गोरखगिरी पर्वत को सजाने सवारने में जुटा पर्यटन विभाग, विशाल चट्टानों पर बनाई जा रहीं रंग-बिरंगी कलाकृतियां

उत्तर प्रदेश के महोबा जनपद में ऐतिहासिक माने जाने वाले गोरखगिरी पर्वत को सजाने सवारने का सिलसिला बदस्तूर जारी है। पर्यटन विभाग की पहल से गोरखगिरी पर्वत की चट्टानों पर रंग बिरंगी कलाकृतियां बनाई जा रहीं हैं। जनपद महोबा में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए ये तमाम कोशिश की जा रही है।

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महोबा: उत्तर प्रदेश के महोबा जनपद में ऐतिहासिक माने जाने वाले गोरखगिरी पर्वत को सजाने सवारने का सिलसिला बदस्तूर जारी है। पर्यटन विभाग की पहल से गोरखगिरी पर्वत की चट्टानों पर रंग बिरंगी कलाकृतियां बनाई जा रहीं हैं। जनपद महोबा में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए ये तमाम कोशिश की जा रही है। आपको बतादें कि गुरु गोरखनाथ ने इसी पहाड़ पर कई वर्ष तपस्या की थी। जिसके बाद से इस पहाड़ की पहचान गोरखगिरी पर्वत के नाम से की जाने लगी। जनपद महोबा के गोरखगिरी पर्वत को आज भी खासा रहस्यमयी माना जाता है। 

जिला प्रशासन द्वारा मुख्यालय के गोरखगिरी पर्वत को पर्यटन स्थल के तौर पर स्थापित किए जाने के लगातार प्रयास किये जा रहें हैं। पहाड़ की चट्टानों पर रंगीन कलाकृतियां बनाए जाने के साथ ही साफ सफाई व्यवस्था का विशेष ख्याल रखा जा रहा है। पुरातन काल से बुंदेलखंड के इस पहाड़ को काफी ऐतिहासिक माना जाता रहा है। जिसको अब पर्यटन विभाग द्वारा नया अमली जामा पहनाया जा रहा है। लोगों का मानना है कि भगवान राम ने 14 वर्ष के वनवास के दौरान इसी पहाड़ पर काफी दिनों तक समय गुजारा था। इसी के साथ गुरु गोरखनाथ ने इस पहाड़ पर सालों तपस्या भी की थी। 

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