला इमारत गिर गई। हादसे में 11 लोगों की मौत हुई और कई लोग मलबे में फंस गए थे। संकरी गली होने की वजह से राहत और बचाव कार्य में भी मुश्किलें आईं। इमारत को जर्जर बताया गया था और रिडेवलपमेंट प्रोसेस को लेकर भी जानकारी सामने आई थी।

9. लखनऊ का ट्रांसपोर्ट नगर हादसा-8 मौतें

सितंबर 2024 में लखनऊ के ट्रांसपोर्ट नगर इलाके में 3 मंजिला इमारत ढह गई। हादसे में 8 लोगों की मौत और 28 लोग घायल हुए। इमारत का इस्तेमाल कई कंपनियों के सामान रखने के लिए किया जा रहा था और हादसे के समय वहां करीब 35 से 40 लोग मौजूद बताए गए थे।

10. दिल्ली का सत्य निकेतन हादसा-2026 का ताजा मामला

अब बात उस घटना की, जिसने इस पूरी पुरानी कहानी को फिर चर्चा में ला दिया है। 6 सितंबर 2026 को दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के सत्य निकेतन में 5 मंजिला इमारत गिर गई। यह इमारत छात्रों के PG के रूप में यूज हो रही थी। शुरुआती जानकारी में बताया गया कि इमारत के बेसमेंट में मरम्मत का काम चल रहा था। हादसे के बाद दिल्ली पुलिस, फायर सर्विस, NDRF और दूसरी एजेंसियों ने रेस्क्यू शुरू किया। 7 सितंबर की सुबह तक 6 लोगों की मौत की पुष्टि हुई थी। दिल्ली की रेखा गुप्ता सरकार ने मामले में जांच के आदेश दिए हैं।

इन हादसों में एक जैसी कहानी क्यों दिखती है?

इन घटनाओं को देखें तो एक बात साफ होती है- हर बिल्डिंग हादसा केवल अचानक होने वाली दुर्घटना नहीं होता। कई मामलों में पहले से अल्टीमेटम मौजूद होती है। कहीं इमारत बहुत पुरानी होती है, कहीं बिना इजाजत के फ्लोर बढ़ा दी जाती हैं। कहीं स्ट्रक्चर में बिना एक्सपर्ट सलाह के बदलाव किए जाते हैं तो कहीं जर्जर घोषित होने के बावजूद लोग इमारत खाली नहीं करते।

सबसे बड़ा सबक क्या है?

इन हादसों से सबसे बड़ा सबक यही है कि बिल्डिंग सुरक्षा केवल कंस्ट्रक्शन के समय की जिम्मेदारी नहीं है। इमारत बनने के बाद उसकी रेगुलर जांच, टाइम पर मरम्मत, इलीगल बदलाव पर रोक और खतरनाक इमारतों को खाली कराने की व्यवस्था उतनी ही जरूरी है। सत्य निकेतन का हादसा इसलिए भी खास है क्योंकि यह छात्रों के रहने वाले इलाके में हुआ है। ऐसी जगहों पर बड़ी संख्या में लोग किराए या PG में रहते हैं और कई बार उन्हें इमारत की असलियत के बारे में प्रॉपर जानकारी नहीं होती। इसलिए मकान मालिक, स्थानीय निकाय और संबंधित एजेंसियों की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है। मुंब्रा से ललिता पार्क और भेंडी बाजार से सत्य निकेतन तक की घटनाएं एक ही सवाल पूछती हैं- क्या किसी बिल्डिंग के गिरने का इंतजार किए बिना उसकी कमजोरी पहचानकर एक्शन लिया जा सकता है? यही सवाल फ्यूचर के हादसों को रोकने का सबसे बड़ा की प्वाइंट है।