New Development Bank: BRICS के तेजी से विस्तार के बीच New Development Bank (NDB) की भूमिका और क्षमता पर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय मुद्रा में वित्तपोषण, नए सदस्यों और समानांतर वित्तीय पहलों के बीच NDB को BRICS की आर्थिक महत्वाकांक्षाओं से बेहतर तालमेल बनाना होगा।

BRICS Cross-Border Payments: BRICS का 2023 के बाद तेज और असमान विस्तार हुआ है। इससे समूह की राजनीतिक पहुंच और प्रभाव बढ़ा है, लेकिन इसके साथ एक अहम सवाल भी सामने आया है-क्या 2015 में स्थापित New Development Bank (NDB) इतने बड़े और तेजी से बदलते एजेंडे को आर्थिक और संस्थागत स्तर पर संभालने के लिए तैयार है? BRICS की सदस्यता और NDB की सदस्यता अलग-अलग होने के कारण दोनों के बीच बेहतर तालमेल अब पहले से ज्यादा जरूरी हो गया है।

BRICS के वित्तीय एजेंडे से NDB को जोड़ने की तैयारी

2025 BRICS Leaders’ Declaration में NDB को BRICS के उभरते वित्तीय एजेंडे के साथ बेहतर तरीके से जोड़ने पर जोर दिया गया। इसी दिशा में BRICS Multilateral Guarantees पहल को NDB के भीतर पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू करने पर सहमति बनी है। इसके अलावा BRICS Interbank Cooperation Mechanism और NDB के बीच संवाद को आगे बढ़ाने की भी बात कही गई है।

NDB में बढ़े सदस्य, BRICS से अलग हुई तस्वीर

NDB की शुरुआत पांच संस्थापक देशों के साथ हुई थी और सभी ने बराबर पूंजी के आधार पर सदस्यता ली थी। इसके बाद Bangladesh, UAE, Egypt और Algeria बैंक से जुड़े। जून 2026 में Uzbekistan NDB का दसवां सदस्य और मध्य एशिया से पहला सदस्य बना। Uruguay को संभावित सदस्य के तौर पर स्वीकार किया गया है, हालांकि उसकी औपचारिक सदस्यता प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है।

दिलचस्प बात यह है कि UAE और Egypt बाद में BRICS के सदस्य बन गए, जबकि Bangladesh, Algeria और Uzbekistan BRICS में शामिल नहीं हुए। इससे साफ है कि NDB अब सिर्फ BRICS देशों के बैंक की भूमिका तक सीमित नहीं है, बल्कि यह व्यापक Global South के लिए विकास वित्त संस्थान के रूप में अपनी पहचान बना रहा है।

100 अरब डॉलर की अधिकृत पूंजी, संस्थापकों का दबदबा कायम

NDB की अधिकृत पूंजी 100 अरब डॉलर है। शुरुआती 50 अरब डॉलर की सदस्यता पांच संस्थापक देशों ने बराबर-बराबर दी थी। बैंक के नियमों के मुताबिक संस्थापक पांच देशों की संयुक्त मतदान शक्ति कम से कम 55 प्रतिशत बनी रहनी चाहिए। वहीं, किसी भी गैर-संस्थापक सदस्य की हिस्सेदारी 7 प्रतिशत से ज्यादा नहीं हो सकती।

बैंक की वित्तीय साख भी मजबूत है। NDB को S&P से AA+, Fitch से AA और Japan Credit Rating Agency से AAA क्रेडिट रेटिंग मिली हुई है। इससे अंतरराष्ट्रीय बाजारों से पूंजी जुटाने की उसकी क्षमता को मजबूती मिलती है।

स्थानीय मुद्राओं में फाइनेंसिंग पर NDB का जोर

NDB ने अपने कुल वित्तपोषण का 30 प्रतिशत सदस्य देशों की स्थानीय मुद्राओं में करने का लक्ष्य रखा है। चीन के घरेलू पूंजी बाजार में 7 अरब रेनमिनबी के Panda Bonds जारी कर बैंक ने स्थानीय मुद्रा में संसाधन जुटाने की दिशा में अपनी क्षमता दिखाई है।

इससे पहले 2023-24 में दक्षिण अफ्रीकी रैंड में भी फंड जुटाया गया था और भारत में भी स्थानीय मुद्रा में इश्यू की योजना पर काम हुआ है। BRICS में डॉलर पर निर्भरता कम करने और स्थानीय मुद्राओं के इस्तेमाल को बढ़ाने की चर्चा लगातार बढ़ रही है। हालांकि, NDB खुद को तेज डॉलरीकरण-विरोधी अभियान के बजाय वैश्विक वित्तीय व्यवस्था में विविधता लाने वाले संस्थान के रूप में देखता है।

भारत के लिए क्यों अहम है NDB का संतुलन?

भारत के लिए यह संतुलन खास महत्व रखता है। डॉलर पर निर्भरता कम करना एक लक्ष्य हो सकता है, लेकिन उसकी जगह किसी एक दूसरी मुद्रा पर अत्यधिक निर्भरता भी भारत के हित में नहीं होगी। ऐसे में NDB का बहुपक्षीय और संतुलित चरित्र महत्वपूर्ण है। इसी वजह से इसे चीन-प्रधान अन्य वित्तीय संस्थानों से अलग पहचान बनाए रखना भी जरूरी है।

BRICS में कई समानांतर वित्तीय पहलें बनीं चुनौती

BRICS के भीतर स्थानीय मुद्रा में लेनदेन, भुगतान व्यवस्था, गारंटी तंत्र, राष्ट्रीय विकास बैंकों के बीच सहयोग और South-South वित्तीय साझेदारी जैसी कई पहलें आगे बढ़ रही हैं। Cross-Border Payments Initiative पर भी काम जारी है, लेकिन इसमें NDB की सटीक भूमिका अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं हुई है।

इन पहलों के बीच तालमेल नहीं हुआ तो BRICS का वित्तीय ढांचा कई अलग-अलग हिस्सों में बंट सकता है। इसके उलट, अगर NDB को इन व्यवस्थाओं से प्रभावी तरीके से जोड़ा जाता है तो उसकी मौजूदा वित्तीय क्षमता और संस्थागत अनुभव BRICS के लिए बड़ा आधार बन सकता है।

निजी निवेश के बिना पूरी नहीं होगी इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत

विकासशील देशों की विशाल बुनियादी ढांचा जरूरतों को केवल NDB के संसाधनों से पूरा करना संभव नहीं है। इसलिए निजी पूंजी को आकर्षित करने और सार्वजनिक-निजी साझेदारी बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है। भारत और NDB के बीच भी निजी निवेश को बेहतर तरीके से जोड़ने के तरीकों पर चर्चा हो चुकी है।

NDB की सफलता से तय होगा BRICS का अगला कदम

BRICS के सामने अब चुनौती सिर्फ अपना राजनीतिक प्रभाव बढ़ाने की नहीं, बल्कि उसे मजबूत आर्थिक और वित्तीय संस्थानों में बदलने की है। इस पूरी प्रक्रिया में NDB सबसे महत्वपूर्ण कसौटी बनकर उभरता है। अगर बैंक अपने बढ़ते सदस्य आधार, स्थानीय मुद्रा वित्तपोषण और निजी पूंजी को प्रभावी तरीके से जोड़ पाता है, तो BRICS अपने बढ़ते राजनीतिक वजन को टिकाऊ आर्थिक ताकत में बदल सकता है।