Ramdevra Mela 2026: हमारे देश में अनेक लोक देवताओं की मान्यता है, बाबा रामदेव भी इनमें से एक हैं। बाबा रामदेव को सिर्फ धार्मिक आस्था से ही नहीं, बल्कि सामाजिक समानता के संदेश के लिए भी याद किया जाता है।

Ramdev Jayanti 2026 Date: राजस्थान के प्रसिद्ध लोकदेवता बाबा रामदेव की जयंती इस साल 13 सितंबर, रविवार को मनाई जाएगी। बाबा रामदेव को राजस्थान में बेहद श्रद्धा के साथ पूजा जाता है। उनकी समाधि राजस्थान के जैसलमेर जिले के रामदेवरा में स्थित है। हर साल बाबा रामदेव के प्राकट्य दिवस पर यहां बड़ा मेला लगता है, जिसमें देशभर से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। कई भक्त तो पैदल यात्रा करके रामदेवरा पहुंचते हैं।

कौन थे बाबा रामदेव?

भारत में कई ऐसे लोकदेवता हुए हैं, जिनके प्रति लोगों की गहरी आस्था है। राजस्थान के बाबा रामदेव भी इन्हीं में से एक हैं। उन्हें रामसा पीर के नाम से भी जाना जाता है। हिंदू धर्म के अनुयायी उन्हें बाबा रामदेव के रूप में पूजते हैं, वहीं मुस्लिम समाज में भी उनके प्रति विशेष श्रद्धा देखने को मिलती है। मान्यता है कि बाबा रामदेव ने अपना पूरा जीवन जरूरतमंदों की मदद और समाज में फैली कुरीतियों को दूर करने के लिए समर्पित किया था।

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जानें बाबा रामदेव की जन्म और जीवन कथा

लोक मान्यताओं के अनुसार बाबा रामदेव का जन्म 14वीं शताब्दी में तंवर राजपूत परिवार में हुआ था। उनके पिता का नाम अजमलजी और माता का नाम मैणादे बताया जाता है। कहा जाता है कि उनका परिवार पहले जैसलमेर के वारूछांह गांव में रहता था और बाद में रुणीचा आकर बस गया। बाबा रामदेव के गुरु ऋषि बालीनाथ माने जाते हैं। उन्हें महान तपस्वी और सिद्ध पुरुष बताया गया है। बाबा रामदेव का विवाह अमरकोट के राजा दलजी सोढ़ा की पुत्री नेतलदे से हुआ था।

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समाज सुधार के लिए किए कईं काम

बाबा रामदेव ने अपने जीवन में लोगों की सेवा और समाज सुधार के कई काम किए। इसी वजह से धीरे-धीरे उनकी प्रसिद्धि दूर-दूर तक फैल गई। भक्त उन्हें दिव्य शक्तियों से संपन्न मानते हैं। कुछ धार्मिक मान्यताओं में बाबा रामदेव को भगवान श्रीकृष्ण का अवतार भी माना गया है। उन्होंने जात-पात, छुआछूत और भेदभाव जैसी सामाजिक बुराइयों का विरोध किया। उन्होंने सभी लोगों को समान मानने और जरूरतमंदों की मदद करने का संदेश दिया।

राक्षस के आतंक से लोगों को दिलाई मुक्ति

बाबा रामदेव से जुड़ी कई लोक कथाएं राजस्थान में प्रचलित हैं। ऐसी ही एक मान्यता के अनुसार, पुराने समय में पोकरण क्षेत्र में भैरव नाम के राक्षस का आतंक था। उसके डर से लोग काफी परेशान रहते थे। जब बाबा रामदेव को इस बारे में पता चला तो वे पोकरण पहुंचे। मान्यता है कि उन्होंने अपनी शक्ति से उस राक्षस को उत्तर दिशा में स्थित एक पहाड़ी की गुफा में बंद कर दिया। इसके बाद लोगों को उसके आतंक से मुक्ति मिली। इस घटना के बाद बाबा रामदेव की प्रसिद्धि और भी बढ़ गई और लोग उन्हें चमत्कारी एवं अवतारी पुरुष मानने लगे।