Career Growth Story: टियर-3 शहर के हिंदी मीडियम युवक ने बैकलॉग, PIP और लेऑफ के झटके झेलने की अपनी पूरी कहानी रेडिट पर शेयर की है। बताया कि 3.5 लाख से शुरू सफर के बाद अब 91 लाख के पैकेज तक कैसे पहुंचा। जानें पूरी कहानी।
Hindi Medium Success Story: टियर-3 शहर, हिंदी मीडियम और कॉलेज में बैकलॉग से शुरू हुआ सफर आज 91 लाख रुपये के पैकेज तक पहुंच चुका है। लेकिन इस कहानी में सफलता से ज्यादा दिलचस्प हैं वे ठोकरें, जिनसे निकलकर करियर ने नई दिशा पकड़ी। दरअसल reddit पर एक शख्स ने अपने करियर की शुरुआत से लेकर अबतक की कहानी शेयर की है, जो लोगों को प्रेरित कर रही है। जानिए पूरी डिटेल।
क्या सिर्फ अच्छी डिग्री से बनता है करियर?
शख्स ने बताया कि कॉलेज के दिनों में पढ़ाई इस की प्राथमिकता नहीं रही। चार साल फिल्मों और वेब सीरीज में निकल गए। नतीजा रहा बैकलॉग और ऐसे ग्रेड, जिन्हें सार्वजनिक तौर पर बताना शायद आसान न हो। हालांकि इसी दौर से एक ऐसी स्किल मिली, जिसने आगे चलकर नौकरी दिलाने में अहम भूमिका निभाई, अंग्रेजी। हिंदी मीडियम और छोटे शहर से आने के बावजूद फिल्मों और सीरीज के जरिए अंग्रेजी सुनने-समझने की आदत बनी। बोलने में फ्लुएंसी आई और शायद यही उनकी पहली नौकरी पाने की वजह भी बनी। प्लेसमेंट मिला, लेकिन किसी बड़े मास रिक्रूटर्स में नहीं।
पहली नौकरी में PIP ने बदल दी सोच
नौकरी शुरू हुई तो कॉलेज वाली लापरवाही साथ चली आई। पहले साल डांट पड़ी और दूसरे साल Performance Improvement Plan यानी PIP तक बात पहुंच गई। यही वह मोड़ था, जहां करियर को लेकर नजरिया बदलना शुरू हुआ। PIP से बाहर निकलने के बाद उन्होंने नौकरी अपनी शर्तों पर छोड़ी। इसके बाद फोकस डिग्री या सिर्फ नौकरी बचाने पर नहीं, बल्कि स्किल्स सीखने और डाटा को समझने पर रहा। अगले कुछ वर्षों में छह जॉब स्वीच किए और हर बदलाव के साथ प्रोफेशनल ग्रोथ आगे बढ़ती गई।
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2022 में 75 लाख का पैकेज, फिर लगा करियर को सबसे बड़ा झटका
शख्स ने आगे बताया कि 2022 में उन्हें करीब 75 लाख रुपये का पैकेज मिला। यह उस समय तक की सबसे बड़ी छलांग थी। लेकिन नई कंपनी का चुनाव सही साबित नहीं हुआ। इसके बाद बाहरी कारणों की वजह से layoff हो गया। मुश्किल सिर्फ नौकरी जाना नहीं था। करीब 1.3 साल तक ऐसा रोल और सैलरी नहीं मिली, जिसे वे स्वीकार कर सकें। सीनियर लेवल पर जॉब सर्च का यह दौर और भी कठिन था, क्योंकि इस स्तर पर मौके कम होते हैं और लंबे गैप को खुद से समझाना भी आसान नहीं होता। नीचे देखें पोस्ट-
71 लाख से वापसी, फिर 91 लाख तक का सफर
आखिरकार वापसी हुई, लेकिन करीब 71 लाख रुपये के पैकेज पर, यानी उस रकम से कम, जिस पर उन्होंने पहले छोड़ा था। फिर लगातार मेहनत और सही करियर मूव के बाद सैलरी बढ़कर 91 लाख रुपये तक पहुंची। इस पूरी जर्नी में एक और पक्ष सबसे ज्यादा भावुक करता है। लंबे बेरोजगारी दौर में उनकी पत्नी ने घर की आर्थिक जिम्मेदारी संभाली और उन्हें कभी यह महसूस नहीं होने दिया कि वे किसी के एहसानमंद हैं। आज उनके पास पहली खरीदी हुई अपनी घर की संपत्ति है, एक बेटी है और आर्थिक स्थिति पहले से कहीं मजबूत है। लग्जरी कार खरीदने के बजाय उन्होंने दूसरा घर लेना बेहतर समझा।
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यह कहानी बताती है कि करियर हमेशा सीधी लाइन में आगे नहीं बढ़ता। कभी बैकलॉग आते हैं, कभी PIP, कभी छंटनी और कभी सैलरी में पीछे लौटना पड़ता है। लेकिन सही समय पर दिशा बदलने की क्षमता हो, तो 3.5 लाख रुपये से शुरू हुआ सफर 91 लाख तक भी पहुंच सकता है।
