NEET Paper Leak Row: NEET पेपर लीक विवाद के बीच धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद बीजेपी ने मंत्रालय बदलने के प्रस्ताव वाली रिपोर्ट को खारिज किया। संसद में NDA और विपक्ष आमने-सामने, नए एंटी पेपर लीक बिल पर भी चर्चा।
CJP Demands Dharmendra Pradhan Exit: देशभर में NEET पेपर लीक विवाद को लेकर शुरू हुआ छात्र आंदोलन अब बड़े राजनीतिक घटनाक्रम में बदल चुका है। पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद जहां संसद में उन्हें NDA नेताओं ने खुलकर समर्थन दिया, वहीं बीजेपी ने उन रिपोर्टों को सिरे से खारिज कर दिया है, जिनमें दावा किया गया था कि सरकार ने पहले मंत्रालय बदलने का प्रस्ताव दिया था। इस पूरे घटनाक्रम ने संसद से लेकर सड़कों तक सियासी बहस को और तेज कर दिया है।
BJP ने मंत्रालय बदलने के प्रस्ताव वाली रिपोर्ट को बताया निराधार
बीजेपी सांसद और पार्टी प्रवक्ता संबित पात्रा ने मीडिया रिपोर्टों का खंडन करते हुए कहा कि ऐसी खबरें पूरी तरह "काल्पनिक, निराधार और बेबुनियाद" हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि पार्टी की ओर से ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं दिया गया था और लोगों के बीच भ्रम फैलाने की कोशिश नहीं होनी चाहिए।
दरअसल, कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया था कि केंद्र सरकार ने बातचीत के दौरान धर्मेंद्र प्रधान को कैबिनेट से हटाने के बजाय उनका मंत्रालय बदलने का प्रस्ताव रखा था, जिसे Cockroach Janta Party (CJP) ने अस्वीकार कर दिया।
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तीसरे दौर की बातचीत के बाद हुआ इस्तीफा
CJP और केंद्र सरकार के बीच कई दौर की बातचीत हुई। संगठन की ओर से तीन प्रमुख मांगें रखी गई थीं-
- सोनम वांगचुक की बिना शर्त रिहाई।
- शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा।
- NEET पेपर लीक से जुड़े आत्महत्या मामलों के पीड़ित परिवारों को 1 करोड़ रुपये का मुआवजा।
तीसरे दौर की वार्ता के बाद धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद CJP ने देशभर में चल रहे अपने विरोध प्रदर्शन वापस लेने की घोषणा की। सरकार ने शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर दर्ज मामलों को वापस लेने सहित कई मांगों पर सहमति भी जताई।
संसद में समर्थन और विपक्ष का विरोध
धर्मेंद्र प्रधान के संसद पहुंचने पर NDA सांसदों ने उनका स्वागत किया और उन्हें सम्मानस्वरूप पारंपरिक टोपी भेंट की। दूसरी ओर कांग्रेस समेत विपक्षी दलों ने छात्रों पर कथित पुलिस कार्रवाई के खिलाफ प्रदर्शन किया और "शिक्षा चोरी" के नारे लगाए।
इसी बीच संसद में Public Examinations (Prevention of Unfair Means) Amendment Bill, 2026 पर चर्चा की तैयारी हुई। प्रस्तावित संशोधन के तहत पेपर लीक और परीक्षा धोखाधड़ी के मामलों में अधिकतम सजा 5 वर्ष से बढ़ाकर 10 वर्ष तथा जुर्माना 50 लाख रुपये तक करने का प्रावधान रखा गया है।
यह विवाद अब केवल एक परीक्षा तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि शिक्षा व्यवस्था, परीक्षा पारदर्शिता और सरकार की जवाबदेही को लेकर राष्ट्रीय राजनीतिक मुद्दा बन चुका है।
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