गुजरात में भूपेंद्र पटेल सरकार के 5 साल में शिक्षा क्षेत्र में बड़े बदलाव हुए। नमो लक्ष्मी से 25 लाख छात्राओं को सहायता, 41 नए सरकारी कॉलेज और ड्रॉपआउट में कमी दर्ज हुई।
गांधीनगर। गुजरात में मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के सुशासन के पांच वर्ष पूरे होने के अवसर पर शिक्षा क्षेत्र में किए गए कार्यों का ब्योरा सामने आया है। 13 सितंबर, 2026 को इस अवधि के पांच वर्ष पूरे हो रहे हैं। सरकार के अनुसार, इन वर्षों में स्कूली शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा, छात्रवृत्ति, तकनीक, अनुसंधान और स्टार्टअप तक कई स्तरों पर सुविधाओं का विस्तार किया गया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के मुख्यमंत्री रहते शिक्षा के क्षेत्र में जिन पहलों की शुरुआत की थी, उन्हें आगे बढ़ाते हुए मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में स्कूलों और कॉलेजों में नए अवसर उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया है। सरकार का दावा है कि इन प्रयासों का असर छात्राओं की शिक्षा, स्कूलों के बुनियादी ढांचे और ड्रॉपआउट दर में भी दिखाई दे रहा है।
Namo Lakshmi Yojana: 25 लाख से अधिक छात्राओं को 2,110 करोड़ रुपये की सहायता
वर्ष 2024 में शुरू की गई ‘नमो लक्ष्मी’ योजना के तहत उच्चतर माध्यमिक कक्षाओं में पढ़ने वाली छात्राओं को शिक्षा जारी रखने के लिए आर्थिक सहायता दी जा रही है। सरकार के मुताबिक, योजना शुरू होने के बाद अब तक 25 लाख से अधिक छात्राओं को 2,110 करोड़ रुपये से ज्यादा की सहायता मिल चुकी है। योजना लागू होने के बाद उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों में अध्ययनरत छात्राओं की संख्या में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। सरकार इसे बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मान रही है।
इसी तरह, ‘नमो सरस्वती विज्ञान साधना’ योजना के तहत वर्ष 2024-25 से अब तक 3.54 लाख से अधिक विद्यार्थियों को 290 करोड़ रुपये की सहायता दी गई है। वहीं, ‘मुख्यमंत्री ज्ञान साधना मेरिट स्कॉलरशिप’ योजना के अंतर्गत वर्ष 2023-24 से अब तक 176 करोड़ रुपये से अधिक की सहायता प्रदान की गई है।
Mission Schools of Excellence: गुजरात में 13,353 नए क्लासरूम तैयार
गुजरात में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के क्रियान्वयन के साथ स्कूलों के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने पर भी काम किया गया है। सरकार के अनुसार, ‘मिशन स्कूल्स ऑफ एक्सीलेंस’ के तहत अब तक:
- 13,353 नए क्लासरूम बनाए गए हैं।
- 21,000 नई कंप्यूटर लैब तैयार की गई हैं।
- 1,09,000 नए स्मार्ट क्लासरूम स्थापित किए गए हैं।
- 5,000 नई STEM लैब का काम पूरा हुआ है।
इन सुविधाओं का उद्देश्य विद्यार्थियों को पारंपरिक पढ़ाई के साथ तकनीक, विज्ञान और प्रयोग आधारित शिक्षा के बेहतर अवसर देना है।
शिक्षकों की भर्ती और नए स्कूलों को मंजूरी
वर्ष 2024 की भर्ती प्रक्रिया में सरकारी और गैर-सरकारी अनुदानित माध्यमिक तथा उच्चतर माध्यमिक स्कूलों में 9,400 शिक्षा सहायकों और 470 प्रधानाध्यापकों की भर्ती की गई। इसके अलावा, 2,230 पुराने शिक्षकों की भर्ती/स्थानांतरण भी किया गया है। वर्ष 2026-27 में 200 नए कंपोजिट स्कूल, 95 नए सरकारी माध्यमिक स्कूल और 3 नए उच्चतर माध्यमिक स्कूलों को मंजूरी दी गई है। सरकार का कहना है कि इससे स्कूलों तक पहुंच और शिक्षा की उपलब्धता बढ़ाने में मदद मिलेगी।
Kanya Kelavani Mahotsav और RTE: बालिका शिक्षा पर जोर
वर्ष 2026 में कन्या केळवणी महोत्सव और शाला प्रवेशोत्सव के 24वें संस्करण का आयोजन किया गया। इसके साथ ही राज्य के सभी स्कूलों में ‘नो डिटेंशन पॉलिसी’ समाप्त कर दी गई है। शिक्षा के अधिकार यानी RTE के तहत कक्षा-1 में प्रवेश के लिए आय सीमा में भी वृद्धि की गई है। सरकार के अनुसार, इन फैसलों का उद्देश्य अधिक बच्चों को शिक्षा व्यवस्था से जोड़ना और जरूरतमंद परिवारों के लिए प्रवेश के अवसर आसान बनाना है।
School Dropout Rate: 2001-02 के 37.22% से घटकर 2.35%
