पीएम मोदी ने पुतिन को तिरुक्कुरल का रूसी अनुवाद भेंट किया। जानिए 1,330 कुरलों वाली इस प्राचीन तमिल रचना में क्या खास है और मोदी का इससे पुराना जुड़ाव क्या है।

What is Thirukkural: रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें एक ऐसी किताब भेंट की, जिसकी जड़ें सदियों पुरानी तमिल साहित्यिक परंपरा में हैं। यह सिर्फ एक पुस्तक नहीं, बल्कि भारत के दर्शन, नैतिकता और जीवन-दृष्टि को दुनिया के सामने रखने वाला सांस्कृतिक संदेश भी है।

पुतिन को मिली तिरुक्कुरल की रूसी भाषा में किताब

पीएम मोदी ने पुतिन को तिरुक्कुरल का रूसी अनुवाद भेंट किया। तमिल के महान कवि और दार्शनिक तिरुवल्लुवर की इस रचना में जीवन, समाज, शासन, न्याय, व्यवहार और प्रेम जैसे विषयों पर बेहद संक्षिप्त लेकिन गहरे विचार मिलते हैं। तिरुक्कुरल में कुल 1,330 कुरल (दोहे) हैं, जिन्हें 133 अध्यायों में बांटा गया है। यही इसकी खासियत है कि कम शब्दों में बड़े जीवन-संदेश दिए गए हैं।

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अरम, पोरुल और इनबम में बंटी है पूरी रचना

तिरुक्कुरल के तीन प्रमुख हिस्से हैं—अरम, पोरुल और इनबम। अरम में नैतिकता, सदाचार, सत्य, दया और अच्छे आचरण की चर्चा है। पोरुल में शासन, नेतृत्व, न्याय, प्रशासन, ज्ञान और सामाजिक व्यवहार जैसे विषय आते हैं। वहीं इनबम मानव प्रेम और भावनाओं से जुड़ा हिस्सा है। यानी यह ग्रंथ व्यक्ति से लेकर समाज और शासन तक जिंदगी के कई पहलुओं को समेटता है।

तिरुक्कुरल से पीएम मोदी का पुराना जुड़ाव

पीएम मोदी पहले भी तिरुक्कुरल को वैश्विक स्तर पर पहुंचाने की बात करते रहे हैं। 2015 में उन्होंने इसके गुजराती अनुवाद का विमोचन किया था। 2024 और 2026 में तिरुवल्लुवर दिवस पर भी उन्होंने इस महान रचना और उसके संदेशों का उल्लेख किया। 31 अगस्त 2026 को ताशकंद में पीएम मोदी ने तिरुक्कुरल के उज्बेक अनुवाद की संभावना पर भी चर्चा की थी। 2023 के काशी तमिल संगमम में इसके बहुभाषी और ब्रेल संस्करण सामने आए थे। ऐसे में पुतिन को रूसी अनुवाद भेंट करना भारत की साहित्यिक और सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक मंच पर रखने का एक और संकेत माना जा सकता है।

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