
Mukti Bhawan: मौत के इंतजार की ऐसी कहानी, जो आपको अंदर तक झकझोर देगी!
क्या इंसान अपनी जिंदगी के आखिरी पल काशी में बिताकर मोक्ष प्राप्त कर सकता है? क्या मृत्यु का इंतजार करना भी जिंदगी का एक हिस्सा हो सकता है? फिल्म ‘मुक्ति भवन’ एक बेहद भावुक और दिल को छू लेने वाली कहानी है। इसकी कहानी दयानंद कुमार नाम के एक बुजुर्ग व्यक्ति की है, जिन्हें अचानक एहसास होता है कि उनकी जिंदगी का अंत करीब है। वह अपनी आखिरी सांस काशी में लेना चाहते हैं, इसलिए अपने बेटे राजीव के साथ वाराणसी के एक विशेष आश्रम पहुंच जाते हैं, जिसे मुक्ति भवन कहा जाता है। मुक्ति भवन में उन लोगों को रहने की जगह दी जाती है, जो अपनी मृत्यु का इंतजार करते हुए मोक्ष की उम्मीद लेकर काशी आते हैं। लेकिन पिता की इस इच्छा के कारण बेटे राजीव की जिंदगी भी बदलने लगती है। एक तरफ पिता की आखिरी इच्छा है, तो दूसरी तरफ परिवार, जिम्मेदारियां और अपनी जिंदगी की परेशानियां। यह फिल्म सिर्फ मृत्यु की कहानी नहीं है, बल्कि पिता-पुत्र के रिश्ते, जीवन के अर्थ, परिवार और इंसान की भावनाओं को बेहद खूबसूरती से दिखाती है।