महाकवि गोस्वामी तुलसीदास की जिंदगी पर बनने वाली ‘राम बोला’ को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। दो फिल्में इसी नाम से घोषित होने के बाद मामला अब राइटर्स एसोसिएशन तक पहुंच सकता है।

महाकवि गोस्वामी तुलसीदास के जीवन और उनकी रचना ‘रामचरितमानस’ से जुड़ी कहानी को पर्दे पर उतारने की तैयारी के बीच फिल्म के टाइटल को लेकर नया विवाद सामने आया है। गणेश चतुर्थी के मौके पर निर्देशक डॉ. विशाल चतुर्वेदी और निर्माता महावीर जैन की ओर से ‘राम बोला’ की घोषणा की गई। इसी दिन निर्देशक डॉ. चंद्रप्रकाश द्विवेदी ने भी इसी नाम की अपनी फिल्म का ऐलान किया। दोनों प्रोजेक्ट्स का विषय गोस्वामी तुलसीदास के जीवन से जुड़ा बताया गया है। हालांकि, एक ही शीर्षक से दो फिल्मों की घोषणा के बाद डॉ. द्विवेदी ने टाइटल को लेकर आपत्ति जताई है और मामले में अधिकार तथा पहले से हुई बातचीत का हवाला दिया है।

'राम बोला' टाइटल पर आमने-सामने दो फिल्में

फिल्म ‘हनुमान अंश’ की सफलता के बाद डॉ. विशाल चतुर्वेदी ने अपनी अगली फिल्म ‘राम बोला’ का ऐलान किया है। इस प्रोजेक्ट को महावीर जैन प्रोड्यूस कर रहे हैं और इसकी घोषणा उनके प्रोडक्शन हाउस महावीर जैन फिल्म्स के इंस्टाग्राम अकाउंट से की गई। फिल्म की कहानी महाकवि गोस्वामी तुलसीदास के जीवन पर आधारित बताई गई है।

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इसी बीच डॉ. चंद्रप्रकाश द्विवेदी ने भी ‘राम बोला’ नाम से अपनी फिल्म की घोषणा कर दी। उन्होंने इंस्टाग्राम पर फिल्म का पोस्टर शेयर करते हुए लिखा, “उन्होंने भारत को ऐसा हथियार दिया, जिसे कोई भी साम्राज्य पराजित नहीं कर सका।” इस फिल्म का लेखन और निर्देशन डॉ. चंद्रप्रकाश द्विवेदी कर रहे हैं। इसके निर्माता मधु मंटेना और मंदिरा द्विवेदी हैं।

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खास बात यह है कि दोनों फिल्मों के अनाउंसमेंट का समय भी एक ही है।

तुलसीदास का नाम कैसे पड़ा राम बोला?

कहा जाता है कि गोस्वामी तुलसीदास का शुरुआती नाम राम बोला दुबे था। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, उन्हें प्रभु हनुमान के दर्शन हुए थे और उनके निर्देश के बाद उन्होंने ‘रामचरितमानस’ की रचना की। इसी वजह से उनके जीवन से जुड़ी कहानी में ‘राम बोला’ नाम का खास महत्व माना जाता है। यही पृष्ठभूमि दोनों फिल्म परियोजनाओं के लिए इस शीर्षक को महत्वपूर्ण बनाती है। हालांकि, दोनों निर्माताओं की फिल्मों की कहानी और निर्माण की दिशा को लेकर उपलब्ध जानकारी अलग-अलग है।

चंद्रप्रकाश द्विवेदी ने जताई आपत्ति

डॉ. चंद्रप्रकाश द्विवेदी ने महावीर जैन की ओर से ‘राम बोला’ की घोषणा पर आपत्ति जताई है। दैनिक जागरण से बातचीत में उन्होंने कहा, “हमारे पास यह शीर्षक रजिस्टर है। इस फिल्म के बारे में महावीर जैन से चर्चा होती रही है।” उन्होंने यह भी बताया कि मार्च में उन्हें ईमेल के जरिए फिल्म से संबंधित जानकारी भेजी गई थी। उनके मुताबिक, उस ईमेल में आठ मिनट का ऑडियो-वीडियो भी मौजूद है। यानी उनका दावा है कि इस प्रोजेक्ट से जुड़ी जानकारी पहले ही साझा की जा चुकी थी।

अब राइटर्स एसोसिएशन और अदालत पर नजर

डॉ. द्विवेदी ने कहा, “मैं यह नहीं कहता इस कहानी पर किसी और का अधिकार नहीं है। प्रत्येक नागरिक को है, लेकिन प्रश्न यह है यह कहानी किसी और के माध्यम से पहुंची? इसका फैसला फिल्म राइटर एसोसिएशन और अदालत करेगी।” वहीं, महावीर जैन से इस मामले पर प्रतिक्रिया लेने की कोशिश की गई, लेकिन उनकी तरफ से कोई जवाब नहीं आया। अब निगाहें इस बात पर हैं कि डॉ. विशाल चतुर्वेदी और महावीर जैन इस टाइटल विवाद पर क्या सफाई देते हैं और क्या दोनों पक्षों के बीच बातचीत से मामला सुलझता है या फिर यह औपचारिक विवाद का रूप लेता है।