Bihar Flood Situation: सरकारी आंकड़े भले ही बिहार में गंगा का जलस्तर घटने की बात कह रहे हों, लेकिन बाढ़ प्रभावित इलाकों में ज़मीनी हकीकत कुछ और ही है। बिहार और उत्तर प्रदेश में हालात अब भी गंभीर बने हुए हैं। कई ज़रूरी हाइवे पानी में डूबे हैं और बिहार में बाढ़ की वजह से अब तक पांच लोगों की जान जा चुकी है।
Bhagalpur Flood: उत्तर प्रदेश और बिहार में गंगा के बढ़ते जलस्तर ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, शनिवार सुबह बिहार के कई इलाकों में गंगा और दूसरी नदियों का जलस्तर नीचे आया है, लेकिन कई जगहों पर बाढ़ जैसे हालात अब भी बने हुए हैं। सड़कों पर पानी भरने से आवागमन प्रभावित है, जबकि निचले इलाकों में रहने वाले लोगों की मुश्किलें कम नहीं हुई हैं।
बिहार में कई जगह गंगा का जलस्तर घटा, लेकिन खतरा बरकरार
बिहार जल संसाधन विभाग के सुबह 6 बजे के आंकड़ों के अनुसार, गंगा का जलस्तर इलाहाबाद, वाराणसी, बक्सर, दीघाघाट, गांधीघाट, हथीदह, सुल्तानगंज और भागलपुर में नीचे आया है। इसी तरह पुनपुन नदी के फतेहपुर और श्रीपालपुर तथा सोन नदी के मनेर में भी जलस्तर में कमी दर्ज की गई। हालांकि, कोइलवर में सोन नदी का जलस्तर 0.01 मीटर बढ़ा है। आंकड़ों में मामूली गिरावट के बावजूद कई इलाकों में पानी का असर अब भी साफ दिखाई दे रहा है।
भागलपुर में NH-80 और फोर-लेन सड़क डूबी
भागलपुर में गंगा के उफान का असर सड़कों पर भी पड़ा है। NH-80 और एक फोर-लेन सड़क का हिस्सा पानी में डूब गया है। स्थिति को देखते हुए पुलिस और प्रशासन ने बैरिकेडिंग कर रास्ते को दोनों ओर से बंद कर दिया है।
सुल्तानगंज-भागलपुर मार्ग पर सफर करने वाले स्थानीय निवासी विनोद ठाकुर ने स्थिति की गंभीरता बताते हुए कहा कि उन्होंने अपनी जिंदगी में पहली बार इतना पानी देखा है। गंगा का जलस्तर बढ़ने से स्थानीय लोगों में चिंता बनी हुई है।
भागलपुर में डूबने से पांच लोगों की मौत
बाढ़ और जलभराव के बीच भागलपुर जिले से दर्दनाक खबर भी सामने आई है। अधिकारियों और स्थानीय लोगों के मुताबिक, कोयली खुटाहा गांव में पानी से भरे गड्ढों में डूबने से पांच लोगों की मौत हो गई। मृतकों में चार बच्चे शामिल हैं। इस घटना के बाद इलाके में मातम पसरा हुआ है। लगातार बढ़े पानी के बीच प्रशासन की ओर से लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है।
उत्तर प्रदेश के कई इलाकों में भी बाढ़ जैसे हालात
बिहार के साथ उत्तर प्रदेश के कई हिस्से भी गंगा के बढ़े जलस्तर से प्रभावित हैं। मुरादाबाद में स्थिति गंभीर बनी हुई है। यहां गेगासो घाट स्थित श्मशान घाट तक पानी पहुंच गया है, जिससे लोगों को अंतिम संस्कार करने में भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार शव का अंतिम संस्कार खुले स्थान पर करना पड़ रहा है और बाद में उसे उसी इलाके में ले जाकर विसर्जित किया जा रहा है। जलभराव ने सामान्य जनजीवन को भी प्रभावित किया है।
घरों में पानी घुसने का डर, आवाजाही भी प्रभावित
कई इलाकों में पानी भरने से लोगों के सामने आने-जाने की समस्या खड़ी हो गई है। स्थानीय लोगों के मुताबिक, अगर जलस्तर इसी तरह बढ़ता रहा तो जल्द ही पानी घरों के अंदर पहुंच सकता है। लोगों का कहना है कि जलभराव के कारण रोजमर्रा के काम प्रभावित हो रहे हैं और कई जगहों पर आवागमन करना मुश्किल हो गया है।
वाराणसी में नगर निगम ने ड्रेनेज व्यवस्था को लेकर क्या कहा?
वाराणसी में नगर निगम के अधिकारियों का कहना है कि शहर का ड्रेनेज नेटवर्क बारिश के पानी का दबाव संभालने के लिए तैयार है। नगर निगम के PRO संदीप श्रीवास्तव के मुताबिक, वाराणसी में करीब 1300 किलोमीटर लंबी ड्रेनेज लाइनें और लगभग 400 छोटे-बड़े नाले हैं।
उन्होंने बताया कि जलभराव से निपटने के लिए ड्रेनेज सिस्टम की नियमित सफाई की जाती है और जरूरत के मुताबिक अलग-अलग इलाकों में अतिरिक्त व्यवस्था भी की जा रही है।
भारी बारिश के बाद भी पानी निकालने का दावा
नगर निगम के अधिकारी ने कहा कि भारी बारिश के बाद भी कई इलाकों में सड़कों से पानी करीब आधे घंटे में निकालने का प्रयास किया जा रहा है। इसके लिए इंजीनियर और कर्मचारी मौके पर उतरकर जलनिकासी का काम कर रहे हैं।
हालांकि बिहार और उत्तर प्रदेश के कई इलाकों में बाढ़ जैसे हालात के बीच लोगों की मुश्किलें अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं। ऐसे में नदियों के जलस्तर और मौसम की स्थिति पर लगातार नजर बनी हुई है।
