कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने केंद्र सरकार को चेतावनी दी है कि अगर छात्र आंदोलन के दौरान दर्ज FIR वापस लेने का वादा पूरा नहीं किया गया, तो फिर से एक बड़ा आंदोलन किया जाएगा। CJP ने FIR पर सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेश को मानने से इनकार कर दिया है।

नई दिल्ली: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके और दूसरे नेताओं ने केंद्र सरकार को कड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने कहा है कि अगर देश भर में हुए छात्र आंदोलनों के दौरान दर्ज की गई FIR वापस लेने का वादा तय समय में पूरा नहीं किया गया, तो फिर से एक बड़ा आंदोलन छेड़ा जाएगा। CJP ने मंगलवार को आरोप लगाया कि सुप्रीम कोर्ट का अंतरिम आदेश सरकार के उस वादे के खिलाफ है, जो आंदोलन वापस लेने के दौरान किया गया था। कोर्ट ने अपने आदेश में अधिकारियों को FIR पर जांच जारी रखने की इजाजत दी है।

CJP के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने कहा, "सरकार के साथ बातचीत में हमारी साफ समझ यही थी कि प्रदर्शनकारियों पर लगी FIR वापस ली जाएंगी। हम उम्मीद करते हैं कि सरकार अपने वादे का सम्मान करेगी।" एक इंटरव्यू में सौरव दास ने कहा, "सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि पहले से दर्ज FIR वापस नहीं होंगी। लेकिन सरकार के साथ हमारी बातचीत में यह मुद्दा था ही नहीं।"

उन्होंने साफ किया, "सरकार के साथ हमारा समझौता अलग था। हम उम्मीद करते हैं कि वे अपने वादे पूरे करेंगे। सुप्रीम कोर्ट ने जो शर्तें लगाई हैं, वे हमें मंजूर नहीं हैं।" दास ने जोर देकर कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश को CJP की मांगों के "अलावा" (in addition) देखा जाना चाहिए, न कि अंतिम फैसले के तौर पर। सरकार को प्रदर्शनकारियों से की गई अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा करना ही होगा।

सौरव दास ने समाचार एजेंसी ANI को बताया, "अगर सुप्रीम कोर्ट युवाओं के हित में काम करता है, तो हम ऐसे आदेशों या फैसलों का स्वागत करते हैं। दूसरी तरफ, हम लंबे समय से जमीनी स्तर पर सक्रिय हैं और हमारी कुछ मुख्य मांगें पूरी होनी ही चाहिए; यह हमारे लिए सबसे जरूरी है।"

उन्होंने कहा कि हमारी मुख्य मांगों में से एक यह है कि प्रदर्शनकारियों पर लगी सभी FIR रद्द की जाएं और भविष्य में उनके खिलाफ किसी भी तरह की बदले की कार्रवाई न करने का वादा किया जाए।

दास ने बताया, "हमें उम्मीद थी कि मंगलवार तक सरकार से लिखित आश्वासन मिल जाएगा और सभी गिरफ्तार प्रदर्शनकारी रिहा हो जाएंगे। हमने सोमवार को ही प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रशासन को बता दिया था कि अगर सरकार अपनी बात से मुकरती है, तो हमारे लिए दिल्ली में फिर से एक बड़े विरोध प्रदर्शन का ऐलान करना मजबूरी होगी।"

सुप्रीम कोर्ट का अंतरिम आदेश क्या है?

सुप्रीम कोर्ट ने अपने अंतरिम आदेश में कहा है कि CJP विरोध प्रदर्शन से जुड़े मामलों में उन छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कोई जबरन कार्रवाई (Coercive action) नहीं की जानी चाहिए, जिनका कोई पिछला आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है।

बेंच ने गिरफ्तार किए गए योग्य छात्रों को तुरंत रिहा करने का आदेश दिया और अधिकारियों को CCTV फुटेज और अन्य इलेक्ट्रॉनिक सबूतों को सुरक्षित रखने का निर्देश दिया। साथ ही, कोर्ट ने प्रदर्शनकारियों और पुलिस कर्मियों दोनों को लगी चोटों पर निष्पक्ष जांच करने को कहा है। हालांकि, कोर्ट ने मौजूदा FIR को वापस लेने का आदेश नहीं दिया और जांच जारी रखने की इजाजत दे दी।

CJP ने कोर्ट के आदेश पर उठाए सवाल

सौरव दास ने एक बयान में कहा कि सुप्रीम कोर्ट का आदेश 25 जुलाई को सरकार द्वारा दिए गए उस आश्वासन के खिलाफ है, जिसमें शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल लोगों के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई नहीं करने और FIR वापस लेने का वादा किया गया था।

दास ने आरोप लगाया कि बीजेपी शासित राज्य कोर्ट के आदेश को बहाना बनाकर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई जारी रख सकते हैं। उन्होंने इस बात की निंदा की कि केंद्र सरकार ने अंतरिम आदेश आने से पहले CJP के साथ हुए समझौते के बारे में कोर्ट को नहीं बताया।

दास ने मांग की, "कोर्ट ने सरकारों को FIR जारी रखने का निर्देश नहीं दिया है। इसलिए FIR वापस लेने का अधिकार आज भी कार्यपालिका (सरकार) के पास है। इसलिए, केंद्र और बीजेपी/एनडीए शासित राज्य सरकारों को CJP को दिए गए वादे का ब्योरा सुप्रीम कोर्ट के सामने रखना चाहिए, ताकि कोर्ट उस पर विचार कर सके।" उन्होंने चेतावनी दी, "केंद्र सरकार को अपने वादे पूरे करने के लिए दी गई समय सीमा आज (मंगलवार) खत्म हो रही है।"

रंका ने दी फिर से धरने की चेतावनी

CJP के प्रवक्ता आशुतोष रंका ने केंद्र सरकार, खासकर केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा और जितेंद्र सिंह से यह सुनिश्चित करने की मांग की है कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कोई चार्जशीट (Chargesheet) दायर न हो।

'एक्स' (X) पर लिखते हुए रंका ने मांग की कि सभी FIR तुरंत वापस ली जाएं, गिरफ्तार छात्रों को रिहा किया जाए और यह वादा किया जाए कि दिल्ली पुलिस, केंद्रीय जांच एजेंसियां या बीजेपी-सहयोगी दलों के शासन वाले राज्यों की पुलिस भविष्य में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कोई मामला दर्ज नहीं करेगी। उन्होंने लिखा, "नहीं तो हम फिर से धरने पर बैठने के लिए मजबूर हो जाएंगे।"

राज्यसभा सांसद और वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल के साथ एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में रंका ने कहा कि CJP को उम्मीद है कि सरकार मंगलवार को किए गए वादों का लिखित समझौता साझा करेगी। उन्होंने कहा कि अगर समझौते की कॉपी नहीं मिलती है और गिरफ्तार छात्रों को रिहा नहीं किया जाता है, तो विरोध प्रदर्शन फिर से शुरू करने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचेगा।

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बिहार, असम, राजस्थान से मिला आश्वासन

CJP ने बताया है कि प्रदर्शनकारियों पर से मामले वापस लेने के संबंध में बिहार और असम सरकारों से नोटिफिकेशन मिल गए हैं। सौरव दास ने यह भी जानकारी दी कि राजस्थान में भी प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं करने का आश्वासन मिला है।