Delhi Metro punctuality: दिल्ली मेट्रो ने समय की पाबंदी में दुनिया के बड़े मेट्रो नेटवर्क को पीछे छोड़ते हुए पहला स्थान हासिल किया है। जनवरी-मार्च 2024 में DMRC की पंक्चुएलिटी 99.7% रही। जानिए CoMET की ग्लोबल रैंकिंग और दिल्ली मेट्रो की पूरी उपलब्धि।

दिल्ली मेट्रो ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है, जिसकी चर्चा दुनिया भर में हो रही है. समय की पाबंदी (Punctuality) के मामले में दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) दुनिया में नंबर एक बन गया है. इस रेस में दिल्ली मेट्रो ने न्यूयॉर्क सबवे, पेरिस मेट्रो और हॉन्ग कॉन्ग MTR जैसे दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित मेट्रो नेटवर्क्स को भी पीछे छोड़ दिया है।

यह रैंकिंग जनवरी से मार्च 2024 की अवधि के लिए है, जिसमें DMRC ने 99.7% की शानदार पंक्चुएलिटी दर हासिल की. यह आंकड़ा दुनिया के किसी भी प्रमुख मेट्रो नेटवर्क से बेहतर है. तो आखिर ये रैंकिंग तय कौन करता है?

कैसे हुई ये ग्लोबल रैंकिंग?

यह रैंकिंग 'कम्युनिटी ऑफ मेट्रो' (CoMET) नाम के एक ग्लोबल ग्रुप ने जारी की है. CoMET दुनिया के 39 सबसे बड़े और व्यस्त मेट्रो सिस्टम का एक एलीट क्लब है, जो एक-दूसरे के प्रदर्शन को आंकते हैं. इस ग्रुप में लंदन अंडरग्राउंड, न्यूयॉर्क सिटी सबवे, सिंगापुर SMRT और पेरिस RATP जैसे दिग्गज शामिल हैं.

CoMET की पंक्चुएलिटी की परिभाषा भी काफी सख्त है. इसके मुताबिक, एक ट्रेन को तभी समय पर माना जाता है, जब वह अपने आखिरी स्टेशन पर तय समय से 2 मिनट से ज़्यादा की देरी से न पहुंचे. इसी पैमाने पर दिल्ली मेट्रो खरी उतरी है.

यह ग्रुप इंपीरियल कॉलेज लंदन के ट्रांसपोर्ट स्ट्रैटेजी सेंटर (TSC) द्वारा मैनेज किया जाता है, जो इसे और भी विश्वसनीय बनाता है. DMRC पहले भी इस लिस्ट में टॉप पर रहा है, लेकिन यह पहली बार है जब उसने पहला स्थान हासिल किया है.

DMRC ने इस पर क्या कहा?

इस शानदार उपलब्धि पर DMRC के मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ. विकास कुमार ने खुशी जाहिर की है. उन्होंने कहा कि यह DMRC के कर्मचारियों की लगन और कड़ी मेहनत का नतीजा है. उनके मुताबिक, यह रैंकिंग विश्व स्तरीय परिवहन सेवाएं देने की DMRC की प्रतिबद्धता को दर्शाती है.

डॉ. कुमार ने यह भी भरोसा दिलाया कि DMRC का लक्ष्य इस उच्च मानक को बनाए रखना और यात्रियों के अनुभव को लगातार बेहतर बनाना है. दिल्ली मेट्रो का नेटवर्क दुनिया के सबसे बड़े नेटवर्क्स में से एक है, जिसमें 12 लाइनें, 393 किलोमीटर का ट्रैक और 288 स्टेशन शामिल हैं.

इतने बड़े और जटिल सिस्टम को लगभग 100% समय की पाबंदी के साथ चलाना वाकई एक बड़ी बात है. यह उपलब्धि दिल्ली के लाखों यात्रियों के लिए गर्व का विषय है जो हर दिन इस पर निर्भर रहते हैं.