उज्जैन. शश योग में व्यक्ति को शनि की शुभता भी प्राप्त होती है और जीवन में शनि से संबंधित कार्यों में सफलता भी मिलती है।

जानिए कैसे बनता है शश योग?

कुण्डली में जब शनि स्वराशि (मकर, कुम्भ) में हो, अथवा शनि अपनी उच्च राशि तुला में होकर, कुण्डली के केन्द्र भावों में स्थित हो, उस समय यह योग बनता है। एक अन्य मत के अनुसार इस योग को चन्द्र से केन्द्र में भी देखा जाता है। चंद्र कुण्डली बनाने पर अगर शनि केन्द्र स्थानों पर स्थित हो तो इस योग का निर्माण होगा।

शश योग के फायदे…
 

1. शनि की साढे़साती और ढय्या के दुष्प्रभाव कम होते हैं। शनि के प्रभाव से व्यक्ति अपने कार्यक्षेत्र में मेहनती बनता है।
2. थोड़े से परिश्रम द्वारा वह भरपूर सफलता पाता है। शश योग के प्रभाव से व्यक्ति को रोग इत्यादि में स्वास्थ्य लाभ जल्दी मिलता है।
3. व्यक्ति के स्वभाव में व्यवहारिकता दिखाई देती है। ऐसा व्यक्ति खामोश और गंभीर रह कर काम करने वाला होता है।
4. शश योग में जन्मा व्यक्ति कानूनी दावपेचों का जानकार होने के कारण एक अच्छा वकील बन सकता है। राजनीति के क्षेत्र में ऊंचाइयां पाता है।
5. शश योग वाले लोगों को जमीन से जुड़े कामों में भी सफलता मिल सकती है। सरकारी क्षेत्र में कमाई और लाभ मिलता है.
6. ऐसा व्यक्ति किसी गुरु की भूमिका में या फिर सलाहकार एवं कथाकार भी बन सकता है। आर्थिक क्षेत्र में बेहतर धन-संपदा भी पाता है।

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