गुजरात में स्कूल छोड़ने वाले बच्चों की संख्या कम करने के लिए भी कई कदम उठाए गए हैं। सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, कक्षा 1 से 8 तक का ड्रॉपआउट रेट वर्ष 2001-02 में 37.22 फीसदी था, जो वर्ष 2024-25 में घटकर 2.35 फीसदी रह गया। संभावित ड्रॉपआउट की समय रहते पहचान के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित अर्ली वार्निंग सिस्टम (EWS) लागू किया गया है। इस प्रणाली के जरिए अब तक लगभग 1,68,000 विद्यार्थियों की पहचान कर उन्हें पढ़ाई पूरी करने के लिए मार्गदर्शन दिया गया है। यह व्यवस्था उन विद्यार्थियों पर समय रहते ध्यान देने की कोशिश है, जिनके स्कूल छोड़ने की आशंका हो सकती है।
Inclusive Education: विशेष जरूरत वाले बच्चों के लिए 37 नए रिसोर्स रूम
समावेशी शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए गुजरात में 37 नए रिसोर्स रूम तैयार किए गए हैं। इनमें थेरेपी उपकरण, डिजिटल पैनल, रैंप, रेलिंग और CWSN टॉयलेट जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। CWSN यानी Children with Special Needs के लिए तैयार की गई इन सुविधाओं का उद्देश्य विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को स्कूलों में अधिक अनुकूल वातावरण देना है। इसके अलावा, सरकारी प्राथमिक स्कूलों में योग एवं स्वास्थ्य शिक्षा के लिए 1,141 शिक्षकों के नए पद भी सृजित किए गए हैं।
Higher Education in Gujarat: पांच वर्षों में 41 नए सरकारी कॉलेज
उच्च शिक्षा के क्षेत्र में भी संस्थानों की संख्या बढ़ाने पर जोर दिया गया है। सरकार के अनुसार, विद्यार्थियों को अपने गृह क्षेत्र के करीब उच्च शिक्षा के अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से पिछले पांच वर्षों में कुल 41 नए सरकारी कॉलेज शुरू किए गए हैं। इनमें 24 कॉलेज गैर-आदिवासी क्षेत्रों में और 17 कॉलेज आदिवासी क्षेत्रों में शुरू किए गए हैं। इसके अलावा, 15 सरकारी कॉलेजों में नए संकाय भी आरंभ किए गए हैं। इस विस्तार का मकसद विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए दूर न जाना पड़े और अलग-अलग क्षेत्रों में पढ़ाई के विकल्प उपलब्ध हों।
मुख्यमंत्री युवा स्वावलंबन योजना: 3.97 लाख विद्यार्थियों को सहायता
मुख्यमंत्री युवा स्वावलंबन योजना के तहत पिछले पांच वर्षों में 3,97,415 विद्यार्थियों को 2,068.67 करोड़ रुपये की सहायता दी गई है। वहीं, मुख्यमंत्री कन्या केळवणी निधि योजना के अंतर्गत 24,802 छात्राओं को 797.01 करोड़ रुपये की सहायता प्रदान की गई है। ये योजनाएं विद्यार्थियों, खासकर छात्राओं, को उच्च शिक्षा जारी रखने में आर्थिक सहयोग देने के उद्देश्य से संचालित की जा रही हैं।
SHODH और SSIP 2.0: अनुसंधान से स्टार्टअप तक बढ़ा समर्थन
गुजरात में उच्च शिक्षा के साथ अनुसंधान और नवाचार को भी बढ़ावा देने के लिए योजनाएं लागू की गई हैं। SHODH योजना के तहत पिछले पांच वर्षों में पीएचडी विद्यार्थियों को 113.52 करोड़ रुपये की सहायता दी गई है। इसी तरह, SSIP 2.0 यानी Student Startup and Innovation Policy 2.0 के तहत विद्यार्थियों के नवाचारपूर्ण विचारों को आगे बढ़ाने के लिए सहायता दी जा रही है। सरकार के मुताबिक:
- 6,077 प्रूफ ऑफ कॉन्सेप्ट को 2.50 लाख रुपये तक की सहायता प्रदान की गई।
- विद्यार्थियों के विचारों से 962 स्टार्टअप स्थापित हुए।
सरकार का कहना है कि इन पहलों से विद्यार्थियों को केवल डिग्री तक सीमित रहने के बजाय अनुसंधान, नवाचार और उद्यमिता की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर मिल रहा है।
गुजरात में शिक्षा सुधार: सरकार ने गिनाईं उपलब्धियां
मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में शिक्षा क्षेत्र में किए गए कार्यों के आंकड़े बताते हैं कि सरकार ने छात्रवृत्ति, स्कूल इंफ्रास्ट्रक्चर, शिक्षक भर्ती, ड्रॉपआउट में कमी, समावेशी शिक्षा और उच्च शिक्षा के विस्तार को प्राथमिकता दी है। जहां एक ओर ‘नमो लक्ष्मी’ और अन्य योजनाओं के जरिए विद्यार्थियों को आर्थिक सहायता दी गई है, वहीं दूसरी ओर स्मार्ट क्लासरूम, कंप्यूटर लैब, नए कॉलेज और स्टार्टअप सहायता जैसी पहलों के जरिए शिक्षा व्यवस्था को तकनीक और नवाचार से जोड़ने की कोशिश की गई है।
