Krishna Janmashtami 2026: इस बार श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व 4 सितंबर, शुक्रवार को मनाया जाएगा। इस दिन भगवान को विशेष चीजों का भोग लगाया जाता है। इन भोगों में तुलसी के पत्ते जरूर रखे जाते हैं।
Tulsi and Lord Vishnu: श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर भगवान कृष्ण की पूजा की तैयारी शुरू होते ही घरों और मंदिरों में एक चीज खास तौर पर नजर आती है- तुलसी के पत्ते। बाल गोपाल को माखन-मिश्री, धनिया पंजीरी और दूसरे भोग चढ़ाये जाते हैं, लेकिन भोग और पूजा में तुलसी दल का खास महत्व माना जाता है। आखिर क्यों भगवान कृष्ण को चढ़ाए जाने वाले प्रसाद में तुलसी को इतना पवित्र स्थान मिला है? धार्मिक परंपरा में इसका संबंध सीधे भगवान विष्णु और उनके अवतार श्रीकृष्ण से जोड़ा जाता है। पद्म पुराण में तुलसी को भगवान विष्णु की अत्यंत प्रिय बताया गया है और विष्णु पूजा में तुलसी दल चढा़ने की महिमा का जिक्र है।
तुलसी और कृष्ण का क्या है धार्मिक संबंध?
भगवान श्रीकृष्ण को भगवान विष्णु का अवतार माना गया है। इसलिए विष्णु पूजा में तुलसी का जो महत्व है, वही महत्व कृष्ण पूजा में भी माना जाता है। पद्म पुराण की तुलसी महिमा से जुड़ी कथाओं में कहा गया है कि तुलसी भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय हैं। यहां तक कि भगवान को अनेक सुगंधित फूलों के बजाय तुलसी दल अर्पित करना भी पुण्यकारी बताया गया है। इसी कारण जन्माष्टमी पर बाल गोपाल को तुलसी दल चढ़ाने की परंपरा चली आ रही है।
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भगवान कृष्ण को तुलसी दल ही क्यों चढ़ाते हैं?
भगवान को प्रसन्न करने के लिए भक्त अलग-अलग तरह के फूल और भोग चढ़ाते हैं, लेकिन वैष्णव परंपरा में तुलसी को विशेष स्थान प्राप्त है। पद्म पुराण में तो यहां तक वर्णन मिलता है कि तुलसी के बिना भगवान विष्णु की पूजा को पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता। इसी वजह से कृष्ण जन्माष्टमी पर जब बाल कृष्ण का अभिषेक और पूजन किया जाता है, तो उनके चरणों में तुलसी दल जरूर चढ़ाया जाता है।
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तुलसी के एक पत्ते की इतनी महिमा क्यों?
कृष्ण भक्ति की सबसे खूबसूरत बात यही मानी जाती है कि भगवान के लिए भक्ति में वस्तु की कीमत नहीं, बल्कि श्रद्धा का महत्व है। तुलसी का एक छोटा-सा पत्ता इसी का प्रतीक है। पद्म पुराण में भगवान विष्णु की तुलसी से पूजा करने की महिमा का वर्णन करते हुए कहा गया है कि भगवान तुलसी दल से की गई भक्ति से खुश होते हैं। यहां तक कि सूखा हुआ तुलसी पत्ता भी अगर मन से चढ़ाया जाए तो उसे भी भगवान स्वीकार करते हैं। इसलिए जन्माष्टमी पर भक्त भगवान कृष्ण को बड़े-बड़े भोग के साथ तुलसी दल अर्पित करते हैं।
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