PM Narendra Modi BRICS: रिपोर्ट्स के मुताबिक, ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के घोषणापत्र पर आम सहमति बनाने में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भूमिका अहम रही। मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति से बात की, जिसके बाद घोषणापत्र को लेकर ईरान अपने कड़े रुख से पीछे हट गया।

BRICS Summit mein PM Modi: ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के घोषणापत्र पर आम सहमति बनाने में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल को अहम माना जा रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, घोषणापत्र की भाषा को लेकर कुछ देशों के बीच मतभेद बने हुए थे, जिन्हें दूर करने के लिए भारत ने सक्रिय भूमिका निभाई। बताया जा रहा है कि पीएम मोदी की ईरान के राष्ट्रपति के साथ बातचीत के बाद कई मुद्दों पर सहमति बनने का रास्ता साफ हुआ।

अमेरिका-इजरायल हमले के जिक्र को लेकर अड़ा था ईरान

रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान की मांग थी कि ब्रिक्स घोषणापत्र में अमेरिका और इजरायल के हमलों का स्पष्ट रूप से उल्लेख किया जाए। इस मुद्दे पर सहमति बनना मुश्किल हो रहा था। हालांकि, बातचीत के बाद ईरान ने अपने रुख में नरमी दिखाई, जिसके बाद साझा घोषणापत्र को अंतिम रूप देने की दिशा में प्रगति हुई।

पश्चिमी देशों के खिलाफ कड़े बयान से भारत ने बनाई दूरी

घोषणापत्र में अमेरिका और पश्चिमी देशों के खिलाफ बेहद आक्रामक भाषा इस्तेमाल करने की मांग को भी शामिल नहीं किया गया। भारत का रुख इस मुद्दे पर साफ बताया गया कि ब्रिक्स का उद्देश्य दुनिया को दो विरोधी गुटों में बांटना नहीं होना चाहिए।

भारत मौजूदा वैश्विक व्यवस्था में सुधार और विकासशील देशों की आवाज को मजबूत करने के पक्ष में है। माना जा रहा है कि इसी संतुलित सोच का असर घोषणापत्र की भाषा पर भी दिखाई दिया।

ब्रिक्स की साझा करेंसी का मुद्दा भी नहीं आया

रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि ब्रिक्स देशों की एक साझा करेंसी का जिक्र घोषणापत्र में शामिल नहीं किया गया। भारत का जोर वैश्विक आर्थिक व्यवस्था में सुधार, सहयोग बढ़ाने और सदस्य देशों के बीच मजबूत साझेदारी पर रहा, बजाय इसके कि किसी नए वैश्विक शक्ति गुट की तस्वीर पेश की जाए।

भारत-चीन रिश्तों पर पीएम मोदी के बयान की चर्चा

इस बीच भारत और चीन के संबंधों को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के रुख की चीनी मीडिया में भी काफी चर्चा हुई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, पीएम मोदी ने यह संदेश दिया कि भारत और चीन को एक-दूसरे का प्रतिद्वंद्वी नहीं, बल्कि साझेदार के रूप में आगे बढ़ना चाहिए।

दोनों देशों के बीच सहयोग और आपसी विश्वास बढ़ाने पर जोर दिए जाने की बात कही गई है। हालांकि, सीमा विवाद समेत कई अहम मुद्दे अभी भी दोनों देशों के रिश्तों में चुनौती बने हुए हैं।

भारत की जमीन चीन के खिलाफ इस्तेमाल नहीं होगी?

चीनी मीडिया की रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि प्रधानमंत्री मोदी ने भरोसा दिलाया कि भारत की जमीन का इस्तेमाल चीन के खिलाफ किसी भी गतिविधि के लिए नहीं होने दिया जाएगा। इस दावे को लेकर भारतीय पक्ष की आधिकारिक प्रतिक्रिया और दोनों देशों के औपचारिक बयानों का महत्व अहम माना जा रहा है।

सीमा विवाद सुलझाने के लिए प्रतिबद्ध भारत

चीनी विदेश मंत्रालय के हवाले से आई रिपोर्ट्स में कहा गया है कि भारत सीमा विवाद का समाधान निकालने के लिए प्रतिबद्ध है। दोनों देशों के बीच लंबे समय से सीमा को लेकर मतभेद रहे हैं और इसे द्विपक्षीय संबंधों की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक माना जाता है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत ने यह भी संकेत दिया कि दूसरे देशों के साथ उसके संबंधों का असर चीन के साथ द्विपक्षीय रिश्तों पर नहीं पड़ना चाहिए। ऐसे में ब्रिक्स मंच पर हुई बातचीत ने भारत-चीन संबंधों को लेकर एक बार फिर नई चर्चा शुरू कर दी है।37 व