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  • विघ्नहर्ता गणेश की 20 सबसे रोचक कथाः कुबेर का घमंड से लेकर महाभारत लिखने तक की कहानी

विघ्नहर्ता गणेश की 20 सबसे रोचक कथाः कुबेर का घमंड से लेकर महाभारत लिखने तक की कहानी

Lord Ganesha Stories: भगवान गणेश की रोचक पौराणिक कथाएं जानें, कैसे उन्होंने शिव से युद्ध किया, कुबेर का घमंड तोड़ा और चंद्रमा को श्राप दिया। गणेश पुराण और मुद्गल पुराण से जुड़ी अद्भुत कहानियां पढ़ें।

7 Min read
Author : Anita Tanvi
Published : Sep 15 2026, 08:30 AM IST
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पार्वती ने अपने शरीर के उबटन से गणेश को बनाया
Image Credit : Gemini

पार्वती ने अपने शरीर के उबटन से गणेश को बनाया

धार्मिक कथा के अनुसार, एक बार माता पार्वती स्नान करने जा रही थीं। वह चाहती थीं कि उनकी इजाजत के बिना कोई अंदर न आए। उन्होंने अपने शरीर के उबटन से एक बालक की आकृति बनाई और उसमें प्राण डाल दिए। यही बालक आगे चलकर गणेश कहलाए। पार्वती ने उन्हें दरवाजे पर पहरा देने को कहा। गणेश ने मां की बात को सबसे ऊपर रखा।

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शिव को ही दरवाजे पर रोक दिया
Image Credit : Gemini

शिव को ही दरवाजे पर रोक दिया

भगवान शिव जब पार्वती से मिलने पहुंचे तो गणेश ने उन्हें अंदर जाने से रोक दिया। गणेश उन्हें पहचानते नहीं थे और उनके लिए मां की आज्ञा सबसे बड़ी थी। शिव ने समझाया, लेकिन गणेश अपनी जगह से नहीं हटे। बात इतनी बढ़ी कि शिव और गणेश के बीच युद्ध जैसी स्थिति बन गई। यही कहानी आगे गणेश के हाथी के सिर वाली कथा से जुड़ती है।

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गणेश का सिर हाथी का कैसे हुआ?
Image Credit : instagram/gsbsevamandalmumbai

गणेश का सिर हाथी का कैसे हुआ?

शिव पुराण की कथा के अनुसार, शिव ने गुस्से में गणेश का सिर अलग कर दिया। पार्वती यह देखकर बहुत दुखी और नाराज हुईं। तब शिव ने गणेश को फिर जीवन देने का वचन दिया। एक हाथी का सिर लाकर गणेश के शरीर पर लगाया गया और उन्हें नया जीवन मिला।

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गणेश को सबसे पहले पूजे जाने का वरदान
Image Credit : instagram/gsbsevamandalmumbai

गणेश को सबसे पहले पूजे जाने का वरदान

जब गणेश जी को हाथी का सिर लगाकर नया जीवन मिला, तब माता पार्वती ने उन्हें आशीर्वाद दिया कि सभी देवताओं से पहले उनकी पूजा होगी। इसके बाद ब्रह्मा, विष्णु और शिव समेत देवताओं ने भी गणेश को सम्मान दिया और कहा- वे प्रथम पूज्य और विघ्नों को दूर करने वाले देवता होंगे।

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गणेश और कार्तिकेय में किसकी पहले शादी होगी?
Image Credit : x

गणेश और कार्तिकेय में किसकी पहले शादी होगी?

कथा के अनुसार- गणेश और उनके भाई कार्तिकेय के बीच विवाह को लेकर बात आती है। दोनों के सामने शर्त रखी गई कि जो पहले पूरी दुनिया का चक्कर लगाकर लौटेगा, वही पहले विवाह करेगा। कार्तिकेय अपने वाहन मोर पर निकल पड़े। गणेश ने कुछ अलग किया।

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गणेश ने माता-पिता की परिक्रमा कर जीती बाजी
Image Credit : ANI

गणेश ने माता-पिता की परिक्रमा कर जीती बाजी

गणेश ने शिव और पार्वती के चारों तरफ 7 बार चक्कर लगाए। जब उनसे पूछा गया कि उन्होंने दुनिया का चक्कर क्यों नहीं लगाया, तो उन्होंने कहा- उनके लिए माता-पिता ही पूरी दुनिया हैं। उनकी इस समझ और बुद्धि से शिव-पार्वती प्रसन्न हुए। यह कथा गणेश जी की बुद्धिमानी का सबसे प्रचलित उदाहरण माना जाता है।

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गणेश का एक दांत कैसे टूटा?
Image Credit : ANI

गणेश का एक दांत कैसे टूटा?

