Iran US War: Iran के IRGC ने कहा कि लारक द्वीप पर US हमले के जवाब में जॉर्डन के King Hussein और Al Azraq बेस को निशाना बनाया. ऑपरेशन का नाम “Punishment of the Aggressor” बताया गया. US ने लारक द्वीप पर दो लांचरों पर प्रहार की पुष्टि की. Captain Tim Hawkins ने होर्मुज़ में मुक्त वाणिज्य की सुरक्षा पर जोर दिया.

Iran Attack: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर खतरनाक स्तर पर पहुंचता दिख रहा है। ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने दावा किया है कि उसने जॉर्डन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को बैलिस्टिक मिसाइलों से निशाना बनाया। ईरान के मुताबिक, यह कार्रवाई लारक द्वीप पर अमेरिकी हमले के जवाब में की गई।

IRGC के अनुसार, हमले का लक्ष्य जॉर्डन स्थित King Hussein और Al Azraq एयर बेस थे। ईरानी संगठन ने इस कार्रवाई को “Punishment of the Aggressor” नाम दिया है। IRGC ने चेतावनी दी कि अगर अमेरिका की ओर से आगे कोई सैन्य कार्रवाई होती है तो उसका जवाब और भी कड़ा होगा।

लारक द्वीप पर अमेरिका ने क्यों किया हमला?

अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, रविवार को अमेरिकी बलों ने ईरान के लारक द्वीप पर मौजूद दो लॉन्चरों को निशाना बनाया। अमेरिका का दावा है कि IRGC के जवान इन लॉन्चरों के जरिए होर्मुज़ जलडमरूमध्य में समुद्री बारूदी सुरंगें बिछाने की तैयारी कर रहे थे।

लारक द्वीप होर्मुज़ जलडमरूमध्य के बेहद रणनीतिक हिस्से में स्थित है। यह जलमार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है और यहां किसी भी सैन्य गतिविधि का असर अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर पड़ सकता है।

ईरान ने दी और बड़े हमले की चेतावनी

अमेरिकी हमले के बाद IRGC ने कहा कि लारक द्वीप पर हुई कार्रवाई में कई ईरानी सैनिकों और नागरिकों के मारे जाने या घायल होने की खबर है। हालांकि, ईरान ने अब तक हताहतों की सटीक संख्या सार्वजनिक नहीं की है।

इसके बाद ईरान ने जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने का दावा किया। अमेरिकी सूत्रों के अनुसार, ज्यादातर मिसाइलों को रास्ते में ही रोक दिया गया और शुरुआती जानकारी में बड़े नुकसान की पुष्टि नहीं हुई। जॉर्डन की सेना ने भी कहा कि उसके एयर डिफेंस ने उसके हवाई क्षेत्र में प्रवेश करने वाली कई मिसाइलों को इंटरसेप्ट किया।

होर्मुज़ जलडमरूमध्य बना सबसे बड़ा फ्लैशपॉइंट

इस पूरे घटनाक्रम के केंद्र में होर्मुज़ जलडमरूमध्य है। ईरान पहले ही इस क्षेत्र में अपने नियंत्रण को लेकर सख्त रुख अपना चुका है। IRGC की नौसेना ने हाल में अमेरिकी दावों को खारिज करते हुए कहा था कि जलडमरूमध्य पर उसका पूरा नियंत्रण है और प्रतिबंध तब तक जारी रहेंगे जब तक अमेरिकी सैन्य कार्रवाई खत्म नहीं होती।

अमेरिकी हमले और ईरानी जवाबी कार्रवाई के बाद कच्चे तेल की कीमतों में भी तेजी देखी गई। बाजारों को आशंका है कि अगर होर्मुज़ में तनाव और बढ़ता है तो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। फिलहाल दोनों देशों के बीच सैन्य तनाव बढ़ गया है और पूरी दुनिया की नजर इस बात पर है कि अगला कदम अमेरिका उठाता है या ईरान।