कैलाश मानसरोवर यात्रा के दौरान नेपाल-तिब्बत बॉर्डर पर भीषण फ्लैश फ्लड आई। इस हादसे में अब तक 332 मौतें हो चुकी हैं, जबकि 288 भारतीय लापता हैं। इनमें 80 तीर्थयात्री वो हैं, जो कैलाश मानसरोवर की यात्रा पर निकले थे।
भारतीय नागरिकों और NRI के एक ग्रुप ने कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए बेहद सावधानी से पूरा प्लान तैयार किया था। लेकिन बुधवार 26 अगस्त की सुबह नेपाल के रसुवा जिले में अचानक आई बाढ़ ने इस यात्रा को दुखद मोड़ दे दिया। रिश्तेदारों से मिली जानकारी के अनुसार, इस ग्रुप ने मंगलवार रात नेपाल-चीन बॉर्डर के पास स्थित एक महत्वपूर्ण ट्रांजिट पॉइंट रसुवागढ़ी में बिताई थी। योजना के मुताबिक, बुधवार को उन्हें बॉर्डर पार करके तिब्बत में प्रवेश करना था, लेकिन एक सुबह ने पलभर में सबकुछ बदल दिया।
डे-टू-डे बेसिस पर बना था यात्रा का पूरा प्लान
- कैलाश मानसरोवर यात्रा का कार्यक्रम डे-टू-डे बेसिस पर तैयार किया गया था। इसका उद्देश्य यात्रियों को धीरे-धीरे अधिक ऊंचाई वाले इलाकों तक ले जाना था, ताकि उनका शरीर वहां के वातावरण और ऊंचाई के अनुकूल हो सके।
- ग्रुप को सबसे पहले काठमांडू से नेपाल-चीन बॉर्डर की ओर जाना था। करीब 1,800 मीटर की ऊंचाई पर स्थित रसुवागढ़ी में रात बिताने के बाद यात्रियों को बॉर्डर पार करके तिब्बत में प्रवेश करना था।
- इसके बाद केरुंग में एक दिन रुकने की योजना थी। वहां कुछ समय बिताने के बाद यात्रियों को सागा और फिर मानसरोवर झील की ओर बढ़ना था।
- यात्रा के कार्यक्रम में कैलाश पर्वत की पारंपरिक परिक्रमा भी शामिल थी। इस परिक्रमा में बेहद कठिन डोलमा-ला दर्रे से गुजरना भी शामिल होता है।
26 अगस्त की सुबह रसुवागढ़ी-तिमुरे में आई तबाही
- हालांकि, 26 अगस्त की सुबह जब ग्रुप तिब्बत में प्रवेश करने की तैयारी कर रहा था, तभी रसुवागढ़ी-तिमुरे इलाके में अचानक विनाशकारी बाढ़ और मलबे का तेज बहाव आ गया। इस आपदा में पानी, कीचड़ और बड़ी-बड़ी चट्टानों का तेज बहाव बॉर्डर इलाके में फैल गया। इसके कारण सड़कें, पुल, गाड़ियां और कई बस्तियां बुरी तरह नष्ट हो गईं।
- शुरुआती रिपोर्टों में आशंका जताई गई थी कि यह आपदा भूकंप के कारण आई हो सकती है। हालांकि, बाद में US जियोलॉजिकल सर्वे ने बताया कि दर्ज किए गए भूकंपीय संकेत ग्लेशियर के ढहने और उसके बाद हुए मलबे के बहाव से पैदा हुए थे।
तीर्थयात्रा का रास्ता बना आपदा क्षेत्र
- जिस रास्ते को ऊंचाई के अनुकूल होने, बॉर्डर की औपचारिकताओं और आराम के लिए जरूरी दिनों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया था, वह अचानक एक बड़े आपदा क्षेत्र में बदल गया।
- बाढ़ के बाद सैकड़ों लोग लापता बताए गए हैं। इनमें भारतीय नागरिकों के साथ-साथ कैलाश मानसरोवर की यात्रा पर गए दूसरे देशों के विदेशी पर्यटक भी शामिल हैं।
- नेपाल के अधिकारी बेहद मुश्किल परिस्थितियों में खोज और बचाव अभियान चला रहे हैं। खराब हो चुकी सड़कें, नदियों में बढ़ा जलस्तर और कई इलाकों में जमा भारी गाद यानी मिट्टी-कीचड़ राहत और बचाव दलों के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है।
- इन हालात में प्रभावित इलाकों तक पहुंचना और लापता लोगों की तलाश करना काफी मुश्किल हो गया है।
कैलाश पर्वत और मानसरोवर का धार्मिक महत्व
- माउंट कैलाश दक्षिण-पश्चिमी तिब्बत में स्थित हिमालय की एक प्रमुख चोटी है। यह नेपाल और भारत के साथ चीन की सीमा के पास स्थित है। इसकी ऊंचाई 6,400 मीटर यानी करीब 21,000 फीट से ज्यादा है।
- माउंट कैलाश मानसरोवर झील के पास स्थित है। कैलाश और मानसरोवर दोनों का संस्कृत धार्मिक परंपराओं में गहरा धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व है।
- हिंदू धर्म में कैलाश पर्वत को भगवान शिव और माता पार्वती का निवास स्थान माना जाता है। वहीं, 'बोन' परंपरा के अनुयायी इसे आध्यात्मिक शक्ति का केंद्र मानते हैं, जिसका संबंध उनके धर्म के संस्थापक टोनपा शेनराब से बताया जाता है।
- भूगोलवेत्ता एमिली येह ने लिखा है कि कैलाश का संबंध माउंट मेरु से भी माना जाता है। हिंदू और बौद्ध ब्रह्मांड विज्ञान में माउंट मेरु को दुनिया का पौराणिक केंद्र माना गया है।
- इस तरह कैलाश मानसरोवर की यात्रा केवल एक धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि श्रद्धालुओं के लिए गहरे आध्यात्मिक महत्व वाली यात्रा भी है। ऐसे में नेपाल-तिब्बत बॉर्डर पर आई इस अचानक बाढ़ ने कई तीर्थयात्रियों और उनके परिवारों को गहरे संकट में डाल दिया है।
