दिल्ली सरकार ने अपने सभी विभागों में नागरिकों के डेटा को सुरक्षित रखने के लिए एक अहम कदम उठाया है। बुधवार को IT विभाग ने डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन (DPDP) एक्ट पर एक वर्कशॉप रखी, जिसमें अधिकारियों को डेटा की सुरक्षा के गुर सिखाए गए।

नई दिल्ली। दिल्ली सरकार के सूचना प्रौद्योगिकी (IT) विभाग ने बुधवार को एक खास वर्कशॉप आयोजित की। इसका मकसद था- डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन (DPDP) एक्ट, 2023 के बारे में अधिकारियों को समझाना, ताकि सरकारी विभागों में डेटा प्राइवेसी और सुरक्षा को और मज़बूत किया जा सके। यह वर्कशॉप MeitY के नेशनल ई-गवर्नेंस डिवीजन (NeGD) के साथ मिलकर की गई। इसमें दिल्ली सरकार के अलग-अलग विभागों के सीनियर IT अधिकारी, नोडल ऑफिसर और प्रतिनिधि शामिल हुए।

वर्कशॉप की अध्यक्षता IT मंत्री पंकज कुमार सिंह ने की। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि जब नागरिक राशन कार्ड, जाति प्रमाण पत्र और दूसरी सरकारी सेवाओं के लिए अपनी निजी जानकारी देते हैं, तो उसकी सुरक्षा करना बेहद ज़रूरी है। उन्होंने कहा कि डिजिटल गवर्नेंस के तेजी से विस्तार ने सरकार की ज़िम्मेदारी बढ़ा दी है। अब यह पक्का करना होगा कि नागरिकों का डेटा सुरक्षित तरीके से इकट्ठा, स्टोर और इस्तेमाल हो। साथ ही, इसका कोई गलत इस्तेमाल न हो या कोई बिना इजाज़त इसे एक्सेस न कर पाए।

वर्कशॉप में एक्सपर्ट्स ने DPDP एक्ट के मुख्य प्रावधानों को आसान भाषा में समझाया। इनमें सहमति (consent), उद्देश्य की सीमा (purpose limitation), डेटा मिनिमाइजेशन (data minimization), डेटा प्रिंसिपल्स के अधिकार, डेटा फिड्यूशियरी की ज़िम्मेदारियां और डेटा प्रोटेक्शन बोर्ड ऑफ इंडिया की भूमिका जैसे अहम विषय शामिल थे।

अधिकारियों ने इस कानून को अपने-अपने विभागों में लागू करने में आने वाली प्रैक्टिकल दिक्कतों पर भी चर्चा की। उन्हें पर्सनल जानकारी को ज़िम्मेदारी से संभालने और सुरक्षित रखने के लिए जागरूक किया गया।
IT विभाग ने डेटा प्रोटेक्शन को मज़बूत करने के लिए अपना रोडमैप भी पेश किया। इसके तहत, डेटा-हैंडलिंग के मानकों पर विस्तृत गाइडलाइंस जारी की जाएंगी और हर विभाग में एक डेटा प्रोटेक्शन नोडल ऑफिसर नियुक्त किया जाएगा।

सिंह ने कहा कि दिल्ली में डिजिटल गवर्नेंस की बढ़ती ज़रूरतों के साथ IT विभाग की भूमिका भी बढ़ गई है और सरकार तकनीकी और संस्थागत क्षमताओं को और मज़बूत करने पर काम कर रही है। DPDP एक्ट को असरदार तरीके से लागू करने के लिए आने वाले समय में अलग-अलग फेज में और ट्रेनिंग, गाइडलाइंस और तकनीकी मदद दी जाएगी।