MPSC Exam Controversy : पुणे में महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (MPSC) की तैयारी कर रहे 28 साल के एक छात्र ने आत्महत्या कर ली। एक तरफ जहां छात्र सरकार के खिलाफ विरोध-प्रदशर्न कर रहे हैं, दूसरी तरफ आई इस घटना ने उनका मनोबल तोड़ दिया है। .

पुणे (महाराष्ट्र): पुणे से एक बेहद दुखद खबर आई है। महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (MPSC) की तैयारी कर रहे 28 साल के एक युवक ने बुधवार को अपने किराए के कमरे में आत्महत्या कर ली। इस घटना से इलाके में हड़कंप मच गया है। वहीं सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे अन्य युवाओं में डर का माहौल बन गया है। फिलहाल पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर जांच पड़ताल शुरू कर दी है, ताकि इस खौफनाक कदम के पीछे की सही वजह का पता चल सके।

कौन था प्रथमेश और क्यों किया सुसाइड

  • पुलिस ने मृतक की पहचान प्रथमेश देशमुख के तौर पर की है। वह महाराष्ट्र के धाराशिव जिले की परांडा तहसील के खासपुरी गांव का रहने वाला था।प्रथमेश पिछले चार साल से पुणे में रहकर MPSC समेत कई प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहा था।
  • पुणे सिटी पुलिस के ज़ोन-1 DCP ऋषिकेश रावले के मुताबिक, प्रथमेश पर करीब 2.50 लाख रुपये का कर्ज था और वह आर्थिक तंगी से जूझ रहा था। उसके परिवार की आर्थिक हालत भी ठीक नहीं थी। पुलिस को एक सुसाइड नोट भी मिला है। जिसमें उसने लिए और चुकाए गए कर्जों का जिक्र किया है।
  • पुलिस ने कहा, “पुलिस को शक है कि आर्थिक तंगी और परीक्षा पास न कर पाने के मानसिक तनाव के चलते उसने यह खौफनाक कदम उठाया होगा। एक सुसाइड नोट बरामद हुआ है.” पुलिस ने आत्महत्या का मामला दर्ज कर लिया है ।

महाराष्ट्र में MPSC की छात्र कर रहे प्रदशर्न

  • बता दें कि पिछले कुछ दिनों से पुणे और महाराष्ट्र के दूसरे हिस्सों में MPSC की तैयारी करने वाले छात्र प्रदर्शन कर रहे हैं. उनकी मांग है कि MPSC के चेयरमैन और सचिव इस्तीफा दें. यह विरोध फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन में ड्रग इंस्पेक्टर (ग्रुप बी) पद के लिए हुई परीक्षा में पेपर लीक के आरोपों के बाद शुरू हुआ है.
  • इस घटना के बाद, CJP एक्टिविस्ट अभिजीत दिपके ने इस मौत को "परीक्षा में धांधली, देरी, अनिश्चितता और जवाबदेही की कमी" के दबाव से जोड़ा है. उन्होंने कहा कि "परीक्षा प्रणाली की विफलताओं" के कारण छात्रों को भुगतना नहीं चाहिए.

CJP चीफ अभिजीत दिपके ने बयां किया छात्रों का दर्द

  • दिपके ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट किया, "कई छात्र घर से दूर रहते हैं, कम पैसों में गुजारा करते हैं और उनके परिवार जो थोड़ा-बहुत पैसा दे पाते हैं, उसे किराए, कोचिंग, किताबों और बार-बार परीक्षा देने में खर्च करते हैं. जब इसमें परीक्षा में धांधली, देरी और अनिश्चितता जुड़ जाती है, तो दबाव असहनीय हो जाता है. आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के छात्रों के लिए हर देरी सिर्फ कैलेंडर की एक तारीख नहीं होती."
  • उन्होंने आगे लिखा, "इसका मतलब है ज्यादा किराया, ज्यादा खर्च, परिवार पर ज्यादा निर्भरता और उनकी जिंदगी का एक और साल अनिश्चितता में लटक जाना. छात्रों को एक ऐसी परीक्षा प्रणाली की नाकामियों की इतनी बड़ी कीमत नहीं चुकानी चाहिए, जिस पर उनसे भरोसा करने की उम्मीद की जाती है. जिम्मेदार लोग जवाबदेही लें, इससे पहले और कितने छात्रों को भुगतना पड़ेगा? सिस्टम को बदलने के लिए और कितनी जानें जाएंगी?"

रोहित पवार ने सरकार से की यह मांग

  • राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) या NCP (SP) के नेता रोहित पवार ने देशमुख की मौत पर दुख जताया और कहा कि सरकार को छात्रों पर बढ़ते दबाव को गंभीरता से लेना चाहिए।
  • उन्होंने कहा, "पिछले कुछ सालों में पेपर लीक समेत कई गड़बड़ियों की वजह से, जो छात्र दिल में सपने लेकर पढ़ाई करते हैं, उनके मन में एक किनारे किए जाने का अहसास पैदा हो रहा है।