Abhijeet Deepak latest news : दिल्ली के जंतर मंतर पर कॉकरोज जनता पार्टी का आंदोलन खत्म होने के बाद भी सीजेपी के लोग शांत नहीं बैठे हैं। CJP फांउडर अभिजीत दिपके ने अब महाराष्ट्र सरकार की शिक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए आंदोलन करने का अल्टीमेटम दिया है।
'कॉकरोच जनता पार्टी' के संस्थापक अभिजीत दिपके ने एक बार फिर केंद्र सरकार, शिक्षा व्यवस्था पर तीखे सवाल किए। साथ उन्होंने महाराष्ट्र की देवेंद्र फडणवीस सरकार पर भी हमला करते हुए कहा कि यहां भी पेपरलीक का बड़ा खेल चल रहा है। अब दिल्ली के बाद यहीं आंदोलन की जरुरत है। बता दें कि दिपके ने यह बातें गुरूवार को छत्रपति संभाजीनगर में मीडिया से की बातचीत में की।
क्या दिल्ली के बाद मुंबई की बारी?
- दिपके ने कहा कि उन्हें भारत के संविधान - डॉ. भीमराव अंबेडकर के संविधान - और महात्मा गांधी के आदर्शों पर पूरा भरोसा है और वह लोकतांत्रिक तरीकों से अपना संघर्ष जारी रखेंगे।
- महाराष्ट्र में बार-बार हो रहे पेपर लीक की घटनाओं पर अभिजीत दिपके ने जोर देकर कहा कि राज्य में भी एक बड़े आंदोलन की जरूरत है. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने पेपर लीक मामलों के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट का वादा तो किया था, लेकिन पहली ही सुनवाई इसलिए टल गई क्योंकि सीबीआई के वकील कोर्ट में पेश ही नहीं हुए. उन्होंने कहा कि चुनाव रैलियां तो समय पर होती हैं, लेकिन सरकार शिक्षा से जुड़े मामलों को लेकर गंभीर नहीं दिखती।
- उन्होंने सवाल उठाया कि बिहार चुनाव के दौरान स्पेशल ट्रेनें चलाई जाती हैं, लेकिन महाराष्ट्र में पुलिस भर्ती और अन्य सरकारी परीक्षाओं के लिए यात्रा करने वाले छात्रों के लिए कोई विशेष व्यवस्था क्यों नहीं की जाती. उन्होंने बताया कि दूर-दराज के जिलों से आने वाले छात्रों को सड़कों पर रात गुजारनी पड़ती है और अक्सर उन्हें समय पर खाना भी नहीं मिलता>
- महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (MPSC) से जुड़े हालिया पेपर लीक मामले का जिक्र करते हुए दिपके ने कहा कि न तो नरेंद्र मोदी, न धर्मेंद्र प्रधान और न ही देवेंद्र फडणवीस शिक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की प्राथमिकता सिर्फ चुनाव जीतना है, छात्रों का भविष्य नहीं।
‘’बीजेपी नेताओं के बच्चे विदेश में पढ़ते''
दिपके ने यह भी दावा किया कि चूंकि कई बीजेपी नेताओं के बच्चे विदेश में पढ़ते हैं और उन्हें सरकारी नौकरी की परीक्षाओं की चिंता नहीं करनी पड़ती, इसलिए सरकार छात्रों की मुश्किलों को समझ नहीं पाती है।


