Mohsin Naqvi Trophy Controversy: विमेन्स एशिया कप फाइनल में भारत ने श्रीलंका को हराया, पर टीम ने ACC अध्यक्ष Mohsin Naqvi से ट्रॉफी लेने से इनकार किया। 12 महीनों में दूसरी बार ऐसा हुआ। ACC गाइडलाइन न्यूट्रल अधिकारी से हैंडओवर कहती हैं, भारत ने पहले ही विकल्प सुझाया था, बावजूद इसके नकवी ट्रॉफी लेकर चले गए।
Women's Asia Cup 2026: महिला एशिया कप फाइनल में भारत की शानदार जीत के बाद ट्रॉफी समारोह से जुड़ा एक विवाद चर्चा का विषय बन गया। श्रीलंका को हराकर खिताब जीतने वाली भारतीय महिला टीम ने ACC अध्यक्ष और पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी से ट्रॉफी लेने से इनकार कर दिया। बताया गया कि भारतीय टीम ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि वह मोहसिन नकवी के हाथों ट्रॉफी स्वीकार नहीं करेगी। इसके बाद पुरस्कार वितरण समारोह को लेकर स्थिति असहज हो गई और विजेता टीम मंच से दूर रही।
जीत भारत की, लेकिन ट्रॉफी समारोह बना विवाद की वजह
भारतीय महिला टीम ने मैदान पर शानदार प्रदर्शन करते हुए श्रीलंका को हराकर एशिया कप का खिताब अपने नाम किया। हालांकि, मैच खत्म होने के बाद ध्यान खेल से ज्यादा पुरस्कार वितरण समारोह पर चला गया। भारतीय खिलाड़ियों ने ACC अध्यक्ष मोहसिन नकवी से ट्रॉफी लेने से परहेज किया। रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले 12 महीनों में यह दूसरा मौका है, जब भारतीय खिलाड़ियों ने नकवी से ट्रॉफी स्वीकार नहीं करने का फैसला किया।
ACC प्रोटोकॉल और ट्रॉफी देने की परंपरा पर उठे सवाल
इस पूरे विवाद के बाद एशियन क्रिकेट काउंसिल यानी ACC के ट्रॉफी वितरण प्रोटोकॉल को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है। बड़े क्रिकेट आयोजनों में आमतौर पर ट्रॉफी किसी तटस्थ अधिकारी, स्थानीय क्रिकेट बोर्ड के प्रतिनिधि या मेजबान बोर्ड के पदाधिकारी द्वारा सौंपी जाती है। इस व्यवस्था का उद्देश्य पुरस्कार समारोह की गरिमा और खेल की तटस्थता बनाए रखना होता है। भारतीय टीम के रुख के बाद सवाल उठने लगे कि ऐसी स्थिति में किसी दूसरे ACC अधिकारी या मेजबान क्रिकेट बोर्ड के प्रतिनिधि को ट्रॉफी सौंपने की जिम्मेदारी क्यों नहीं दी गई।
दुबई फाइनल के बाद आखिर क्या हुआ?
फाइनल के बाद भारतीय टीम पुरस्कार वितरण के लिए मंच पर नहीं आई। इसके बाद समारोह को लेकर गतिरोध पैदा हो गया। बताया गया कि मोहसिन नकवी ने किसी अन्य तटस्थ अधिकारी को विजेता ट्रॉफी सौंपने की जिम्मेदारी नहीं दी। उपविजेता श्रीलंका की टीम को चेक दिया गया, जबकि भारतीय टीम को ट्रॉफी और मेडल्स का औपचारिक हैंडओवर नहीं हो सका। इसी घटनाक्रम ने क्रिकेट जगत में नई बहस छेड़ दी और पुरस्कार वितरण की प्रक्रिया को लेकर सवाल खड़े हो गए।
BCCI ने पहले ही दिया था विकल्प
रिपोर्ट के अनुसार, BCCI के पदाधिकारियों ने मैच से पहले ACC को भारतीय टीम के रुख से अवगत करा दिया था। भारतीय पक्ष ने कथित तौर पर साफ कहा था कि टीम राजनीतिक प्रतीकवाद से दूरी बनाए रखना चाहती है और मोहसिन नकवी से ट्रॉफी स्वीकार नहीं करेगी। इस स्थिति से बचने के लिए विकल्प भी सुझाए गए थे। भारतीय पक्ष की ओर से कहा गया था कि ACC के किसी अन्य पदाधिकारी या Emirates Cricket Board के प्रतिनिधि के जरिए ट्रॉफी दी जा सकती है। हालांकि, ऐसा कोई समाधान नहीं निकल सका और ट्रॉफी समारोह विवाद का केंद्र बन गया।
‘ट्रॉफी चाहिए तो दुबई आकर लें’, बयान से बढ़ी चर्चा
विवाद के बीच मोहसिन नकवी से जुड़ा एक बयान भी चर्चा में रहा, जिसमें कथित तौर पर कहा गया कि अगर भारत को ट्रॉफी चाहिए तो भारतीय कप्तान दुबई स्थित उनके कार्यालय से इसे लेकर जा सकते हैं। इस बयान के बाद विवाद और गहरा गया। क्रिकेट विशेषज्ञों और प्रशंसकों के बीच यह सवाल उठने लगा कि एक अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट की विजेता ट्रॉफी का औपचारिक हस्तांतरण किस प्रक्रिया के तहत होना चाहिए।
खिलाड़ियों के लिए जीत ही सबसे बड़ा सम्मान
भारतीय टीम के कोच की ओर से भी कहा गया कि खिलाड़ी बोर्ड के फैसले के साथ खड़े हैं और उनके लिए मैदान पर मिली जीत सबसे महत्वपूर्ण है। महिला एशिया कप जीतने के बाद भारतीय टीम ने एक बार फिर साबित किया कि उसका ध्यान मैदान पर प्रदर्शन और देश के लिए खिताब जीतने पर है। हालांकि, ट्रॉफी समारोह से जुड़ा यह विवाद अब ACC की प्रक्रियाओं और खेल में तटस्थता को लेकर बड़े सवाल खड़े कर रहा है। अब सभी की नजरें एशियन क्रिकेट काउंसिल पर होंगी कि विजेता टीम को ट्रॉफी सौंपने और इस पूरे विवाद को सुलझाने के लिए आगे क्या कदम उठाए जाते हैं।


