एक ऐसी खुफिया बटालियन जिससे आज छूट रहे हैं चीन के पसीने

स्‍पेशल फ्रंटियर फोर्स। सितंबर की शुरुआत से ही ये खुफिया फोर्स चर्चा में है। इसकी यूनिट को विकास बटालियन कहा जाता है। लद्दाख में चीन को 29-30 अगस्‍त की रात नाकों चने चबवाने वाली विकास बटालियन की नींव भी चीन की वजह से ही पड़ी थी। अक्‍टूबर 1962 में जब चीन ने हमले शुरू किए, तभी से तिब्‍बती शरणार्थियों की एक फौज खड़ी करने का आइडिया आया। तब इंटेलिजेंस ब्यूरो की कमान संभाल रहे भोला नाथ मलिक ने प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के सामने यह सुझाव रखा। फोर्स को लीड करने के लिए चुना गया ब्रिगेडियर सुजान सिंह को।

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स्‍पेशल फ्रंटियर फोर्स। सितंबर की शुरुआत से ही ये खुफिया फोर्स चर्चा में है। इसकी यूनिट को विकास बटालियन कहा जाता है। लद्दाख में चीन को 29-30 अगस्‍त की रात नाकों चने चबवाने वाली विकास बटालियन की नींव भी चीन की वजह से ही पड़ी थी। अक्‍टूबर 1962 में जब चीन ने हमले शुरू किए, तभी से तिब्‍बती शरणार्थियों की एक फौज खड़ी करने का आइडिया आया। तब इंटेलिजेंस ब्यूरो की कमान संभाल रहे भोला नाथ मलिक ने प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के सामने यह सुझाव रखा। फोर्स को लीड करने के लिए चुना गया ब्रिगेडियर सुजान सिंह को।

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