नेताजी सुभाष चंद्र बोस के पोते चंद्रकुमार बोस ने तृणमूल कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने बीजेपी और टीएमसी, दोनों की तीखी आलोचना करते हुए कहा कि वो नेताजी के विचारों पर आधारित एक नया राजनीतिक विकल्प बनाएंगे।

कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक और बड़ा उलटफेर हुआ है। नेताजी सुभाष चंद्र बोस के पोते और जाने-माने नेता चंद्रकुमार बोस ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने साफ कहा कि बड़ी राजनीतिक पार्टियों से उनका भरोसा पूरी तरह उठ गया है। उन्होंने सत्ताधारी बीजेपी और ममता बनर्जी की टीएमसी को "एक ही सिक्के के दो पहलू" बताया।

हैरानी की बात है कि चंद्रकुमार बोस ने टीएमसी जॉइन करने के सिर्फ चार महीने बाद ही यह फैसला लिया है। उन्होंने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से ठीक पहले अप्रैल में बीजेपी छोड़कर टीएमसी का दामन थामा था। उस वक्त उन्होंने कहा था कि बीजेपी में शामिल होना उनकी 'ऐतिहासिक गलती' थी और वे संविधान के मूल्यों और नेताजी के सेक्युलर विचारों की रक्षा के लिए टीएमसी में आए हैं। लेकिन अब, उन्होंने टीएमसी के अनुभव को भी निराशाजनक बताते हुए पार्टी छोड़ दी है।

बोस ने बताया कि वो नेताजी सुभाष चंद्र बोस और उनके बड़े भाई शरत चंद्र बोस (जो उनके दादा भी थे) के विचारों पर आधारित एक नया राजनीतिक विकल्प खड़ा करने की कोशिश करेंगे। उन्होंने कहा कि युवाओं की अगुवाई में एक नया राजनीतिक मंच बनेगा, जिसमें वे सलाहकार की भूमिका में रहेंगे। उनका लक्ष्य सेक्युलरिज्म, सामाजिक न्याय और विकास पर आधारित राजनीति करना है।

चंद्रकुमार बोस ने अपना राजनीतिक सफर नेताजी द्वारा बनाई गई पार्टी 'फॉरवर्ड ब्लॉक' से शुरू किया था। इसके बाद, 2016 में वे बीजेपी में शामिल हुए और पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष भी बने। उन्होंने 2016 के विधानसभा चुनाव और 2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़ा, लेकिन जीत नहीं पाए। बाद में 2023 में उन्होंने यह आरोप लगाते हुए बीजेपी छोड़ दी कि पार्टी ने अपने घोषणापत्र के वादे पूरे नहीं किए और पार्टी नेताजी के विचारों से मेल नहीं खाती।