6 महीने के युद्ध के बाद, ट्रंप ने ईरान से व्यापार करने वाले देशों को कड़ी आर्थिक पाबंदी की चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि ईरान को अभूतपूर्व प्रतिबंधों और अकेलेपन का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने सहयोगियों से ईरान को अलग-थलग करने में साथ देने की अपील की।

वॉशिंगटन: अमेरिका और ईरान के बीच चल रही जंग को छह महीने हो गए हैं। इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दुनिया को एक बड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने साफ-साफ कह दिया है कि जो भी देश ईरान के साथ व्यापार करेगा या उसकी किसी भी तरह से मदद करेगा, उसे कड़े आर्थिक नतीजे भुगतने होंगे। ट्रंप ने कहा कि यह किसी भी देश के खिलाफ अब तक का सबसे कड़ा आर्थिक दबाव होगा।

ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर एक पोस्ट में लिखा, "मैंने ईरान को समझौता करने का एक शानदार मौका दिया था, लेकिन उन्होंने इसका फायदा नहीं उठाया।" उन्होंने आगे कहा कि अब ईरान को ऐसे आर्थिक प्रतिबंधों और अकेलेपन का सामना करना पड़ेगा, जैसा पहले कभी नहीं हुआ।

ट्रंप ने चेतावनी दी कि जो देश ईरान को किसी भी तरह की आर्थिक या तकनीकी मदद देंगे, वहां के वित्तीय संस्थानों, बिजनेस, एयरपोर्ट और सरकारी एजेंसियों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा। हालांकि ट्रंप ने किसी देश का नाम तो नहीं लिया, लेकिन कहा कि 'उन्हें पता है कि वो कौन हैं'। बता दें कि जंग शुरू होने से पहले चीन, तुर्की, जर्मनी, दक्षिण कोरिया और जापान ईरान के बड़े व्यापारिक साझेदार थे। ट्रंप ने अपने सभी सहयोगी देशों से अपील की है कि वे ईरान को अलग-थलग करने और हराने के लिए अमेरिका का साथ दें। उन्होंने यह भी साफ किया कि ईरान कभी भी परमाणु हथियार नहीं बना पाएगा।

मध्य पूर्व में यह जंग 28 फरवरी को तब शुरू हुई, जब अमेरिका और इजरायली सेना ने मिलकर ईरान पर हमला किया था। इस हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता अली खमेनेई समेत कई बड़े नेता मारे गए थे। इसके बाद ईरान ने भी अमेरिका और इजरायल के ठिकानों पर जवाबी कार्रवाई की। ईरान की कमाई के रास्ते बंद करने के लिए अमेरिकी ट्रेजरी ने 'ऑपरेशन इकोनॉमिक फ्यूरी' नाम से प्रतिबंधों को और कड़ा कर दिया है।

ट्रंप ने बताया कि 60 दिनों का युद्धविराम खत्म होने के बाद अब ईरान के साथ कोई बातचीत नहीं हो रही है। उन्होंने यह भी साफ किया कि होरमुज़ जलडमरूमध्य में नौसैनिक नाकाबंदी जारी है और पानी के नीचे बिछाई गई माइन्स को हटा दिया गया है। 17 जून को हुए एक समझौते के बाद सैन्य कार्रवाई रोक दी गई थी, लेकिन होरमुज़ जलडमरूमध्य के नियंत्रण को लेकर विवाद फिर से बढ़ गया है। यह वही रास्ता है जहां से दुनिया का पांचवां हिस्सा तेल और लिक्विफाइड नेचुरल गैस गुजरता है।