दिल्ली सरकार की ‘वयो आनंद’ योजना में 60+ वरिष्ठ नागरिकों के लिए योग, खेल, किताबें और हेल्थ कैंप वाले केंद्र बनेंगे। पात्र केंद्रों को ₹2.40 लाख सालाना मिलेंगे।
दिल्ली सरकार वरिष्ठ नागरिकों के लिए ‘वयो आनंद’ योजना शुरू करने जा रही है। इसका मकसद सिर्फ बुजुर्गों को बैठने की जगह देना नहीं, बल्कि उन्हें सक्रिय, स्वस्थ और सामाजिक रूप से जुड़ा रखने के लिए आसपास ही एक सुविधाजनक मंच तैयार करना है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के मुताबिक, दिल्ली के वरिष्ठ नागरिक परिवार, समाज और परंपराओं की अहम धरोहर हैं। इसलिए उनके सम्मान, स्वास्थ्य और सक्रिय जीवनशैली को ध्यान में रखते हुए ऐसे केंद्र विकसित किए जाएंगे, जहां वे खाली समय को उपयोगी और खुशहाल तरीके से बिता सकें।
दिल्ली सरकार के 2026-27 बजट में ‘वयो आनंद’ योजना के लिए ₹25 करोड़ का प्रावधान किया गया है। आधिकारिक बजट दस्तावेज में भी वरिष्ठ नागरिकों के लिए मनोरंजक गतिविधियों का मंच उपलब्ध कराने की बात कही गई है।
Vayo Anand Scheme: बुजुर्गों के लिए बनेंगे सुविधाजनक केंद्र
‘वयो आनंद’ के तहत ऐसे केंद्र विकसित किए जाएंगे, जहां 60 वर्ष और उससे अधिक उम्र के वरिष्ठ नागरिक मिल-जुलकर समय बिता सकेंगे। यहां योग और ध्यान से लेकर इनडोर गेम्स तथा रचनात्मक गतिविधियों तक की व्यवस्था होगी। केंद्रों में कैरम, लूडो जैसे खेलों के साथ किताबें, समाचार पत्र और पत्रिकाएं उपलब्ध कराने की योजना है। वरिष्ठ नागरिकों के लिए योग, मेडिटेशन, फिटनेस और अन्य गतिविधियां भी कराई जाएंगी। इसका एक अहम पहलू सामाजिक जुड़ाव है। उम्र बढ़ने के साथ कई बुजुर्गों का सामाजिक दायरा छोटा हो जाता है। ऐसे में पड़ोस में ही मिलने-जुलने की जगह मिलना उनके लिए काफी उपयोगी साबित हो सकता है।
Senior Citizen Scheme: हर महीने स्वास्थ्य शिविर, अस्पताल से भी कनेक्शन
‘वयो आनंद’ केंद्रों में मनोरंजन के साथ स्वास्थ्य को भी महत्व दिया जाएगा। मासिक हेल्थ कैंप आयोजित किए जाने की व्यवस्था बताई गई है। आपात स्थिति से निपटने के लिए इन केंद्रों को आसपास के अस्पतालों और पुलिस थानों के साथ समन्वित किया जाएगा। यानी योजना का फोकस केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि बुजुर्गों के लिए सुरक्षित और सहायक माहौल बनाने पर भी रहेगा। पहले सामने आई योजना की रूपरेखा में स्वास्थ्य जांच, प्राथमिक चिकित्सा किट और योग जैसी सुविधाओं का भी उल्लेख था।
Delhi Vayo Anand Yojana: पात्र केंद्रों को ₹2.40 लाख सालाना सहायता
सरकार की मौजूदा योजना के मुताबिक, जिन केंद्रों में कम से कम 200 सदस्य 60 वर्ष या उससे अधिक उम्र के होंगे, उन्हें सालाना ₹2.40 लाख की वित्तीय सहायता दी जाएगी। यानी यह सहायता औसतन ₹20,000 प्रति माह के बराबर है। महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के साथ-साथ दिव्यांग और ट्रांसजेंडर वरिष्ठ नागरिकों के लिए भी विशेष गतिविधियों पर ध्यान दिया जाएगा। इससे योजना को ज्यादा समावेशी बनाने की कोशिश है। रिपोर्टों के मुताबिक, केंद्रों में सालभर विशेष कार्यक्रम, सामाजिक गतिविधियां और स्वास्थ्य संबंधी आयोजन भी रखे जा सकते हैं।
RWA और सामुदायिक जगहों की हो सकती है अहम भूमिका
योजना को स्थानीय स्तर तक पहुंचाने में Resident Welfare Associations (RWAs), सामुदायिक समूहों और वरिष्ठ नागरिक संगठनों की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है। अप्रैल में सामने आई योजना की शुरुआती जानकारी में RWAs, को-ऑपरेटिव ग्रुप हाउसिंग सोसाइटी और वरिष्ठ नागरिकों के लिए काम करने वाले NGOs को केंद्र चलाने से जोड़ने की बात कही गई थी। उस समय करीब ₹3-4 लाख की सहायता और न्यूनतम 50 सदस्यों की पात्रता का प्रस्ताव बताया गया था।
अब सामने आए ताजा विवरण में 200 वरिष्ठ नागरिक सदस्यों और ₹2.40 लाख सालाना सहायता का प्रावधान बताया गया है। इसलिए आवेदन से जुड़ी अंतिम शर्तों के लिए दिल्ली सरकार की आधिकारिक अधिसूचना को आधार माना जाना बेहतर होगा।
Delhi Budget 2026-27: सामाजिक कल्याण पर सरकार का फोकस
‘वयो आनंद’ योजना को दिल्ली सरकार ने अपने व्यापक सामाजिक कल्याण एजेंडे का हिस्सा बनाया है। 2026-27 के बजट में सामाजिक कल्याण क्षेत्र के लिए ₹2,392 करोड़ का प्रस्ताव रखा गया है। इसके अलावा SC/ST/OBC समुदायों के कल्याण के लिए ₹227 करोड़ और अनुसूचित जाति बस्तियों के सुधार के लिए ₹80 करोड़ का प्रावधान किया गया है।
इस लिहाज से ‘वयो आनंद’ को केवल एक मनोरंजन योजना के तौर पर देखना पूरी तस्वीर नहीं होगी। इसका उद्देश्य बुजुर्गों को सामाजिक जीवन में सक्रिय बनाए रखना, उनके स्वास्थ्य पर ध्यान देना और उन्हें समुदाय के बीच सम्मानजनक माहौल देना है।
बुजुर्गों के अकेलेपन को कम करना भी बड़ी चुनौती
दिल्ली जैसे महानगर में परिवारों की जीवनशैली तेजी से बदल रही है। कामकाजी परिवारों में दिन के समय बुजुर्गों के पास बातचीत और सामुदायिक गतिविधियों के अवसर कम हो सकते हैं। ऐसे में स्थानीय स्तर पर बने ये केंद्र अकेलेपन को कम करने में मदद कर सकते हैं। लेकिन योजना की असली सफलता केंद्र खोलने से आगे तय होगी। नियमित संचालन, पर्याप्त सुविधाएं, स्वास्थ्य सेवाओं से वास्तविक समन्वय और बुजुर्गों की लगातार भागीदारी—इन सब पर नजर रखनी होगी।
अगर ये केंद्र सिर्फ कागज पर नहीं, बल्कि रोजमर्रा की जिंदगी में सक्रिय रहे, तो ‘वयो आनंद’ दिल्ली के वरिष्ठ नागरिकों के लिए एक उपयोगी सामुदायिक मॉडल बन सकता है।


