India BRICS Presidency 2026: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत की अध्यक्षता में नई दिल्ली में हो रहे 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में नेताओं का स्वागत किया। उन्होंने इथियोपिया और मलेशिया के प्रधानमंत्रियों के साथ द्विपक्षीय बैठकें भी कीं, जिनमें रक्षा, निवेश और संबंधों को मजबूत करने पर चर्चा हुई।
PM Modi BRICS Meeting: नई दिल्ली के भारत मंडपम में शनिवार को 18वें BRICS शिखर सम्मेलन की अहम बैठकें शुरू हुईं। भारत की अध्यक्षता में आयोजित इस सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्राजील के विदेश मंत्री माउरो विएरा का स्वागत किया। इसके अलावा उन्होंने इथियोपिया के प्रधानमंत्री अबिय अहमद अली, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियन, अबू धाबी के क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान और इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो का भी स्वागत किया। इस दौरान विदेश मंत्री एस. जयशंकर भी प्रधानमंत्री मोदी के साथ मौजूद रहे। BRICS नेताओं की बैठक में वैश्विक शासन व्यवस्था को अधिक समावेशी बनाने और बहुपक्षवाद को मजबूत करने पर चर्चा होगी।
भारत मंडपम में क्या है BRICS Summit का एजेंडा?
BRICS Summit 2026 के दौरान सदस्य देशों के नेता ‘समावेशी वैश्विक शासन और बहुपक्षवाद को मजबूत करने’ के मुद्दे पर बंद कमरे में बैठक करेंगे। इसके अलावा प्रतिनिधि ‘भारत इनोवेट्स प्रदर्शनी’ का भी दौरा करेंगे, जिसमें देश की तकनीकी और नवाचार क्षमता को प्रदर्शित किया जा रहा है।
भारत 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में 18वें BRICS शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है। इस साल भारत की अध्यक्षता का विषय “Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability” है। इसका फोकस वैश्विक चुनौतियों के बीच विकास, नवाचार, सहयोग और स्थिरता को बढ़ावा देने पर है।
BRICS में 11 देश, ग्लोबल साउथ पर जोर
BRICS दुनिया की प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाओं के बीच सहयोग बढ़ाने वाला महत्वपूर्ण मंच बन चुका है। इसके एजेंडे में विकास, वित्त, व्यापार, तकनीक और लोगों के बीच संपर्क जैसे मुद्दे शामिल हैं। वर्तमान में BRICS में ब्राजील, चीन, मिस्र, इथियोपिया, भारत, इंडोनेशिया, ईरान, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका और UAE शामिल हैं। समूह के विस्तार के साथ इसकी भूमिका भी बढ़ी है। भारत का जोर BRICS के जरिए ग्लोबल साउथ के हितों को मजबूत करने और वैश्विक संस्थाओं में सुधार की जरूरत को सामने रखने पर है।
दुनिया की बदलती परिस्थितियों के बीच भारत की अध्यक्षता
भारत को BRICS की अध्यक्षता ऐसे समय मिली है जब वैश्विक अर्थव्यवस्था में अनिश्चितता, तकनीकी बदलाव, भू-राजनीतिक तनाव, जलवायु परिवर्तन और संसाधनों पर बढ़ता दबाव बड़ी चुनौतियां बने हुए हैं। ऐसे समय में BRICS देशों के बीच विकास, जलवायु कार्रवाई, ऊर्जा, तकनीक और वित्तीय स्थिरता पर सहयोग बढ़ाने की कोशिश की जा रही है। भारत की अध्यक्षता का उद्देश्य समूह के बढ़े हुए प्रतिनिधित्व को ठोस सहयोग और व्यावहारिक परिणामों में बदलना है। इसके साथ ही भारत अलग-अलग सदस्य देशों के हितों के बीच सहमति बनाने और मौजूदा बहुपक्षीय व्यवस्थाओं को ज्यादा प्रभावी बनाने पर भी जोर दे रहा है।
इथियोपिया के पीएम से मोदी की अहम मुलाकात
BRICS Summit के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इथियोपिया के प्रधानमंत्री अबिय अहमद अली से भी मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच रक्षा, क्षमता निर्माण, निवेश, महत्वपूर्ण खनिज, स्वच्छ ऊर्जा और स्वास्थ्य सेवा जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। पीएम मोदी ने कहा कि भारत और इथियोपिया अपनी पुरानी दोस्ती को नए क्षेत्रों तक ले जा रहे हैं। उन्होंने भारत-अफ्रीका संबंधों को मजबूत करने और ग्लोबल साउथ की आवाज को मजबूती देने पर भी जोर दिया।
मलेशिया के साथ रक्षा और निवेश पर बातचीत
प्रधानमंत्री मोदी ने मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम के साथ भी द्विपक्षीय बैठक की। इस दौरान दोनों देशों के बीच बढ़ते रक्षा सहयोग और द्विपक्षीय निवेश की प्रगति पर चर्चा हुई। BRICS Summit के दौरान हो रही इन द्विपक्षीय बैठकों से साफ है कि भारत सम्मेलन को केवल बहुपक्षीय चर्चा तक सीमित नहीं रख रहा, बल्कि अलग-अलग देशों के साथ आर्थिक, रक्षा और रणनीतिक सहयोग को भी आगे बढ़ाने पर जोर दे रहा है।
BRICS Summit से भारत को क्या उम्मीदें?
भारत की अध्यक्षता में हो रहा यह सम्मेलन ऐसे समय में महत्वपूर्ण है, जब BRICS का दायरा पहले के मुकाबले काफी बढ़ चुका है। भारत के सामने चुनौती यह है कि अलग-अलग राजनीतिक और आर्थिक प्राथमिकताओं वाले देशों को साझा एजेंडे पर साथ लाया जाए।
नई दिल्ली में हो रही बैठक से विकास, नवाचार, ऊर्जा, तकनीक और वैश्विक संस्थागत सुधार जैसे मुद्दों पर ठोस सहयोग की दिशा तय होने की उम्मीद है। साथ ही, भारत BRICS के मंच से ग्लोबल साउथ की भूमिका को और मजबूत करने की कोशिश कर रहा है।
