Why is Coforge Share Falling: चेयरमैन ओपी भट्ट के अचानक इस्तीफे के बाद कोफोर्ज का शेयर इंट्राडे में 9% तक क्रैश हुआ। 5 मिनट में 17 लाख शेयर बिक गए। जानें इनसाइड स्टोरी।

Coforge Share Crash: आईटी सेक्टर की दिग्गज कंपनी कोफोर्ज के शेयरों में बुधवार को बाजार खुलते ही जोरदार गिरावट देखने को मिली। अब तक आईटी पैक में करीब 75% की शानदार तेजी दिखाने वाला ये शेयर देखते ही देखते करीब 9% फिसलकर ₹1,781 के लो लेवल पर आ गया। बाजार खुलते ही महज 5 मिनट के अंदर ही 17 लाख से ज्यादा शेयरों की बिकवाली हो गई। इस भारी भगदड़ के पीछे कंपनी के चेयरमैन का अचानक दिया गया इस्तीफा और एक गोपनीय इंटरनल ऑडिट रिपोर्ट है। आइए जानते हैं कंपनी में अचानक ऐसा क्या हुआ कि शेयर क्रैश हो गया...

Coforge Share में क्या हुआ?

आज सुबह 9:15 बजे शेयर बाजार शुरू होते ही कोफोर्ज के काउंटर पर बिकवाली का भारी दबाव देखा गया। पहले 5 मिनट में नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर 17 लाख से ज्यादा शेयरों की ताबड़तोड़ खरीद-बिक्री हुई। जहां निफ्टी आईटी इंडेक्स 3% और मुख्य निफ्टी 0.6% नीचे था, वहीं कोफोर्ज का शेयर अकेले 8.7% तक टूट गया। एक दिन पहले तक शानदार प्रदर्शन करने वाले स्टॉक में इतनी तेज गिरावट ने हर निवेशक को चौंका दिया।

कोफोर्ज इंटरनल ऑडिट में ऐसा क्या मिला कि मचा बवाल?

कंपनी की ओर से एक्सचेंज को दी गई जानकारी के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026 की दूसरी तिमाही (Q2FY26) के लिए एक इंटरनल ऑडिट किया गया था। इस ऑडिट में 'बोर्ड इवैल्यूएशन रिपोर्ट' (BER) की जांच हुई, जो चेयरमैन के मार्गदर्शन में तैयार कर बोर्ड के सामने रखी जाती है। ऑडिट में ये गंभीर बात सामने आई कि रिपोर्ट पेश करते समय कुछ अहम जानकारियां और चेयरमैन के खुद के कामकाज (परफॉर्मेंस) से जुड़ा डाटा बोर्ड के सामने पूरी तरह जाहिर नहीं किया गया था। यानी बोर्ड के सामने कुछ तथ्य छुपाए जाने की बात पकड़ी गई।

Coforge चेयरमैन ओपी भट्ट ने इस्तीफा क्यों दिया?

ऑडिट के इन सवालों के बाद बोर्ड ने चेयरमैन ओपी भट्ट (OP Bhatt) से जवाब मांगा। बोर्ड अभी उनके जवाब की समीक्षा कर ही रहा था और कोई अंतिम फैसला नहीं लिया था कि ओपी भट्ट ने अपने पद से तुरंत प्रभाव से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने अपने ईमेल में लिखा कि उन्होंने जो भी किया वह पूरी ईमानदारी (Good Faith) से किया था। लेकिन जब बोर्ड मूल्यांकन प्रक्रिया को लेकर असहमति बन चुकी है, तो ऐसे माहौल में बोर्ड में बने रहना कंपनी के कामकाज के हित में नहीं होगा।

Coforge की कमान अब कौन संभालेगा?

चेयरमैन के अचानक हटने के बाद बोर्ड ने तुरंत स्थिति संभालने की कोशिश की है। नॉन-एग्जीक्यूटिव इंडिपेंडेंट डायरेक्टर विवेक शर्मा को 31 जनवरी 2027 तक के लिए कंपनी का अंतरिम चेयरमैन (Interim Chairperson) नियुक्त कर दिया गया है, ताकि रोजमर्रा के कामकाज और गवर्नेंस पर कोई असर न पड़े।

Coforge Ltd: मजबूत तिमाही नतीजों के बीच लगा गवर्नेंस का झटका

हैरानी की बात ये है कि कंपनी के बिजनेस फंडामेंटल्स मजबूत चल रहे थे। पहली तिमाही (Q1FY26) में कोफोर्ज का शुद्ध मुनाफा 63.7% बढ़कर ₹519 करोड़ रहा था और रेवेन्यू 49% उछलकर ₹5,527 करोड़ पहुंच गया था। हेल्थकेयर और इंश्योरेंस सेगमेंट में कंपनी की ग्रोथ मजबूत थी। लेकिन कॉर्पोरेट गवर्नेंस और बोर्डरूम विवाद ने इन मजबूत आंकड़ों पर पानी फेर दिया और निवेशकों ने रिस्क से बचने के लिए तेजी से बिकवाली शुरू कर दी।

डिस्क्लेमर: ये आर्टिकल सिर्फ सामान्य जानकारी और सूचना के उद्देश्य से है। इसे निवेश की सलाह न माना जाए। शेयर बाजार में निवेश जोखिमों के अधीन है। किसी भी निवेश या ट्रेड से पहले अपने फाइनेंशियल एडवाइजर से सलाह जरूर लें।