Cloudburst vs Landslide vs GLOF: नेपाल की भयानक Flash Flood के बीच जानिए Landslide, Cloudburst और GLOF में क्या फर्क है और ग्लेशियर से जुड़ी बाढ़ कैसे आती है।
Cloudburst Landslide and GLOF Difference: नेपाल-तिब्बत बॉर्डर पर बुधवार को आई भयानक फ्लैश फ्लड ने पूरे इलाके में तबाही मचा दी है। नेपाल पुलिस के 27 अगस्त सुबह के अपडेट के मुताबिक, अब तक 162 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी थी, जबकि सैकड़ों लोग अब भी लापता हैं। चितवन में अकेले 64 शव मिलने की जानकारी दी गई है। सबसे चौंकाने वाली बात यह थी कि जब यह तबाही मची, तब उस इलाके में मूसलाधार बारिश भी नहीं हो रही थी। पहाड़ों में जब भी कोई सैलाब आता है, तो अक्सर लोग मान लेते हैं कि कहीं बादल फटा होगा या कोई ग्लेशियर टूटकर नदी में गिर गया होगा। लेकिन नेपाल बाढ़ इस बार अलग रहा। अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) के मुताबिक, यह सैलाब चीन की तरफ ल्हेंदे नदी में गिरे एक विशालकाय पहाड़ के कारण आया था। ऐसे में आइए जानते हैं लैंडस्लाइड से आई बाढ़, बादल फटना (Cloudburst) और GLOF आपस में एक-दूसरे से कितने अलग हैं...
लैंडस्लाइड डैम बर्स्ट: जब खिसका पहाड़ बन जाता है जल-प्रलय
नेपाल और तिब्बत बॉर्डर पर जो हुआ, उसे वैज्ञानिक भाषा में 'लैंडस्लाइड डैम बर्स्ट' कहते हैं। जब किसी संकरी घाटी में बहुत भारी चट्टान या पहाड़ का बड़ा हिस्सा टूटकर गिरता है, तो वह बहती हुई नदी का रास्ता पूरी तरह रोक देता है। इससे नदी के पीछे अचानक एक विशाल कच्ची झील बन जाती है। पीछे से लगातार आ रहे पानी का दबाव जब यह कच्ची मिट्टी और पत्थरों की दीवार नहीं झेल पाती, तो वह अचानक एक झटके में फट जाती है।
नेपाल में क्या हुआ?
ल्हेंदे नदी में पहाड़ गिरने से 5.2 तीव्रता के भूकंप जैसा झटका लगा। कुछ ही देर में जब यह रुका हुआ पानी फूटा, तो 30 फीट ऊंचा मलबे का सैलाब भोटेकोशी और त्रिशूली नदी में घुस गया और लोगों को संभलने तक का मौका नहीं मिला। इसमें बारिश का होना बिल्कुल जरूरी नहीं है।
बादल फटना क्या होता है?
बादल फटना (Cloudburst) पूरी तरह से मौसम और भारी बारिश से जुड़ी घटना है। मौसम विज्ञान के अनुसार, जब बादलों से भरा मानसून किसी ऊंचे पहाड़ से टकराकर वहीं अटक जाता है और करीब 20 से 30 वर्ग किलोमीटर के छोटे से दायरे में एक घंटे के भीतर 100 मिलीमीटर (10 सेंटीमीटर) से ज्यादा बारिश हो जाती है, तो उसे बादल फटना कहते हैं। इसमें कोई पहाड़ नदी को नहीं रोकता, बल्कि आसमान से इतनी तेज गति से पानी गिरता है कि पहाड़ों की सभी सूखी ढलानें और छोटी नालियां कुछ ही सेकंड में खूंखार नदी में बदल जाती हैं। नेपाल हादसे में बादल नहीं फटा था, क्योंकि वहां आसमान साफ था और बारिश नहीं हो रही थी।
GLOF क्या होता है?
GLOF (Glacial Lake Outburst Flood) का मतलब है ग्लेशियर पिघलने से बनी झीलों का अचानक फट जाना। बहुत ज्यादा ऊंचाई (15,000 फीट से ऊपर) पर जब ग्लेशियर पिघलते हैं, तो उनके आगे पत्थरों और बर्फ की प्राकृतिक दीवार बन जाती है, जिसे मोरेन (Moraine) कहते हैं। इसके पीछे लाखों गैलन पानी जमा होकर एक झील बन जाता है। जब तापमान बढ़ने से या किसी एवलांच (हिमस्खलन) के गिरने से यह बर्फीली दीवार कमजोर होकर टूटती है, तो ग्लेशियर का सारा पानी नीचे की घाटियों में सुनामी बनकर दौड़ पड़ता है। GLOF की घटनाएं सिर्फ बर्फ से ढके अत्यधिक ऊंचे बर्फीले इलाकों में होती हैं, जबकि लैंडस्लाइड किसी भी कच्चे या दरकते पहाड़ पर हो सकता है।
डेब्रिस फ्लो: पानी नहीं, 150 किमी तक दौड़ा लिक्विड कंक्रीट
नेपाल की इस बाढ़ में 13 हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स और सैकड़ों गाड़ियां इसलिए तबाह हो गईं क्योंकि यह सिर्फ पानी का बहाव नहीं था। इसे 'डेब्रिस फ्लो' (मलबे का बहाव) कहा जाता है। जब पानी में 70% हिस्सा बड़े पत्थर, गाद, कीचड़ और टूटे पेड़ मिल जाते हैं, तो उसका वजन सामान्य पानी से दोगुना हो जाता है। यह गीले सीमेंट के घोल की तरह काम करता है। यही वजह थी कि तेज बहाव लोगों और गाड़ियों को 150 किलोमीटर दूर चितवन तक घसीट ले गया।


