Moon Surface Eclipse View: अगर चंद्र ग्रहण के समय आप चांद पर खड़े हों, तो चांद पर ग्रहण नहीं, बल्कि एक बेहद ही अद्भुत नजारा देखने को मिलता है। जानिए इसके पीछे का साइंस।

Lunar Eclipse from Moon: कल्पना कीजिए आप किसी अंतरिक्ष यात्री की तरह चांद की सतह पर खड़े हैं और उसी समय पृथ्वी पर चंद्र ग्रहण दिखाई दे रहा है। धरती से हमें चांद धीरे-धीरे अंधेरा होते और फिर लाल-नारंगी रंग में बदलता नजर आता है। लेकिन चांद पर खड़े इंसान के लिए यही घटना बिल्कुल उलटी होगी। उसे चांद पर ग्रहण नहीं, बल्कि आसमान में पृथ्वी के सामने सूर्य के छिपने का नजारा दिखाई देगा। आखिर ऐसा क्यों होगा और उस समय धरती कैसी दिखेगी?

चंद्र ग्रहण का मतलब क्या है?

चंद्र ग्रहण तब होता है जब सूर्य, पृथ्वी और चांद लगभग एक सीध में आ जाते हैं और पृथ्वी सूर्य और चांद के बीच होती है। ऐसे में पृथ्वी की छाया चांद की सतह पर पड़ती है। NASA के मुताबिक, पूर्ण चंद्र ग्रहण में चांद पृथ्वी की गहरी छाया यानी अम्ब्रा (Umbra) में पूरी तरह प्रवेश कर जाता है। यानी धरती से देखने पर हमें लगता है चांद पर कोई अंधेरा छा रहा है। लेकिन अब नजरिया बदल दीजिए और खुद को चांद पर खड़ा मान लीजिए।

चांद से दिखेगा सूर्य का 'ग्रहण'

चांद की सतह से उस समय पृथ्वी आपके सामने होगी और उसके पीछे सूर्य मौजूद होगा। धीरे-धीरे पृथ्वी सूर्य के चमकते हुए डिस्क को ढकती हुई दिखाई देगी। यह असल में उसी ज्यामिति का दूसरा पहलू है। धरती से इसे चंद्र ग्रहण (Lunar Eclipse) कहते हैं, जबकि चांद से देखने वाले के लिए यह घटना एक तरह का सूर्य ग्रहण (Solar Eclipse) होगी, क्योंकि वहां से पृथ्वी सूर्य के सामने आकर उसकी रोशनी रोक रही होगी। NASA भी बताता है कि जब कोई पिंड सूर्य और देखने वाले के बीच आकर सूर्य को ढकता है, तो वह सूर्य ग्रहण का सीन बनाता है।

धरती कैसी नजर आएगी?

अब आता है सबसे खूबसूरत हिस्सा। चांद से देखने पर पृथ्वी एक बड़ी, चमकीली गोलाकार डिस्क जैसी दिखाई देगी। लेकिन वह पूरी तरह काली नहीं होगी। पृथ्वी के चारों ओर मौजूद वायुमंडल की पतली चमकदार परत सूर्य के प्रकाश को मोड़ते और बिखेरते हुए दिखाई देती है। इस दौरान पृथ्वी के किनारे पर लाल-नारंगी रंग की हल्की चमक का प्रभाव भी दिखाई देता है। यही वायुमंडल चांद के लाल होने की वजह भी है। पूर्ण चंद्र ग्रहण के दौरान सूर्य की कुछ रोशनी पृथ्वी के वायुमंडल से होकर गुजरती है। वायुमंडल नीली रोशनी को ज्यादा बिखेर देता है और लाल-नारंगी प्रकाश चांद तक पहुंच सकता है। NASA इसे दुनिया भर के सूर्योदय और सूर्यास्तों की रोशनी जैसा प्रभाव बताता है।

क्या पृथ्वी पूरी तरह काली दिखेगी?

नहीं। अगर आप चांद के उस हिस्से पर खड़े हैं जहां से पृथ्वी दिखाई दे रही है, तो पृथ्वी के सामने सूर्य की डिस्क छिपी हुई नजर आएगी। लेकिन पृथ्वी के किनारों पर वायुमंडल की चमक दिखाई दे सकती है। साथ ही पृथ्वी की सतह पर मौजूद शहरों की रोशनी भी दिखाई देने की संभावना है। यानी सामने एक अंधेरी-सी पृथ्वी, उसके किनारों पर हल्की लाल-नारंगी चमक और कहीं-कहीं रात वाले हिस्से में रोशनी के छोटे-छोटे बिंदु-यह नजारा किसी फिल्मी सीन की तरह होगा।

क्या चांद पर भी अंधेरा छा जाएगा?

हां, और यही इस सीन को और रोमांचक बनाता है। चंद्र ग्रहण के दौरान चांद का वह हिस्सा पृथ्वी की छाया में होता है, इसलिए वहां सीधे सूर्य का प्रकाश नहीं पहुंचता। NASA के अनुसार- पृथ्वी की छाया चांद की सतह पर फैलती है और पूर्ण ग्रहण के दौरान पूरी चंद्र सतह गहरी छाया में आ जाती है। कल्पना कीजिए आप चांद पर खड़े हैं, आपके चारों ओर काली अंतरिक्ष-खामोशी है और ऊपर सूर्य के सामने धीरे-धीरे आती हुई विशाल पृथ्वी दिखाई दे रही है।

एक ही घटना, दो बिल्कुल अलग नजारे

धरती से देखने पर चांद पर पृथ्वी की छाया और चांद से देखने पर पृथ्वी के सामने सूर्य का छिपना दिखाई देगा। मतलब चंद्र ग्रहण सिर्फ चांद के बदलते रंग का नाम नहीं है। यह अंतरिक्ष में सूर्य, पृथ्वी और चांद की अद्भुत ज्यामिति का परिणाम है। और अगर कभी इंसान चांद की सतह पर खड़े होकर पूर्ण चंद्र ग्रहण देख सके, तो शायद वह उस घटना को धरती से देखे गए किसी भी चंद्र ग्रहण से कहीं ज्यादा अद्भुत महसूस करेगा।