Venomous Snakes in Punjab: मानसून में पंजाब में सांपों का खतरा क्यों बढ़ जाता है? कौन से सांप जहरीले हैं और काटने पर पहली गलती क्या जानलेवा हो सकती है? पंजाब में सांप काटने से हुए दो सगे भाई-बहनों की मौत के बीच जानिए जरूरी बातें।
Punjab Venomous Snakes: मानसून आते ही खेत-खलिहान से लेकर घरों के आसपास तक सांप दिखने की घटनाएं बढ़ जाती हैं। पंजाब के लुधियाना जिले के बस्सियां गांव में रक्षाबंधन के दिन हुई एक दर्दनाक घटना ने एक बार फिर इस खतरे की गंभीरता सामने ला दी। घर के बाहर दादी के पास सो रहे आठ साल के जोबनप्रीत और उसकी छह साल की बहन जसप्रीत को सांप ने काट लिया। शुरुआत में परिवार को लगा कि शायद किसी कीड़े ने काटा है, लेकिन बच्चों की तबीयत बिगड़ने के बाद पास में सांप दिखाई दिया। अस्पताल ले जाने के दौरान जसप्रीत की मौत हो गई, जबकि जोबनप्रीत ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। यह घटना एक अहम सवाल छोड़ती है कि पंजाब में कौन-कौन से सांप पाए जाते हैं, सांप के काटने के बाद शुरुआती मिनटों में क्या करना चाहिए?
पंजाब में कौन-कौन से जहरीले सांप मिलते हैं?
स्नेक रेस्क्यू से जुड़े विशेषज्ञों के मुताबिक पंजाब में कोबरा, कॉमन क्रेट, रसेल्स वाइपर और सॉ-स्केल्ड वाइपर जैसी जहरीली प्रजातियां पाई जाती हैं। हालांकि हर सांप जहरीला नहीं होता, लेकिन काटने के बाद सांप की पहचान करने में समय गंवाना खतरनाक हो सकता है। विशेषज्ञों की सलाह है कि हर सर्पदंश को मेडिकल इमरजेंसी मानकर मरीज को जल्द से जल्द अस्पताल पहुंचाया जाए।
सांप काटे तो सबसे पहले क्या करें?
मरीज को शांत रखें और उसे चलने या दौड़ने न दें। काटे गए हाथ या पैर की गतिविधि कम से कम रखें और उसे सहारे की मदद से स्थिर करें। प्रभावित हिस्से से अंगूठी, घड़ी, कड़ा, जूते और टाइट कपड़े तुरंत हटा दें, क्योंकि सूजन बढ़ सकती है। मरीज को सुरक्षित तरीके से अस्पताल पहुंचाना सबसे जरूरी कदम है।
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सांप काटे तो ये गलतियां पड़ सकती हैं भारी
सांप के काटने वाली जगह पर रस्सी या कपड़ा कसकर बांधना, घाव को चाकू या ब्लेड से काटना, जहर चूसना, बर्फ या गर्मी लगाना अथवा बिजली और रसायन का इस्तेमाल करना नुकसानदायक हो सकता है। झाड़-फूंक या तांत्रिक इलाज के भरोसे अस्पताल पहुंचने में देरी भी जानलेवा साबित हो सकती है।
सांप काटने के लक्षण देर से भी सामने आ सकते हैं
सर्पदंश के बाद दर्द और सूजन के अलावा पलकें झुकना, धुंधला या दो-दो दिखाई देना, बोलने-निगलने में परेशानी, मांसपेशियों में कमजोरी और सांस लेने में दिक्कत जैसे संकेत गंभीर स्थिति की ओर इशारा कर सकते हैं। कुछ मामलों में लक्षण तुरंत दिखाई नहीं देते। इसलिए मरीज ठीक महसूस करे, तब भी मेडिकल जांच जरूरी है। अस्पताल में डॉक्टर मरीज की स्थिति और लक्षणों के आधार पर इलाज करते हैं। जरूरत पड़ने पर एंटी-स्नेक वेनम (ASV) दिया जाता है। गंभीर मामलों में सांस लेने में मदद और अन्य जरूरी सपोर्टिव उपचार भी दिया जा सकता है।
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मानसून में क्यों बढ़ता है सर्पदंश?
बारिश के दौरान सांप अपने प्राकृतिक ठिकानों से निकलकर सूखी और सुरक्षित जगह तलाशते हैं। घरों, खेतों और रिहायशी इलाकों में मौजूद चूहे और दूसरे छोटे जीव भी उन्हें इन जगहों के करीब ला सकते हैं। इसलिए बरसात में घर के आसपास सफाई रखना, रात में बाहर निकलते समय रोशनी का इस्तेमाल करना और जूते पहनने से पहले उन्हें चेक कर लेना जैसी सावधानियां बेहद काम की हैं।
