सुप्रीम कोर्ट के अनुसार, लिफ्ट हादसों के लिए निर्माता, रखरखाव एजेंसी और भवन मालिक संयुक्त रूप से जिम्मेदार हैं। एक मामले में कोर्ट ने मुआवजे का 70% कंपनी, 25% एजेंसी और 5% मालिक पर लगाया।
नई दिल्लीः अगर लिफ्ट में कोई हादसा हो जाए तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी? इस सवाल पर सुप्रीम कोर्ट ने एक बहुत बड़ा और अहम फैसला दिया है। कोर्ट ने साफ कर दिया है कि अब से लिफ्ट में होने वाले किसी भी हादसे के लिए लिफ्ट बनाने वाली कंपनी, उसकी देखरेख यानी मेंटेनेंस करने वाली एजेंसी और बिल्डिंग के मालिक या मैनेजमेंट, ये तीनों मिलकर जिम्मेदार होंगे।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला साल 2003 का है। नई दिल्ली में रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (RAW) के हेडक्वार्टर में एक दर्दनाक हादसा हुआ था। बिल्डिंग की लिफ्ट में 13 अधिकारी सफर कर रहे थे, तभी लिफ्ट छठी और सातवीं मंजिल के बीच अचानक रुक गई। जब बचाव का काम चल रहा था, तो अधिकारी विपिन हांडा ने लिफ्ट से बाहर निकलने की कोशिश की। ठीक उसी वक्त लिफ्ट अचानक नीचे की ओर चल पड़ी, जिससे वह बुरी तरह फंस गए और मौके पर ही उनकी मौत हो गई।
कंपनी ने क्या दलील दी?
लिफ्ट बनाने वाली कंपनी ने अपनी दलील में कहा कि यह हादसा बचाव अभियान के दौरान हुई मानवीय गलती की वजह से हुआ। कंपनी ने यह भी कहा कि बिल्डिंग में बिजली के वोल्टेज में उतार-चढ़ाव को लेकर पहले ही चेतावनी दी गई थी।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने कंपनी की इस दलील को नहीं माना। कोर्ट ने कहा कि लिफ्ट में लंबे समय से तकनीकी खराबियां थीं, लेकिन उन्हें ठीक करने के लिए जरूरी कदम नहीं उठाए गए। कोर्ट ने साफ किया कि लिफ्ट में सफर करने वालों की सुरक्षा सुनिश्चित करना सभी संबंधित पक्षों की जिम्मेदारी है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (National Consumer Disputes Redressal Commission) के फैसले को सही ठहराया। इस फैसले के मुताबिक, मुआवजे की 70% रकम लिफ्ट कंपनी, 25% रकम मेंटेनेंस एजेंसी (MES) और बाकी 5% रकम RAW को देनी होगी।
