दिल्ली के सत्य निकेतन में 7 मौतों वाले पीजी हादसे के बाद MCD के सर्वे में दिल्ली की 62 इमारतें खतरनाक पाई गई हैं। जानिए 42 जर्जर इमारतों पर कार्रवाई में देरी, MCD अफसरों के निलंबन और मालिक की गिरफ्तारी से जुड़ा पूरा अपडेट।
Delhi MCD Survey Report: साउथ दिल्ली के सत्य निकेतन में जब लड़कों का 5 मंजिला पीजी गिरा और उसमें दबकर 7 बेकसूरों की जान चली गई, तब जाकर दिल्ली नगर निगम (MCD) के फाइलों की धूल झाड़ी गई। 7 सितंबर को निगम के अलग-अलग विभागों के बीच एक सर्वे रिपोर्ट दोबारा घुमाई गई। इस सर्वे में सामने आया कि दिल्ली में 62 इमारतें ऐसी हैं, जो कभी भी गिर सकती हैं या हादसों को दावत दे रही हैं। हैरानी की बात यह है कि रिपोर्ट बनने के बावजूद MCD अब तक सिर्फ 20 इमारतों पर ही एक्शन ले पाया है—जिनमें से 16 को तोड़ा गया और 4 को सील किया गया। बाकी बची 42 खतरनाक इमारतों पर बुलडोजर चलना या सीलिंग होना अभी बाकी है। जब सत्य निकेतन में 27 घंटे तक चले रेस्क्यू के बाद 7 लाशें निकलीं, तब जाकर प्रशासन को याद आया कि 42 इमारतों पर एक्शन लेना तो बेहद जरूरी था।
30 लाख से ज्यादा घरों की जांच का दावा, पर 42 जर्जर इमारतों पर कार्रवाई का इंतजार क्यों?
MCD हर साल मानसून से पहले इमारतों की हालत जांचने का ढोंग... माफ कीजिए, सर्वे करता है। इस साल निगम ने पूरी दिल्ली में 32.55 लाख घरों को चेक करने का टारगेट रखा था। कागजों पर 30.74 लाख यानी लगभग 97% घरों की जांच पूरी भी हो गई। इस दौरान 377 मकान ऐसे मिले जिनमें मरम्मत की सख्त जरूरत थी। निगम का कहना है कि इनमें से 27 मकान ठीक करा दिए गए हैं और बाकी पर 'नजर रखी जा रही है'। लेकिन सवाल वही है कि जो 62 इमारतें सीधे तौर पर 'खतरनाक' कैटेगरी में रखी गईं-जिनमें 50 मेंटेनेंस और 12 सीधी बिल्डिंग कैटेगरी की हैं-उनमें से 42 को गिराने या सील करने में इतनी ढिलाई क्यों बरती गई?
सत्य निकेतन हादसा: 1970 की जर्जर इमारत, 55 गज का प्लॉट और तान दी 5 मंजिल!
रविवार दोपहर करीब 1:30 बजे जब सत्य निकेतन की वह इमारत ढही, उस वक्त बेसमेंट में काम चल रहा था। 5 लोगों को अस्पताल पहुंचाया गया और 7 की मौत हो गई। MCD के रिकॉर्ड कहते हैं कि 55 वर्ग गज के रीसेटलमेंट प्लॉट पर बनी यह इमारत 1990 के दशक की थी। हालांकि, आस-पास रहने वाले पुराने लोगों का साफ कहना है कि यह मकान 1970 के दशक का यानी करीब 50 साल पुराना था।
रीसेटलमेंट कॉलोनियों के नियम के मुताबिक यहाँ सिर्फ ग्राउंड और पहली मंजिल (G+1) बनाने की छूट होती है। लेकिन नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए 50 साल पुरानी नींव पर बेसमेंट, ग्राउंड और 4 ऊपरी मंजिलें (G+4) खड़ी कर दी गईं। न तो इसका कोई नक्शा पास था और न ही MCD के पास कागजों में इसके खिलाफ कोई शिकायत दर्ज थी। बेसमेंट में पानी जमा होना और मरम्मत का लापरवाही से चला काम ही इस दर्दनाक हादसे की वजह बना।
मालिक राजस्थान से गिरफ्तार, MCD के डिप्टी कमिश्नर समेत 5 अफसर सस्पेंड
हादसा होने के बाद जब बवाल बढ़ा, तो पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी मकान मालिक को राजस्थान के भिवाड़ी से दबोच लिया। वहीं, दिल्ली सरकार और निगम ने लीपापोती करने वाले अधिकारियों पर गाज गिराई। साउथ जोन के डिप्टी कमिश्नर राकेश कुमार के साथ-साथ चार इंजीनियरों को तुरंत प्रभाव से सस्पेंड कर दिया गया। लेकिन यह कार्रवाई उन परिवारों का क्या दुख कम करेगी, जिन्होंने अपने जवान बेटों को पढ़ाई के लिए दिल्ली भेजा था और बदले में उन्हें ताबूत मिले?
सैदुलजाब से लेकर करावल नगर तक: दिल्ली में आखिर कब रुकेंगी जर्जर इमारतों से मौतें?
सत्य निकेतन की घटना कोई पहली बार नहीं हुई है। इस साल दिल्ली में ढहती इमारतों और आगजनी ने कई मासूमों को निगल लिया है:
- 30 मई: सैदुलजाब में इमारत ढहने से 6 लोगों की मौत हुई।
- 3 जून: हौज़ रानी के एक बीएंडबी (B&B) में आग लगने से 23 लोगों की जान चली गई, जिनमें 11 विदेशी नागरिक शामिल थे।
- जून का महीना: मलका गंज के सब्जी मंडी इलाके में एक मकान जमींदोज हो गया।
- जून के आखिर में: करावल नगर में 4 मंजिला इमारत ताश के पत्तों की तरह ढह गई।
42 इमारतों पर अब कार्रवाई का इंतजार
MCD के सर्वे ने एक अहम सवाल फिर सामने ला दिया है-जिन इमारतों को खतरनाक घोषित कर दिया गया है, उनके खिलाफ कार्रवाई कितनी जल्दी होती है? 62 चिन्हित इमारतों में से 20 पर कार्रवाई हो चुकी है। लेकिन 42 इमारतों को अभी गिराया या सील किया जाना बाकी है। सत्य निकेतन हादसे के बाद 7 सितंबर को रिपोर्ट का संबंधित विभागों के बीच दोबारा प्रसारित होना बताता है कि असुरक्षित इमारतों पर कार्रवाई तेज करने का दबाव बढ़ा है। अब निगाह इस बात पर है कि बाकी 42 इमारतों के मामले में MCD कितनी तेजी से कदम उठाता है।


