IAS VS judge : यूपी की चर्चित IAS अफसर दुर्गा शक्ति नागपाल एक बार फिर सुर्खियों में हैं। इस बार मामला गोंडा में करीब 30 साल से अटके एक सरकारी जमीन विवाद से जुड़ा है। बताया जा रहा है कि इस केस को लेकर IAS दुर्गा शक्ति और जज शबीना खान आमने सामने आ गई हैं।
नई दिल्ली : उत्तर प्रदेश के गोंडा में सरकार की एक जमीन का मामला करीब 30 साल से फंसा हुआ है। अब यूपी सरकार इस सिविल केस की सुनवाई में तेजी लाने और इसे असरदार तरीके से आगे बढ़ाने की कोशिश कर रही है। यह जमीन सरकारी रिकॉर्ड में 'नजूल भूमि' के तौर पर दर्ज है और इसे कमिश्नर ऑफिस की बिल्डिंग बनाने के लिए रिजर्व रखा गया है। इलाहाबाद हाईकोर्ट में पेश कमिश्नर की रिपोर्ट के मुताबिक, इस जमीन पर अवैध तरीके से एक स्कूल की बिल्डिंग बना दी गई है, जबकि इसके मालिकाना हक का विवाद 1997 से सिविल कोर्ट में चल रहा है।
जब सालों पुराने केस में हुई कमिश्नर दुर्गा शक्ति की एंट्री
इस पूरे मामले में देवीपाटन मंडल की कमिश्नर दुर्गा शक्ति नागपाल की एंट्री तब हुई, जब उन्होंने 21 अप्रैल, 2026 को अपना पद संभाला। एक जनसुनवाई के दौरान उन्हें इस पुराने विवाद के बारे में पता चला। इसके बाद उन्होंने संबंधित सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट (SDM), नगर पालिका के अधिकारियों, राजस्व विभाग और सरकारी वकील को निर्देश दिए कि वे इस मामले पर करीब से नजर रखें और राज्य सरकार का पक्ष मजबूती से रखें।
IAS पर जज शबीना खान पर दबाव बनाने का आरोप
बता दें कि इस पूरे मामले में आईएएस दुर्गा नागपाल पर आरोप है कि उन्होंने सिविल जज शबीना खान को फोन करके प्रशासनिक दबाव बनाने, अनुचित टिप्पणी करने और पद का दुरुपयोग करने का प्रयास किया। इतना ही नहीं इसको लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने न्यायमूर्ति सैयद कमर हसन रिजवी की अदालत के माध्यम से मामले को आपराधिक अवमानना योग्य माना है
"बेहद कीमती सरकारी नजूल जमीन"
- दुर्गा शक्ति नागपाल ने अपने बयान में कहा कि यह मामला 1997 से अटका हुआ है और यह "बेहद कीमती सरकारी नजूल जमीन" से जुड़ा है। उन्होंने बताया कि मौजूद रिकॉर्ड्स से पता चलता है कि 1985 में जमीन की लीज रद्द होने और सरकारी नाम पर दर्ज होने के बावजूद, 2008 से एक साधारण कागज के टुकड़े के आधार पर इसे लीज पर दिखाया जा रहा है, जिसका कोई कानूनी दस्तावेज नहीं है।
- उन्होंने आगे बताया कि इस जमीन पर एक प्राइवेट स्कूल चलाया जा रहा है। नागपाल के मुताबिक, जब उन्हें इस पुराने विवाद का पता चला, तो उनका मकसद सिर्फ सरकारी जमीन को बचाना और कोर्ट में चल रहे मुकदमे में सरकार का पक्ष मजबूती से रखवाना था।
- कमिश्नर ने केस की प्रगति पर अपडेट भी मांगा और मामले के जल्द निपटारे के लिए जिला जज से भी संपर्क किया. रिकॉर्ड के मुताबिक, उन्होंने 15 जुलाई और फिर 3 अगस्त, 2026 को जिला जज से केस का जल्द निपटारा करने के लिए कदम उठाने का अनुरोध किया. इसके बाद जिला जज ने इस मुकदमे को संबंधित कोर्ट से उतनी ही क्षमता वाली दूसरी कोर्ट में ट्रांसफर कर दिया, जहां अब इसकी सुनवाई चल रही है।
जब कोर्ट के अधिकारी को नागपाल ने दी सफाई
- वनागपाल ने संबंधित कोर्ट की presiding officer (पीठासीन अधिकारी) से फोन पर हुई बातचीत को लेकर भी सफाई दी। उन्होंने कहा कि जब यह जानकारी नहीं मिल पा रही थी कि अधिकारी छुट्टी से कब लौटेंगी या उनकी छुट्टी आगे बढ़ेगी, तो उन्होंने सिर्फ यह पता करने के लिए फोन किया था कि उनके वापस आने की उम्मीद कब तक है।
- उन्होंने साफ किया कि फोन पर केस के मेरिट, किसी आदेश या फैसले, या केस नंबर और नाम को लेकर कोई बात नहीं हुई. उन्होंने यह भी बताया कि पीठासीन अधिकारी के पत्र में यह नहीं लिखा है कि कमिश्नर ने केस पर उसके नाम या नंबर से चर्चा की।


