ग्वालियर STF ने 70 बांग्लादेशियों के फर्जी भारतीय पासपोर्ट का खुलासा किया है। जांच में पता चला कि पासपोर्ट बनवाने के लिए आधार, वोटर आईडी और 10वीं की फर्जी मार्कशीट का इस्तेमाल किया गया।
Gwalior Fake Passport Case: मध्य प्रदेश के ग्वालियर में भारतीय पासपोर्ट सिस्टम में सेंध लगाने का चौंकानेवाला मामला सामने आया है। इस फर्जी पासपोर्ट कांड के तार ग्वालियर जिले के डबरा क्षेत्र से जुड़े हैं। जांच में पता चला कि डबरा के एक ही इलाके में स्थानीय पतों का इस्तेमाल कर करीब 70 बांग्लादेशियों के फर्जी भारतीय पासपोर्ट बनवाए गए। मामले की जांच कर रही ग्वालियर STF ने इस मामले में अब तक 2 आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
डबरा के एक ही घर के पते पर बने 20 फर्जी पासपोर्ट
STF की जांच में पता चला कि ग्वालियर के डबरा स्थित बौद्ध विहार क्षेत्र में एक ही घर के पते पर करीब 20 बांग्लादेशियों के फर्जी पासपोर्ट बनाए गए। इन पासपोर्ट में इन बांग्लादेशी नागरिकों को डबरा के बौद्ध विहार में रहने वाले बौद्ध धर्म के अनुयायी के तौर पर दिखाया गया था। जांच में यह भी पता चला कि इन सभी पासपोर्ट में रियाल चौधरी ने गवाह के तौर पर अपने हस्ताक्षर किए थे। इस बात की पुष्टि होने के बाद ग्वालियर STF की टीम ने रियाल चौधरी को गिरफ्तार किया। उसकी निशानदेही पर उसके साथी विप्लव अधिकारी को भी गिरफ्तार किया गया।
पहचान बदलकर ग्वालियर और बैतूल में रह रहे थे आरोपी
- STF के मुताबिक, रियाल चौधरी और विप्लव अधिकारी दोनों बांग्लादेशी नागरिक हैं।
- दोनों अपनी पहचान बदलकर भारतीय दस्तावेजों और पासपोर्ट के सहारे मध्य प्रदेश के ग्वालियर और बैतूल में रह रहे थे।
- ग्वालियर STF के एसपी राजेश सिंह भदौरिया ने बताया कि फर्जी पासपोर्ट मामले की जांच के दौरान बैतूल से रियाल चौधरी और ग्वालियर से उसके साथी विप्लव अधिकारी को गिरफ्तार किया गया।
- उन्होंने बताया कि शुरुआती जांच में 20 फर्जी पासपोर्ट मिले थे। लेकिन जांच आगे बढ़ने पर 50 और फर्जी पासपोर्ट सामने आए।
- इन पासपोर्ट में मध्य प्रदेश के अलग-अलग जिलों के पतों का इस्तेमाल किया गया था। इस तरह STF ने अब तक कुल 70 फर्जी पासपोर्ट पकड़े हैं।
आधार और 10वीं की मार्कशीट तक बनाई फर्जी
जांच एजेंसी के मुताबिक, इन विदेशी नागरिकों को कागजों में भारतीय नागरिक साबित करने के लिए कई तरह के फर्जी दस्तावेज तक तैयार कर लिए गए थे। इनमें आधार कार्ड, वोटर आईडी, निवास प्रमाण पत्र और 10वीं कक्षा की मार्कशीट जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेज शामिल बताए जा रहे हैं। इन दस्तावेजों के जरिए पहले भारतीय पहचान स्थापित की गई और इसके बाद भारतीय पासपोर्ट बनवाए गए। STF की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, इस पूरे फर्जीवाड़े का दायरा भी बढ़ता जा रहा है।
असम-बंगाल के रास्ते भारत आने का दावा
- आरोपी रियाल चौधरी से पूछताछ में STF को कई अहम जानकारियां मिली हैं। पूछताछ में रियाल चौधरी ने बताया कि वह असम के रास्ते साल 1971 में ही भारत आ गया था। वहीं, उसका साथी विप्लव अधिकारी बंगाल के रास्ते मध्य प्रदेश पहुंचा था।
- आरोपियों से पूछताछ में मिली जानकारी के आधार पर STF ने अपनी जांच का दायरा बढ़ा दिया है। इस मामले की आगे की पड़ताल के लिए STF की दो टीमें बंगाल और असम रवाना की गई हैं।
- STF अधिकारियों को आशंका है कि इस फर्जी पासपोर्ट और दस्तावेजी फर्जीवाड़े में और भी लोग शामिल हो सकते हैं। जांच आगे बढ़ने के साथ इस मामले में और आरोपियों की गिरफ्तारी होने की संभावना जताई गई है।