गणेश को एकदंत यानी एक दांत वाले देवता के नाम से भी जाना जाता है। एक कथा में परशुराम और गणेश के बीच विवाद हुआ। गणेश ने शिव के घर के द्वार पर उन्हें रोक दिया। बात बढ़ी और परशुराम के प्रहार से गणेश का एक दांत टूट गया। ब्रह्मवैवर्त पुराण के गणेश खंड में भी परशुराम द्वारा गणेश का दांत तोड़े जाने की कथा का जिक्र मिलता है।

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टूटे दांत से गणेश ने लिख डाली महाभारत
Image Credit : ANI

टूटे दांत से गणेश ने लिख डाली महाभारत

महाभारत के अनुसार, महर्षि व्यास ने गणेश जी से महाभारत लिखने में मदद मांगी। गणेश ने शर्त रखी कि व्यास बिना रुके बोलते रहें। व्यास ने भी ऐसी शर्त रखी कि गणेश हर श्लोक का अर्थ समझकर ही लिखेंगे। कथा में आता है कि लेखनी टूटने पर गणेश ने अपना दांत तोड़कर उसे लेखनी बना लिया।

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कुबेर ने गणेश को दावत दी, लेकिन खाना खत्म ही नहीं हुआ
Image Credit : ANI

कुबेर ने गणेश को दावत दी, लेकिन खाना खत्म ही नहीं हुआ

कुबेर को अपनी दौलत पर बहुत घमंड था। उन्होंने शिव को अपनी संपत्ति दिखाने के लिए भोज का आयोजन किया। शिव ने गणेश को वहां भेज दिया। गणेश ने खाना शुरू किया तो कुबेर के घर का भोजन कम पड़ने लगा। गणेश की भूख तब शांत हुई जब कुबेर ने अपना घमंड छोड़कर विनम्रता से उन्हें भोजन कराया।

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गणेश ने चंद्रमा को श्राप क्यों दिया?
Image Credit : ANI

गणेश ने चंद्रमा को श्राप क्यों दिया?

एक प्रसिद्ध कथा के अनुसार- एक बार गणेश जी चंद्रमा से नाराज हो जाते हैं। गणेश को देखकर चंद्रमा हंस पड़े। गणेश ने इसे अपना मजाक उड़ाना माना और चंद्रमा को श्राप दिया कि जो भी भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी के दिन उन्हें देखेगा, उस पर झूठा आरोप लग सकता है। इसी से गणेश चतुर्थी पर चंद्रमा देखने से बचने की मान्यता जुड़ी है।

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गणेश और चंद्रमा की दोस्ती फिर कैसे हुई?
Image Credit : ANI

गणेश और चंद्रमा की दोस्ती फिर कैसे हुई?

चंद्रमा ने अपनी गलती मानकर गणेश से माफी मांगी। गणेश ने अपना श्राप पूरी तरह खत्म नहीं किया, लेकिन उसे सीमित कर दिया। इसी वजह से गणेश चतुर्थी की रात चंद्रमा देखने को लेकर खास सावधानी की बात कही जाती है।

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तुलसी ने गणेश से विवाह की इच्छा जताई
Image Credit : Social Media

तुलसी ने गणेश से विवाह की इच्छा जताई

एक धार्मिक कथा में तुलसी और गणेश के बीच बातचीत का जिक्र मिलता है। तुलसी ने गणेश से विवाह की इच्छा जताई, लेकिन गणेश ने इसे स्वीकार नहीं किया। इससे नाराज तुलसी ने गणेश को श्राप दिया। गणेश ने भी जवाब में तुलसी को श्राप दिया। बाद में दोनों ने अपने-अपने श्राप को सीमित किया। इसी वजह से कई जगह गणेश पूजा में तुलसी दल नहीं चढ़ाया जाता है।

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गणेश का वाहन चूहा कैसे बना?
Image Credit : ANI

गणेश का वाहन चूहा कैसे बना?

कथा के अनुसार- क्रौंच नाम का एक गंधर्व श्राप के कारण विशाल मूषक बन गया। वह इतना शक्तिशाली हो गया कि ऋषियों के आश्रम और आसपास की जगहों को नुकसान पहुंचाने लगा। जब वह गणेश जी के पास पहुंचा, तो गणेश जी ने उसे अपने पाश से पकड़ लिया और उसका घमंड तोड़ दिया। क्रौंच ने गणेश जी से क्षमा मांगी और उनकी सेवा करने की इच्छा जताई। तब गणेश जी ने उसे अपना वाहन यानी मूषक बना लिया।

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गजमुखासुर को गणेश ने कैसे हराया?
Image Credit : instagram/gsbsevamandalmumbai

गजमुखासुर को गणेश ने कैसे हराया?

