Varaha Jayanti 2026 Date: हर साल भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को वराह जयंती का पर्व मनाया जाता है। इस बार ये पर्व 13 सितंबर, रविवार को मनाया जाएगा।
Varaha Jayanti Puja Vidhi Mantra: भगवान विष्णु के दशावतारों में वराह अवतार का विशेष स्थान माना गया है। धार्मिक मान्यता के अनुसार जब राक्षस हिरण्याक्ष ने पृथ्वी को समुद्र की गहराई में छिपा दिया था, तब भगवान विष्णु ने वराह यानी सूअर का रूप धारण कर पृथ्वी का उद्धार किया था। इसी अवतार के प्रकट होने की खुशी में हर साल वराह जयंती मनाई जाती है। इस दिन भगवान वराह की विशेष पूजा की जाती है। जानें वराह अवतार की पूजा विधि, मंत्र और महत्व…
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वराह जयंती 2026 पूजा मुहूर्त
वराह जयंती पर यानी 13 सितंबर, रविवार को पूजा का शुभ मुहूर्त दोपहर 01 बजकर 31 मिनिट से शाम 04 बजे तक रहेगा। यानी इस दिन भक्तों को पूजा के लिए पूरे 02 घण्टे 29 मिनट का समय मिलेगा।
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वराह जयंती की पूजा विधि
- 13 सितंबर, रविवार की सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें। इसके बाद पूजा स्थल की सफाई करके वहां भगवान विष्णु या वराह भगवान की तस्वीर या प्रतिमा स्थापित करें।
- चौकी पर पीला कपड़ा बिछाएं। भगवान की प्रतिमा को जल अर्पित करें। शुद्ध घी का दीपक भी जलाएं। इसके बाद पंचामृत से अभिषेक कर पीले फूल, चंदन, चावल और तुलसी दल चढ़ाएं।
- अबीर, गुलाल, रोली आदि चीजें भी एक-एक चढ़ाएं। भगवान को फल, मिठाई और गुड़ आदि का भोग लगाएं। पूजा करते समय ऊं वराहाय नमः मंत्र का जाप भी मन ही मन में करते रहें।
- अंत में परिवार के साथ भगवान की आरती करें। संभव हो तो व्रत रखें। अपनी क्षमता के अनुसार जरूरतमंदों को भोजन, अनाज और कपड़े आदि का दान करें। उससे आपको शुभ फल मिलेंगे।
क्या है वराह अवतार की कथा?
पौराणिक कथा के अनुसार हिरण्याक्ष नाम का एक शक्तिशाली असुर पृथ्वी को समुद्र की गहराई में ले गया था। इससे पूरी सृष्टि का संतुलन बिगड़ने लगा। देवताओं ने भगवान विष्णु से पृथ्वी को बचाने की प्रार्थना की। तब भगवान विष्णु ने वराह का रूप धारण किया और समुद्र में उतरकर पृथ्वी को खोज निकाला। उन्होंने अपने दांतों पर पृथ्वी को उठाकर उसे फिर से उसके स्थान पर स्थापित किया। इसके बाद भगवान वराह और हिरण्याक्ष के बीच भयंकर युद्ध हुआ, जिसमें भगवान विष्णु ने हिरण्याक्ष का वध कर दिया। इस तरह पृथ्वी को संकट से बचाया गया और सृष्टि का संतुलन दोबारा कायम हुआ।
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