Sagar Liquor Tragedy : मध्य प्रदेश के सागर में बंडा और शाहगढ़ में मातम पसरा हुआ है। जहां ज़हरीली शराब से 28 लोगों की जान जा चुकी है। वहीं कई अस्पताल में भर्ती हैं। लेकिन इस जहर के बीच एक दवा अमृत का काम कर रही है। जो कई लोगों की जिंदगी बचा चुकी है।

सागर (मध्य प्रदेश): मध्य प्रदेश के सागर ज़िले में ज़हरीली शराब पीने से 28 लोगों की मौत हो चुकी है। हालांकि सरकारी आंकड़े के मुताबिक, 15 जानें गई हैं। वहीं कई लोग अभी तक अस्पताल में भर्ती हैं। वहीं जिला प्रशासन प्रभावित गांवों में मरीज़ों पर नज़र रख रहा है और स्क्रीनिंग व जागरूकता अभियान चला रहा है। इसी बीच एक दवा कई मरीज़ों के लिए संजीवनी साबित हुई है, जो लोगों को मौत के मुंह से जिंदा लौटा रही है।

कहीं पति की तो कहीं पिता की मौत

दरअसल, सागर जिले के बंडा और शाहगढ़ विकासखंड के गांवों में जहरीली शराब ने मातम पसार दिया है। किसी के पिता की मौत हो गई तो किसी के पति ने जान गंवा दी। कहीं तो यह हुआ है कि बाप-बेटे दोनों की मौत हो चुकी है। वहीं की लोगों की आंखों की रोशनी जा चुकी है। वहीं प्रशासन ने प्रभावित इलाक़ों में निगरानी भी बढ़ा दी है। साथ ही लोगों से अपील की है कि अगर किसी ने ऐसी कोई संदिग्ध शराब पी है और उनमें लक्षण दिख रहे हैं, तो वे तुरंत मेडिकल मदद लें।

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जहर के बीच अमृत बनी यह दवा बचा चुकी कई जिंदगियां

बता दें कि लाशों के ढेर और मातम के बीच फोमेपिज़ोल (fomepizole) नाम की एक दवा कई मरीज़ों के लिए संजीवनी साबित हो रही है। यह ज़हरीली शराब के ज़हर का तोड़ (antidote) है। अधिकारियों के मुताबिक, इस दवा से अब तक 30 से ज़्यादा लोगों की जान बचाई जा चुकी है। फोमेपिज़ोल का इस्तेमाल मेथनॉल जैसे ज़हरीले अल्कोहल से हुई पॉइज़निंग के मामलों में किया जाता है। इसके इस्तेमाल से शरीर में ज़हरीले केमिकल बनने से रोकने में मदद मिलती है और यह मेथनॉल पॉइज़निंग के शक में इलाज का एक अहम हिस्सा है।

पुलिस ने 16 आरोपियों को किया गिरफ्तार

वहीं इस मामले में सागर के सुपरिटेंडेंट ऑफ़ पुलिस (SP) अनुराग सुजानिया ने बताया कि मामले में नामज़द 30 आरोपियों में से 16 को अब तक गिरफ़्तार कर जेल भेज दिया गया है। बाक़ी आरोपियों को पकड़ने की कोशिशें जारी हैं। वहीं इस घटना के बाद इलाक़े में अवैध शराब सप्लाई के नेटवर्क की बड़े पैमाने पर जांच शुरू हो गई है। पुलिस उस सोर्स और डिस्ट्रिब्यूशन चेन का पता लगा रही है, जिससे पीड़ितों तक यह शराब पहुंची। इससे पहले, अधिकारियों ने कहा था कि इस ज़हरीली शराब का कनेक्शन मध्य प्रदेश-उत्तर प्रदेश बॉर्डर पर चल रहे एक बड़े अवैध शराब नेटवर्क से हो सकता है।