Mohan Bhagwat News: RSS प्रमुख मोहन भागवत ने मुंबई में Gen Z और Gen Alpha छात्रों से संवाद के दौरान छात्र आंदोलन, शिक्षा व्यवस्था, समलैंगिक विवाह, LGBT समाज, पाकिस्तान और चीन समेत कई अहम मुद्दों पर अपनी राय रखी। जानिए उन्होंने क्या कहा।

नई पीढ़ी के सवाल, शिक्षा व्यवस्था में बदलाव और समाज से जुड़े मुद्दों पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत ने मुंबई में आयोजित एक संवाद कार्यक्रम में खुलकर अपनी राय रखी। Gen Z और Gen Alpha के छात्रों के साथ बातचीत के दौरान उन्होंने छात्र आंदोलनों से लेकर समलैंगिक विवाह, लोकतंत्र, शिक्षा व्यवस्था और भारत-पाकिस्तान संबंधों तक कई अहम विषयों पर अपने विचार साझा किए।

छात्र आंदोलन को बताया संवाद का माध्यम

मोहन भागवत ने कहा कि लोकतंत्र में आंदोलन भी संवाद का एक तरीका है। उनके अनुसार, जब लोगों की चिंताओं पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जाता, तब आंदोलन के जरिए अपनी बात सरकार तक पहुंचाई जा सकती है।

उन्होंने कहा कि Gen Z की कई शिकायतें उचित हैं और भारत की शिक्षा व्यवस्था में अभी भी सुधार की जरूरत है। भागवत ने जोर देकर कहा कि संवाद और बौद्धिक चर्चा लोकतांत्रिक व्यवस्था की मजबूती के लिए आवश्यक है। उन्होंने कहा कि भारतीय परंपरा में इसे 'शास्त्रार्थ' कहा जाता है और युवाओं के साथ ऐसे संवाद लगातार होने चाहिए।

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समलैंगिक विवाह पर क्या बोले मोहन भागवत?

समलैंगिक विवाह (Same-Sex Marriage) से जुड़े सवाल पर RSS प्रमुख ने कहा कि LGBT समाज का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि विवाह समाज की एक महत्वपूर्ण संस्था है और परिवार सामाजिक व्यवस्था की मूल इकाई माना जाता है।

भागवत ने कहा कि यदि मौजूदा सामाजिक व्यवस्था में बदलाव किया जाता है, तो उसके लिए समाज की स्वीकृति और उपयुक्त कानूनी ढांचा भी जरूरी होगा। उनके अनुसार, किसी भी नए सामाजिक ढांचे को लागू करते समय यह सुनिश्चित करना होगा कि समाज में अनावश्यक टकराव न हो और व्यवस्था सुचारु रूप से आगे बढ़े।

पाकिस्तान, चीन और नई पीढ़ी पर भी रखे विचार

कार्यक्रम के दौरान मोहन भागवत ने कहा कि आज की युवा पीढ़ी केवल निर्देश नहीं, बल्कि अपने सवालों के स्पष्ट जवाब चाहती है। उन्होंने कहा कि स्वस्थ संवाद से विश्वास बढ़ता है और यही लोकतंत्र की ताकत है।

भारत-पाकिस्तान संबंधों पर उन्होंने कहा कि किसी भी संकट की स्थिति में नागरिकों को सरकार के निर्देशों का पालन करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि टकराव के बाद संवाद जरूरी होता है और कोई भी हमेशा के लिए दुश्मन नहीं रहता। चीन का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि ऐतिहासिक रूप से भारत और चीन के बीच सांस्कृतिक संबंध रहे हैं।

मुंबई में छात्रों के साथ हुए इस संवाद में शिक्षा, लोकतंत्र, सामाजिक बदलाव और अंतरराष्ट्रीय संबंधों जैसे कई विषयों पर चर्चा हुई। मोहन भागवत के इन बयानों पर अब विभिन्न स्तरों पर राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रियाएं सामने आ सकती हैं।

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