हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने स्कूलों के बुनियादी ढांचे के लिए फंड जारी करने में देरी पर सरकार को फटकार लगाई है। कोर्ट ने चेतावनी दी है कि अगर अगली सुनवाई तक फंड जारी नहीं हुआ तो शिक्षा सचिव को व्यक्तिगत रूप से पेश होना होगा।
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य के शिक्षा सचिव को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का निर्देश दिया है। यह आदेश तब लागू होगा, अगर राज्य सरकार स्कूल इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए फंड जारी करने के पिछले निर्देशों का पालन करने में विफल रहती है।
फंड में देरी पर हाईकोर्ट ने जताई नाराजगी
22 जुलाई को अतुल भारद्वाज बनाम हिमाचल प्रदेश राज्य व अन्य की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश जीएस संधावालिया और न्यायमूर्ति बिपिन सी नेगी की खंडपीठ ने 21 जुलाई, 2026 के एक पत्र पर गौर किया। इस पत्र में कोर्ट को बताया गया कि 3,003.94 लाख रुपये (30.04 करोड़ रुपये) का प्रस्ताव योजना विभाग को भेजा गया है। हालांकि, फंड की नई मांग के बावजूद, योजना विभाग ने कुछ सवाल उठाते हुए प्रस्ताव को शिक्षा सचिव को वापस लौटा दिया, जिनका विभाग फिलहाल समाधान कर रहा है।
शिक्षा सचिव को व्यक्तिगत पेशी का आदेश
हाईकोर्ट ने यह देखते हुए कि उसके 2 जून, 2026 के आदेश का अभी तक पालन नहीं हुआ है, इस देरी पर असंतोष व्यक्त किया। बेंच ने साफ किया कि अगर अगली सुनवाई की तारीख तक आवश्यक कार्रवाई पूरी नहीं होती है, तो हिमाचल प्रदेश सरकार के शिक्षा सचिव को व्यक्तिगत रूप से अदालत के सामने पेश होना होगा। मामले की अगली सुनवाई 7 सितंबर, 2026 को तय की गई है।
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश हुईं याचिकाकर्ता की वकील नित्या शर्मा ने दलील दी कि कोर्ट के पिछले निर्देशों के बावजूद, आदेश का पालन नहीं किया गया है, क्योंकि फंड जारी करने का प्रस्ताव योजना विभाग के पास लंबित है। राज्य सरकार का प्रतिनिधित्व अतिरिक्त महाधिवक्ता गोबिंद कोरला ने किया, जबकि भारत संघ का प्रतिनिधित्व डिप्टी सॉलिसिटर जनरल बलराम शर्मा और सहायक वकील राजीव शर्मा ने किया। (एएनआई)
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