Chitrakoot Floods : मध्य प्रदेश के सतना और चित्रकूट में मंदाकिनी नदी उफान पर है, जिससे भारी तबाही हुई है। बाढ़ की चपेट में कई मंदिर घर और सती अनुसूया आश्रम पानी में डूब चुके हैं। एक पुजारी ने दावा किया है कि 2026 में आई बाढ़ 2003 की बाढ़ से भी ज़्यादा विनाशकारी है।

सतना: मध्य प्रदेश के सतना और चित्रकूट इलाकों में मंदाकिनी नदी उफान पर है। नदी के किनारे बसे कई दुकान, घर, मंदिर, मठ और आश्रम इसकी चपेट में आ गए हैं। चित्रकूट में मौजूद सती अनुसूया आश्रम पर भी बाढ़ का बहुत बुरा असर पड़ा है। उफनती नदी के तेज बहाव में कई मंदिर और आश्रम या तो बह गए हैं या बुरी तरह टूट गए हैं। इलाके में हर तरफ मलबा और मूर्तियों के टुकड़े बिखरे पड़े हैं।

2003 के बाद 2026 में आई इतनी भयानक बाढ़

स्थानीय पुजारी नवल किशोर गौतम ने 2003 की बाढ़ को याद करते हुए बताया कि 2026 में आई बाढ़ की स्थिति कहीं ज़्यादा मुश्किल थी।एएनआई से बात करते हुए गौतम ने कहा, “2003 के बाद, 2026 में आई बाढ़ बहुत भयानक थी। यह 2003 वाली बाढ़ से भी ज़्यादा ताकतवर थी। यहाँ के करीब तीन-चार मंदिर और आश्रम तबाह हो गए। बाज़ार की दो-तीन सौ दुकानें भी बर्बाद हो गईं। मंदाकिनी नदी सब कुछ बहा ले गई।”



चित्रकूट में कैसे प्रकट हुई थी मंदाकिनी नदी

  • इस बार की बाढ़ से भी इलाके में भारी नुकसान हुआ है, जिससे लोगों की रोजी-रोटी छिन गई है। स्थानीय लोगों ने बताया, “इसी जगह पर अनुसूया और उनके पति अत्रि मुनि ने तपस्या की थी। जब अत्रि मुनि को प्यास लगी, तो माता अनुसूया ने अपनी शक्ति और भक्ति से यहीं से मंदाकिनी नदी को प्रकट किया था....
  • अब, बाढ़ की वजह से कई आश्रम और दुकानें तबाह हो गई हैं। नदी का पानी दूर-दूर से आकर यहाँ मिलता है। फिलहाल रोजी-रोटी का कोई साधन नहीं है। लोग आश्रमों और पहाड़ियों पर रहकर जान बचा रहे हैं। जैसे ही मंदाकिनी नदी का जलस्तर घटेगा, वे प्रशासन की इजाजत से अपना काम फिर से शुरू करेंगे।”
  • बाढ़ के हालात को देखते हुए सती अनुसूया आश्रम में रहने वाले पुजारियों को सुरक्षित जगहों पर भेज दिया गया है। स्थानीय निवासी और पुजारी भी मौजूदा स्थिति के कारण पर्यटकों को इस इलाके में आने से रोक रहे हैं।

पहाड़ों की चट्टानों से तबाह हुए आश्रम

पहाड़ों से बड़ी-बड़ी चट्टानें खिसककर आश्रम की ओर जाने वाली सड़कों पर गिर गई हैं, जबकि भूस्खलन और हाई-टेंशन पोल गिरने से इलाके पर और बुरा असर पड़ा है।