मुख्यमंत्री मोहन यादव ने द्वारकाधीश मंदिर में दर्शन के बाद देश में बढ़ते धार्मिक पर्यटन पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि महाकाल लोक बनने के बाद उज्जैन में श्रद्धालुओं की संख्या 20 गुना बढ़ी है और धार्मिक स्थलों पर सुविधाएं बढ़ाई जा रही हैं।
भारत में धार्मिक पर्यटन अब सिर्फ आस्था का विषय नहीं रहा, बल्कि यह स्थानीय अर्थव्यवस्था, बुनियादी ढांचे और रोजगार से भी जुड़ता जा रहा है। इसी कड़ी में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गुजरात के द्वारका पहुंचकर धार्मिक पर्यटन के बढ़ते दायरे और तीर्थ स्थलों पर सुविधाओं के विकास को लेकर सरकार की प्राथमिकताएं बताईं।
द्वारकाधीश मंदिर में परिवार के साथ किए दर्शन
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गुरुवार को सपरिवार Dwarkadhish Temple पहुंचकर भगवान श्री द्वारकाधीश के दर्शन किए और विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। उन्होंने प्रदेशवासियों के सुख, समृद्धि और कल्याण की कामना की। इस दौरान उनकी पत्नी सीमा यादव, अन्य परिजन और मुख्यमंत्री कार्यालय के सचिव डॉ. इलैया राजा टी. भी मौजूद रहे। जन्माष्टमी से पहले मुख्यमंत्री ने देश और प्रदेशवासियों को भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव की शुभकामनाएं भी दीं।
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महाकाल लोक के बाद 20 गुना बढ़ी श्रद्धालुओं की संख्या
मीडिया से बातचीत में मुख्यमंत्री यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में देशभर के प्रमुख धार्मिक स्थलों पर पर्यटन सुविधाओं का विस्तार हो रहा है। उन्होंने दावा किया कि उज्जैन में Mahakal Lok बनने के बाद श्रद्धालुओं की संख्या करीब 20 गुना बढ़ी है और वर्तमान में लगभग 10 करोड़ से अधिक तीर्थ यात्री उज्जैन पहुंच रहे हैं। उन्होंने उज्जैन के बाद काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के विकास का भी उल्लेख किया और कहा कि ऐसे प्रोजेक्ट धार्मिक पर्यटन को नई गति दे रहे हैं।
धार्मिक स्थलों पर सुविधाएं बढ़ाने पर जोर
मुख्यमंत्री ने द्वारका को आदि शंकराचार्य द्वारा स्थापित सनातन संस्कृति के चार धामों में प्रमुख तीर्थ बताते हुए कहा कि जन्माष्टमी से पहले द्वारकाधीश के दर्शन करना सौभाग्य की बात है। उन्होंने मंदिर की व्यवस्थाओं का जायजा लेने की बात भी कही। मध्य प्रदेश में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए सरकार प्रमुख देवस्थानों पर बेहतर आवागमन, श्रद्धालुओं के ठहरने, सुरक्षा और जरूरी अधोसंरचना विकसित करने पर जोर दे रही है। मुख्यमंत्री के मुताबिक, सरकार का उद्देश्य धार्मिक स्थलों को सुविधाजनक बनाना और भारतीय संस्कृति की विरासत को नई पीढ़ी से जोड़ना है।
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