ब्रिटेन के Cardiff Castle पर Pakistan Flag फहराने को लेकर ब्रिटेन में विवाद छिड़ गया। Reform UK ने विरोध किया तो Conservative ने नस्लीय विवाद भड़काने का आरोप लगाया।
Pakistan Flag in Cardiff Castle: ब्रिटेन में कार्डिफ कैसल के ऊपर पाकिस्तान का झंडा फहराए जाने की तस्वीर को लेकर राजनीतिक बहस छिड़ गई है। रिफॉर्म UK पार्टी के नेताओं ने किले पर पाकिस्तान का झंडा फहराने को लेकर कार्डिफ काउंसिल की आलोचना की है। पार्टी का कहना है कि इस तरह झंडा फहराना हमारी संस्कृति पर हावी होने की कोशिश है। रिफॉर्म वेल्श के प्रवक्ता रॉबर्ट जेनेरिक का कहना है कि ऐतिहासिक स्थलों पर वेल्श ड्रैगन या यूनियन फ्लैग के अलावा कोई दूसरा झंडा नहीं फहराया जाना चाहिए। हालांकि, कंजर्वेटिव पार्टी ने रिफॉर्म UK पर इस मुद्दे के जरिए नस्लीय विवाद खड़ा करने की कोशिश करने का आरोप लगाया है।
कैसे शुरू हुआ विवाद?
- पाकिस्तानी झंडे को लेकर यह विवाद 5 सितंबर को रिस्टोर पार्टी के काउंसलर ओवेन क्लैवर्टी की एक सोशल मीडिया पोस्ट के बाद शुरू हुआ।
- उन्होंने कार्डिफ कैसल के ऊपर पाकिस्तान के झंडे लहराते हुए एक तस्वीर शेयर की थी।
- इसके बाद रिस्टोर पार्टी के नेता रूपर्ट लोव और रिफॉर्म UK के वेल्श नेता डैन थॉमस ने भी इस तस्वीर को शेयर किया। डैन थॉमस न्यूपोर्ट से सेनेड (वेल्श संसद) के सदस्य हैं।
- कार्डिफ कैसल पर पाकिस्तान के झंडे वाली जिस तस्वीर को सोशल मीडिया पर शेयर किया गया था, वह 14 अगस्त 2024 की बताई गई है।
- स्थानीय अधिकारियों के मुताबिक, इस साल भी पाकिस्तान के स्वतंत्रता दिवस के मौके पर कार्डिफ कैसल पर 2 दिन के लिए पाकिस्तान का झंडा फहराया गया था।
रिफॉर्म UK ने संस्कृति पर हावी होने का लगाया आरोप
- रिफॉर्म पार्टी के आर्थिक मामलों के प्रवक्ता रॉबर्ट जेनेरिक ने फेसबुक पोस्ट में कहा कि पाकिस्तान का झंडा फहराना हमारी संस्कृति पर हावी होने की कोशिश है।
- जेनेरिक के अकाउंट पर कार्डिफ कैसल में आयोजित एक कार्यक्रम का वीडियो भी रीपोस्ट किया गया। इस वीडियो में सेनेड के कुछ सदस्य दिखाई दे रहे हैं और पाकिस्तान का झंडा फहराया जा रहा है।
- रॉबर्ट जेनेरिक ने कहा कि ब्रिटेन के ऐतिहासिक स्थलों पर स्थानीय पहचान और संस्कृति को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उन्होंने वेल्श ड्रैगन और यूनियन फ्लैग का जिक्र करते हुए दूसरे देशों के झंडे फहराने पर सवाल उठाया।
कंजर्वेटिव पार्टी ने आरोपों को बताया नस्लीय विवाद की कोशिश
- वेल्श कंजर्वेटिव पार्टी की पाकिस्तानी मूल की सेनेट सदस्य नताशा असगर ने रिफॉर्म UK के आरोपों को खारिज कर दिया। उन्होंने पार्टी पर इस मुद्दे के जरिए नस्लीय विवाद शुरू करने की कोशिश करने का आरोप लगाया।
- नताशा असगर ने कहा कि इस तरह के समारोह किसी जगह पर कब्जा करने का तरीका नहीं हैं, बल्कि अलग-अलग समुदायों का सम्मान करने का एक तरीका हैं।
- उन्होंने बताया कि वह भारतीय, पाकिस्तानी और पोलिश समुदायों के लिए आयोजित कई झंडा फहराने वाले समारोहों में शामिल हो चुकी हैं।
- उनके मुताबिक, ये सभी शानदार कार्यक्रम रहे हैं, जिनमें अलग-अलग पॉलिटिकल बैकग्राउंड के लोग बड़ी संख्या में शामिल हुए हैं।
नताशा असगर का भारत-पाकिस्तान से जुड़ा पारिवारिक कनेक्शन
नताशा असगर के पिता मोहम्मद असगर का जन्म बंटवारे से पहले के भारत में हुआ था और उनका पालन-पोषण पाकिस्तान में हुआ था। नताशा ने इसी संदर्भ में अलग-अलग समुदायों के सांस्कृतिक समारोहों में शामिल होने और उन्हें सम्मान देने की बात कही। कार्डिफ कैसल पर पाकिस्तान का झंडा फहराने को लेकर शुरू हुआ यह विवाद अब ब्रिटेन में संस्कृति, पहचान और अलग-अलग समुदायों के सम्मान को लेकर राजनीतिक बहस का मुद्दा बन चुका है।
कार्डिफ कैसल पर क्यों फहराया गया पाकिस्तानी झंडा?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, कार्डिफ कैसल पर पाकिस्तानी झंडा इसलिए फहराया गया, क्योंकि काउंसिल अलग-अलग महत्वपूर्ण राष्ट्रीय और सांस्कृतिक अवसरों को मनाने के लिए किले जैसे प्रमुख सार्वजनिक स्थलों पर संबंधित देशों के झंडे फहराती है। हालिया मामले में कार्डिफ काउंसिल ने इसे कार्डिफ के बहुसांस्कृतिक समाज में पाकिस्तानी समुदाय के योगदान को सम्मान देने का हिस्सा बताया। यह कोई नई परंपरा नहीं है। कार्डिफ कैसल पर पहले भी पाकिस्तान और भारत के स्वतंत्रता दिवस के मौके पर झंडे फहराए जाते रहे हैं। 2026 में 15 अगस्त को भारत के 80वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर भी कार्डिफ कैसल में भारतीय तिरंगा फहराने का समारोह हुआ था।
फिर विवाद क्यों हुआ?
- विवाद इसलिए शुरू हुआ क्योंकि Reform UK के नेताओं ने विदेशी झंडे को ब्रिटेन के ऐतिहासिक स्थल पर फहराने पर सवाल उठाया।
- रॉबर्ट जेनेरिक ने इसे ब्रिटिश संस्कृति पर हावी होने की कोशिश बताया और कहा कि ऐतिहासिक स्थलों पर वेल्श ड्रैगन या यूनियन फ्लैग के अलावा दूसरे झंडे नहीं होने चाहिए।
- इसके जवाब में वेल्श कंजर्वेटिव नेता नताशा असगर और अन्य नेताओं ने कहा कि ऐसे कार्यक्रम किसी समुदाय के कब्जे का प्रतीक नहीं, बल्कि सम्मान, सांस्कृतिक पहचान और समुदायों के योगदान को मान्यता देने का तरीका हैं। कार्डिफ काउंसिल ने यह भी कहा कि उस समय वेल्स और यूनाइटेड किंगडम के झंडे भी वहां मौजूद थे।


