कोरोना संक्रमण के बीच क्या है चुनाव प्रचार सामग्री बेचने वालों का हाल, देखिए ग्राउंड रिपोर्ट

5 साल चुनाव का इन्तेजार करते करते कट गए, फिर इन ही दुकानदारों पर कोरोना की मार भी पड़ गयी। आलम ये है कि दुकानदारों के पास अब एक भी आर्डर नही है।
दुकानदारों ने बताया कि इससे पहले आर्डर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यक्रम के समय मिला था और उससे पहले अखिलेश यादव और जयंत चौधरी की जनसभा के लिए मिला था तब से अब तक कोई भी आर्डर चुनाव सामग्री के लिए प्राप्त नहीं हुआ।
 

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मेरठ: कोरोना के बढ़ते मामलों को देखते हुए चुनाव आयोग ने आगामी विधानसभा चुनाव (UP Vidhansabha CHunav 2022) के लिए कई पाबंदियां लगा दी जो अब चुनाव सामग्री बेचने वाले छोटे दुकानदारों के लिए ग्रहण बनी हुई है। ऐसा पहली बार हुआ है जब कोई पार्टी का प्रत्याशी जनसभाओं को संबोधित नहीं कर सकता, रैलियां नहीं निकाल सकता और अब आचार संहिता लगने के बाद कहीं पर अपने झंडे भी नहीं लगा सकता। इसी के चलते मेरठ के संवादाता अनमोल शर्मा ने चुनाव सामग्री बेचने वाले दुकानदार से बात की देखिए एशियानेट हिंदी की ग्राउंड रिपोर्ट में क्या है दुकानदारों का हाल...

5 साल चुनाव का इन्तेजार करते करते कट गए, फिर इन ही दुकानदारों पर कोरोना की मार भी पड़ गयी। आलम ये है कि दुकानदारों के पास अब एक भी आर्डर नही है।
दुकानदारों ने बताया कि इससे पहले आर्डर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यक्रम के समय मिला था और उससे पहले अखिलेश यादव और जयंत चौधरी की जनसभा के लिए मिला था तब से अब तक कोई भी आर्डर चुनाव सामग्री के लिए प्राप्त नहीं हुआ।

पाबंदी हटने की उम्मीद नही
मेरठ के इंद्रा चौके के पास चुनाव सामग्री बेचने वाले व्यपारियों की दुकानें है जो पिछले कई दशकों से चुनाव सामग्री जैसे पार्टी के झंडे,टोपी,पताके, आदि बनाने का काम करते हैं। दुकानदार आसिफ बताते हैं कि ऐसा पहले कभी नहीं हुआ जब चुनाव के समय एक भी आर्डर प्राप्त नहीं हुआ हो। पहले कोरोनकाल में दुकानें बंद रखनी पड़ी फिर अब जब व्यापार पटरी पर लौटने की उम्मीद थी तब चुनाव आयोग ने प्रचार प्रसार पर पाबंदी लगा दी। अब इलेक्शन तक पाबंदी हटने की कोई उम्मीद नजर नही आ रही है।

ट्रांसपोर्ट्स को भी नही मिल रहे आर्डर
वही, दूसरी तरफ ट्रांसपोर्ट का काम करने वाले व्यापारियों पर भी चुनाव आयोग की पाबंदियों का ग्रहण लगा हुआ है।दरअसल में जनसभा करने के लिए और भीड़ जुटाने के लिए प्रत्याशी किराए पर कई कई गाड़ियां लिया करते थे बस लिया करते थे जो इस बार पाबंदियों के चलते शून्य हो गया है।

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