Saudi Arabia Security Crisis: पूर्व केंद्रीय मंत्री एमजे अकबर ने सऊदी अरब पर हूती हमलों के बाद मक्का रक्षा समझौते पर तंज कसा है। उन्होंने सवाल उठाया कि सऊदी ने मदद के लिए अमेरिका को फोन क्यों किया, पाकिस्तान या तुर्की को क्यों नहीं? अकबर ने कहा कि पाकिस्तानी सेना जंग के मैदान में भेड़ बन जाती है।

Saudi Arabia Pakistan Turkey: भारत के पूर्व विदेश राज्य मंत्री एमजे अकबर ने सऊदी अरब पर हूती विद्रोहियों के बढ़ते हमलों के बीच पाकिस्तान और तुर्की को लेकर तीखा हमला बोला है। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर सऊदी अरब को सुरक्षा का खतरा था, तो उसने मदद के लिए अपने कथित रक्षा साझेदार पाकिस्तान और तुर्की से संपर्क क्यों नहीं किया।

ANI से बातचीत में एमजे अकबर ने हाल में हुए मक्का रक्षा समझौते का जिक्र करते हुए कहा कि इस समझौते की पहली बड़ी चुनौती सामने आने पर उसके साझेदार देशों की भूमिका पर सवाल खड़े हो गए हैं।

सऊदी ने पाकिस्तान और तुर्की को फोन क्यों नहीं किया?

एमजे अकबर ने कहा कि रिपोर्ट्स के अनुसार, सऊदी अरब ने यमन के हूती विद्रोहियों के बढ़ते हमलों के बाद अमेरिका से सैन्य मदद मांगी थी। उन्होंने सवाल किया कि रियाद ने मदद के लिए पाकिस्तान या तुर्की की ओर रुख क्यों नहीं किया।

अकबर ने कहा कि मक्का रक्षा समझौते में तीनों देशों के बीच सामूहिक सुरक्षा और एक-दूसरे की मदद की बात कही गई थी। ऐसे में सऊदी अरब के सामने संकट आने पर पाकिस्तान और तुर्की की भूमिका को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।

उन्होंने पाकिस्तान की सेना पर भी तीखा तंज कसते हुए कहा कि समझौते के बाद पहली बड़ी चुनौती आने पर इस्लामाबाद की प्रतिक्रिया अपेक्षा के अनुरूप दिखाई नहीं दी।

‘सऊदी को BRICS की नई दिल्ली घोषणा देखनी चाहिए’

पूर्व केंद्रीय मंत्री ने सुझाव दिया कि सऊदी अरब को BRICS की ओर से जारी नई दिल्ली घोषणा-पत्र पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत की अध्यक्षता में BRICS देशों ने पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव पर चिंता जताते हुए युद्ध की बजाय बातचीत और कूटनीति के जरिए समाधान तलाशने पर जोर दिया है।

अकबर ने कहा कि क्षेत्र में स्थायी शांति और सुरक्षा के लिए राजनीतिक संवाद और कूटनीतिक प्रयासों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

हूती हमलों से बढ़ा सऊदी अरब पर दबाव

रिपोर्ट्स के मुताबिक, यमन के हूती विद्रोही लगातार अपनी सैन्य गतिविधियां बढ़ा रहे हैं। बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य और लाल सागर क्षेत्र में उनकी गतिविधियों को लेकर चिंता बढ़ी है।

यह समुद्री रास्ता वैश्विक व्यापार और तेल परिवहन के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। हूती विद्रोहियों की इस क्षेत्र में बढ़ती मौजूदगी से सऊदी अरब और आसपास के देशों की सुरक्षा चिंताएं बढ़ गई हैं।

सऊदी सैन्य ठिकाने पर हमले का दावा

हूती प्रवक्ता याह्या सारी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर दावा किया कि समूह ने सऊदी अरब के शरurah क्षेत्र में एक सैन्य अड्डे को निशाना बनाया। उनके मुताबिक, हमले में हथियारों के डिपो और कमांड एंड कंट्रोल रूम को निशाना बनाया गया।

रिपोर्ट्स में सऊदी सीमा क्षेत्र में हुए हमले में लोगों के घायल होने की भी जानकारी सामने आई है। हालांकि, क्षेत्र में जारी संघर्ष और सैन्य दावों को लेकर अलग-अलग पक्षों की ओर से अलग जानकारियां सामने आती रही हैं।

बाब अल-मंदेब पर बढ़ती पकड़ क्यों है चिंता की बात?

बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में शामिल है। इस रास्ते पर किसी भी तरह का तनाव या सैन्य गतिविधि अंतरराष्ट्रीय व्यापार और तेल आपूर्ति पर असर डाल सकती है। रिपोर्ट्स के अनुसार, हूती विद्रोहियों की इस क्षेत्र में बढ़ती गतिविधियों को सऊदी अरब के तेल निर्यात से जुड़े समुद्री मार्गों के लिए भी चुनौती के तौर पर देखा जा रहा है।

BRICS ने पश्चिम एशिया में संयम और बातचीत की अपील की

नई दिल्ली में आयोजित BRICS शिखर सम्मेलन के दौरान सदस्य देशों ने पश्चिम एशिया में लगातार बढ़ते तनाव पर गहरी चिंता जताई। नई दिल्ली घोषणा-पत्र में सभी पक्षों से अधिकतम संयम बरतने और ऐसे कदमों से बचने की अपील की गई, जिनसे हालात और बिगड़ सकते हैं।

BRICS देशों ने संयुक्त राष्ट्र चार्टर के सिद्धांतों के अनुरूप नागरिकों और नागरिक बुनियादी ढांचे की सुरक्षा पर भी जोर दिया। समूह ने स्पष्ट किया कि क्षेत्र में स्थायी शांति, सुरक्षा और स्थिरता के लिए संवाद और कूटनीति के रास्ते को मजबूत करना जरूरी है। एमजे अकबर के बयान के बाद मक्का रक्षा समझौते, सऊदी अरब की सुरक्षा चिंताओं और पाकिस्तान-तुर्की की भूमिका को लेकर नई बहस छिड़ गई है।