संसद में FCRA और परिसीमन जैसे अहम बिलों को लेकर सस्पेंस बना हुआ है. इस बीच विपक्ष ने अपना रुख कड़ा कर लिया है. नेता वेणुगोपाल ने साफ कहा है कि बिल को जॉइंट पार्लियामेंट्री कमेटी (JPC) में भेजने का प्रस्ताव मंजूर नहीं है और सरकार को इसे वापस लेना ही होगा.

संसद के गलियारों में इस वक्त कुछ अहम बिलों को लेकर भारी गहमागहमी है. ख़बरों के मुताबिक, सरकार और विपक्ष के बीच FCRA और परिसीमन जैसे बिलों पर किसी 'गिव एंड टेक' यानी लेन-देन वाले समझौते की अटकलें लगाई जा रही थीं. लेकिन विपक्ष के ताज़ा रुख ने इन अटकलों पर एक तरह से पानी फेर दिया है.

विपक्ष ने इन बिलों पर नरमी दिखाने के कोई संकेत नहीं दिए हैं. उल्टे, विपक्ष के नेता वेणुगोपाल ने एक प्रस्तावित बिल को लेकर सरकार के सामने अपनी मांग दो टूक शब्दों में रख दी है. उन्होंने इस बिल को जॉइंट पार्लियामेंट्री कमेटी (JPC) को भेजने के प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया है.

विपक्ष का एक ही स्टैंड- बिल वापस लो

विपक्षी खेमे का इरादा बिल्कुल साफ़ है कि वो किसी भी तरह के आधे-अधूरे समाधान के लिए तैयार नहीं है. वेणुगोपाल का बयान इसी रणनीति का हिस्सा लगता है. JPC को प्रस्ताव भेजने से इनकार करने का सीधा मतलब है कि विपक्ष बिल पर चर्चा या संशोधन से आगे की मांग कर रहा है.

उन्होंने अपने बयान में स्पष्ट कहा कि सरकार को यह बिल वापस लेना ही होगा. यह बयान बताता है कि विपक्ष अब किसी भी तरह के बीच के रास्ते के मूड में नहीं है. ज़ाहिर है, इस कड़े रुख के बाद सरकार के लिए राह आसान नहीं होगी.

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FCRA और परिसीमन बिलों का भविष्य क्या?

हालांकि वेणुगोपाल ने अपने बयान में किसी खास बिल का नाम नहीं लिया, लेकिन इसे FCRA और परिसीमन जैसे विवादित बिलों के संदर्भ में ही देखा जा रहा है. इन्हीं बिलों को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच गतिरोध की स्थिति बनी हुई है. सरकार की कोशिश थी कि विपक्ष के साथ बातचीत कर इन बिलों को पास करा लिया जाए.

लेकिन अब विपक्ष की तरफ से आई इस सीधी मांग ने मामले को और उलझा दिया है. अब देखना यह होगा कि क्या सरकार विपक्ष के दबाव में झुकती है या फिर इन बिलों को पास कराने के लिए कोई और रास्ता निकालती है. फिलहाल, इन महत्वपूर्ण बिलों पर सस्पेंस पहले से कहीं ज़्यादा गहरा गया है.

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