पश्चिमी यूपी को साधने में लगे सभी राजनीतिक दल, क्या है जमीनी हकीकत, देखिए किठौर विधानसभा से ग्राउंड रिपोर्ट

2022 चुनाव से पहले केंद्र सरकार ने तीन कृषि कानून वापस लेने की घोषणा की थी और ऐसा माना जा रहा था कि 3 कृषि कानून वापस होने के बाद,किसान भाजपा की तरफ चुनावों में अपना रुख मोड़ लेंगे। इसी पर चर्चा करने के लिए हमारी टीम मेरठ किठौर विधानसभा के अम्हेडा गांव पहुँची जहाँ किसान भाजपा से नाखुश दिखे।

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मेरठ: उत्तर प्रदेश ने विधानसभा चुनाव से पहले सभी राजनीतिक दल पश्चिमी उत्तर प्रदेश के क्षेत्रों में पूरी तरह सक्रिय दिखाई दे रहे हैं, ऐसे में पश्चिमी यूपी की जमीनी हकीकत जानने के लिए एशियानेट हिंदी की टीम किठौर विधानसभा पहुंची, जहां के लोगों ने अपनी समस्याओं को सामने रखा।

2022 चुनाव से पहले केंद्र सरकार ने तीन कृषि कानून वापस लेने की घोषणा की थी और ऐसा माना जा रहा था कि 3 कृषि कानून वापस होने के बाद,किसान भाजपा की तरफ चुनावों में अपना रुख मोड़ लेंगे। इसी पर चर्चा करने के लिए हमारी टीम मेरठ किठौर विधानसभा के अम्हेडा गांव पहुँची जहाँ किसान भाजपा से नाखुश दिखे। किसानों का कहना था कि सरकार ने कानून तो वापस ले लिए लेकिन उनके कई अन्य मुद्दे भी हैं जिन पर अभी तक संज्ञान नहीं लिया गया। किसानों ने कहा कि एमएसपी पर कानून बनना चाहिए और सरकार ने आवारा पशुओं को लेकर भी कानून बनाया था लेकिन जमीनी हकीकत उसकी कुछ और ही है आज भी आवारा पशु किसानों की फसल बर्बाद करते हैं जिससे किसानों का काफी नुकसान होता है। देखें वीडियो में क्या रहने वाले हैं किसानों के चुनावों में मुद्दे।

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