कथा के अनुसार- गजमुखासुर नाम के असुर ने भगवान शिव की कठोर तपस्या करके वरदान पाया था। वरदान के कारण उसे सामान्य हथियारों से हराना मुश्किल था। शक्ति मिलने के बाद वह देवताओं-ऋषियों को परेशान करने लगा। देवताओं ने गणेश जी से मदद मांगी। गणेश जी ने गजमुखासुर से युद्ध किया। उन्होंने धनुष, तलवार, फरसा जैसे कई अस्त्र चलाए, लेकिन वरदान के कारण असुर पर उनका असर नहीं हुआ। तब गणेश जी ने अपना एक दांत तोड़कर उसे ही हथियार बना लिया। गजमुखासुर इससे भी बचने के लिए चूहे का रूप लेकर भागने लगा। गणेश जी ने उसे पकड़ लिया और उसके ऊपर बैठ गए। गजमुखासुर ने अपनी हार स्वीकार कर गणेश जी से क्षमा मांगी।

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वक्रतुंड ने मत्सरासुर का घमंड तोड़ा
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वक्रतुंड ने मत्सरासुर का घमंड तोड़ा

मुद्गल पुराण में गणेश के 8 प्रमुख अवतारों की कथा मिलती है। मत्सरासुर ईर्ष्या और घमंड वाला राक्षस था। उसने कठोर तपस्या करके भगवान शिव से वरदान पाया और फिर अपनी शक्ति के घमंड में देवताओं तथा ऋषियों को परेशान करने लगा। देवताओं ने गणेश जी से मदद मांगी। तब गणेश जी ने 'वक्रतुंड' रूप धारण किया और मत्सरासुर का सामना किया। आखिरकार मत्सरासुर ने अपनी हार मान ली और गणेश जी से क्षमा मांगी। गणेश जी ने उसे माफ कर दिया।

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एकदंत और मदासुर की कहानी
Image Credit : Social Media

एकदंत और मदासुर की कहानी

मुद्गल पुराण में गणेश के एकदंत रूप और मदासुर की कथा भी मिलती है। मदासुर ने शक्ति हासिल करने देवताओं और दूसरे लोगों को परेशान करने लगा। तब भगवान गणेश ने एकदंत रूप धारण किया और मदासुर का सामना किया। उसे अपनी गलती का एहसास हुआ और उसने गणेश जी की शरण ले ली। गणेश जी ने उसे क्षमा कर दिया।

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लंबोदर ने क्रोधासुर को हराया
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लंबोदर ने क्रोधासुर को हराया

मुद्गल पुराण में गणेश का लंबोदर अवतार भी बताया गया है। इस रूप का संबंध क्रोधासुर से जोड़ा जाता है। गणेश क्रोध की शक्ति पर विजय प्राप्त करते हैं। इसे मन के गुस्से पर नियंत्रण की कहानी माना जाता है। यानी बाहर के असुर के साथ-साथ इंसान के अंदर के क्रोध को जीतने की भी सीख मिलती है।

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विकट रूप में कामासुर से युद्ध
Image Credit : Social Media

विकट रूप में कामासुर से युद्ध

गणेश के विकट रूप की कथा भी मुद्गल पुराण में मिलती है। इस रूप को कामासुर के खिलाफ बताया गया है। कथा में गणेश उसके प्रभाव को खत्म करते हैं। इस कहानी में गणेश सिर्फ युद्ध करने वाले देवता नहीं, बल्कि मन को जीतने वाले देवता के रूप में सामने आते हैं।

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विघ्नराज ने ममासुर को रोका
Image Credit : ANI

विघ्नराज ने ममासुर को रोका

मुद्गल पुराण में विघ्नराज नाम का गणेश रूप भी मिलता है। इसका संबंध ममासुर से बताया गया है। ममासुर को मोह और अपनी चीजों से जरूरत से ज्यादा जुड़ाव के रूप में समझाया जाता है। गणेश इस शक्ति को रोकते हैं। इसी वजह से विघ्नराज का रूप बाधाओं और गलत सोच पर जीत से जोड़ा जाता है।

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धूम्रवर्ण और अभिमानासुर
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धूम्रवर्ण और अभिमानासुर

गणेश के धूम्रवर्ण रूप की कथा में अभिमानासुर का जिक्र मिलता है। अभिमान यानी अपने ऊपर जरूरत से ज्यादा घमंड करना। कथा में गणेश इस असुर का सामना करते हैं और उसे कंट्रोल करते हैं। इसका सीधा संदेश है कि घमंड बढ़ जाए तो इंसान अपने रास्ते से भटक सकता है।

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Anita Tanvi
अनीता तन्वी। मीडिया जगत में 15 साल से ज्यादा का अनुभव। मौजूदा समय में ये एशियानेट न्यूज हिंदी के साथ जुड़कर एजुकेशन सेगमेंट संभाल रही हैं। इन्होंने जुलाई 2010 में मीडिया इंडस्ट्री में कदम रखा और अपने करियर की शुरुआत प्रभात खबर से की। पहले 6 सालों में, प्रभात खबर, न्यूज विंग और दैनिक भास्कर जैसे प्रमुख प्रिंट मीडिया संस्थानों में राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय, ह्यूमन एंगल और फीचर रिपोर्टिंग पर काम किया। इसके बाद, डिजिटल मीडिया की दिशा में कदम बढ़ाया। इन्हें प्रभात खबर.कॉम में एजुकेशन-जॉब/करियर सेक्शन के साथ-साथ, लाइफस्टाइल, हेल्थ और रीलिजन सेक्शन को भी लीड करने का अनुभव है। इसके अलावा, फोकस और हमारा टीवी चैनलों में इंटरव्यू और न्यूज एंकर के तौर पर भी काम किया है।
गणेश चतुर्थी
जनरल नॉलेज

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